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यूएन80 पहल: संयुक्त राष्ट्र सुधार प्रक्रिया 'महत्त्वपूर्ण नए चरण में'

यूएन80 पहल: संयुक्त राष्ट्र सुधार प्रक्रिया 'महत्त्वपूर्ण नए चरण में'

यूएन प्रमुख ने गुरुवार को महासभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि भूराजनैतिक उथल-पुथल के इस दौर में निष्क्रिय रहने से, मानव पीड़ा और गहरी होगी, इसलिए सुधार आवश्यक हैं.

मार्च 2025 में शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि "हर शासनादेश, हर डॉलर और हर निर्णय" लोगों व पृथ्वी के लिए अधिक प्रभावशाली परिणाम दे सके, विशेषकर ऐसे समय में जब आवश्यकताएँ बढ़ रही हैं और संसाधन सीमित हैं.

महासचिव ने बताया कि यह परियोजना यूएन प्रणाली के कामकाज की पद्धति, अधिक प्रभाव के लिए पारस्परिक सहयोग के तौर-तरीक़ों में एक बुनियादी बदलाव है.

उन्होंने कहा कि यह पहल अब निर्णय-निर्धारण और क्रियान्वयन के एक महत्त्वपूर्ण नए चरण में प्रवेश कर चुकी है.

सुधार प्रक्रिया

मंगलवार को जारी एक प्रगति रिपोर्ट में उन क़दमों का उल्लेख किया गया है, जो कार्यकुशलता बढ़ाने, शासनादेशों के क्रियान्वयन की समीक्षा करने और संयुक्त राष्ट्र प्रणाली के आन्तरिक ढाँचे में बदलावों की सम्भावनाओं का पता लगाने के लिए उठाए गए हैं. इनमें संयुक्त राष्ट्र की कुछ इकाइयों के सम्भावित विलय का प्रस्ताव भी शामिल है.

यूएन सचिवालय और उससे जुड़े अन्य विभागों में कामकाज को अधिक सुव्यवस्थित बनाने की प्रक्रिया पहले से जारी है. इसमें दोहराव को कम करने और समन्वय बेहतर बनाने जैसे उपाय शामिल हैं. ये प्रयास संगठन की कार्यप्रणाली को आधुनिक बनाने की व्यापक मुहिम का हिस्सा हैं.

इस पहल का उद्देश्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाना और यूएन प्रणाली के भीतर सेवाओं को अधिक मज़बूत करना भी है, ताकि सदस्य देशों को तेज़ और कम लागत वाली सहायता उपलब्ध कराई जा सके.

पारदर्शिता व जवाबदेही

सुधार प्रयासों का एक अन्य प्रमुख स्तम्भ उन शासनादेशों पर केन्द्रित है, जिन्हें सदस्य देशों द्वारा संयुक्त राष्ट्र को सौंपा जाता है. इसके तहत यह देखा जा रहा है कि इन शासनादेशों को किस प्रकार तैयार, लागू और समीक्षा किया जाता है.

रिपोर्ट में राष्ट्रीय सरकारों के साथ जारी उस कार्य का उल्लेख किया गया है, जिसका उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना, रिपोर्टिंग के बोझ को कम करना और शासनादेशों को उपलब्ध संसाधनों तथा परिणामों के साथ बेहतर ढंग से जोड़ना है.

संयुक्त राष्ट्र के कामकाज का मार्गदर्शन करने वाले हज़ारों शासनादेशों के मद्देनज़र, समीक्षा प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वे प्रासंगिक, समन्वित और ठोस परिणाम देने पर केन्द्रित बने रहें.

समन्वित कार्रवाई

यूएन की संरचना में बदलाव के प्रस्तावों में विभिन्न विभागों और एजेंसियों के बीच अधिक तालमेल तथा शान्ति व सुरक्षा, विकास और मानवाधिकार से जुड़े निकायों के बीच मज़बूत सहयोग पर ज़ोर दिया गया है.

इस पहल के तहत कम विभाजित कार्यप्रणाली और अधिक एकीकृत दृष्टिकोण की आवश्यकता चिन्हित की गई है. इसके साथ ही साझा डेटा मंचों और मज़बूत समन्वय तंत्र जैसे नए उपायों पर भी बल दिया गया है.

हालाँकि, संयुक्त राष्ट्र की संरचना में किसी भी बदलाव से जुड़े फ़ैसले सदस्य देशों के हाथ में होंगे और प्राथमिकताओं व क्रियान्वयन पर अन्तिम निर्णय वही लेंगे.

महासचिव ने यूएन80 पहल को "प्रगतिशील प्रक्रिया" क़रार देते हुए कहा है कि अधिक समन्वित और प्रभावशाली संयुक्त राष्ट्र प्रणाली के निर्माण के लिए निरन्तर भागीदारी आवश्यक होगी.

उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे यह पहल आगे बढ़ेगी, इसके विभिन्न पहलुओं को एकीकृत ढाँचे में समाहित किया जाएगा, ताकि अधिक मज़बूत और समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके.

अब तक हुई प्रगति

  • वर्ष 2026 के लिए पदों में 21 प्रतिशत की कटौती की गई है. कर्मचारियों पर इसके प्रभाव को न्यूनतम रखने का प्रयास किया गया है.

  • न्यूयॉर्क में 6 हज़ार कर्मियों को सेवाएँ प्रदान करने वाले एक साझा प्रशासनिक मंच के तहत 11 टीमों का विलय किया गया है, जबकि 5 अन्य कार्यस्थलों को भी इससे जोड़े जाने की योजना है.

  • स्पेन के वेलेंसिया शहर में सचिवालय-स्तरीय डिजिटल सेवाओं के लिए एक डिजिटल हब शुरू किया गया है.

  • 10 वेतन-प्रबन्धन केन्द्रों को एकीकृत कर एक टीम के अधीन लाया गया है.

  • सचिवालय के 220 पदों को अधिक लागत वाले स्थानों से स्थानान्तरित किया गया है, जबकि संयुक्त राष्ट्र प्रणाली में लगभग 1,900 अन्य पदों के स्थानान्तरण की प्रक्रिया भी जारी है.

  • वरिष्ठ स्तर के पदों में कटौती की प्रक्रिया जारी है और वर्ष 2028 के बजट में इससे जुड़ी अतिरिक्त कटौतियों को शामिल किए जाने की अपेक्षा है.

  • नए मानवतावादी कॉम्पैक्ट के पायलट क्रियान्वयन की शुरुआत 5 संकटग्रस्त क्षेत्रों यानि अफ़ग़ानिस्तान, हेती, क़ाबिज़ फ़लस्तीनी क्षेत्र, सोमालिया और सूडान में की गई है. इसके तहत आपूर्ति श्रृंखलाओं को एकीकृत किया जा रहा है, जिन पर कुल मानवीय व्यय का लगभग 70 प्रतिशत ख़र्च होता है.

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