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15 दिन भी नहीं टिक पाया मिर्जापुर का पीपा पुल, पानी में बहा तो बीजेपी MLA रत्नाकर मिश्रा किसे सुनाने लगे?

15 दिन भी नहीं टिक पाया मिर्जापुर का पीपा पुल, पानी में बहा तो बीजेपी MLA रत्नाकर मिश्रा किसे सुनाने लगे?

UP Tak 1 month ago

Platoon Bridge Collapse: मिर्जापुर के विंध्याचल धाम में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए करोड़ों की लागत से बना पीपा पुल उद्घाटन के महज 15 दिनों के भीतर ही जवाब दे गया. गंगा की लहरों के बीच पुल के धंसने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है.

बता दें कि चैत्र नवरात्र के दौरान विंध्याचल धाम आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की राह आसान करने के लिए यह प्लाटून बनाया गया था. हैरानी की बात यह है कि 18 मार्च को ही स्थानीय विधायक रत्नाकर मिश्रा ने बड़े धूमधाम से इसका उद्घाटन किया था. लेकिन पखवाड़े भर के भीतर ही पुल की गुणवत्ता पर सवालिया निशान लग गए हैं.

पानी में बह गया पीपा पुल

हरसिंहपुर से विंध्याचल धाम को जोड़ने वाले इस पुल का एक हिस्सा गंगा के बढ़ते जलस्तर के कारण पानी में समा गया. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि पुल का बीच का हिस्सा पानी में पूरी तरह डूब चुका है. स्थानीय लोगों के मुताबिक,पीडब्ल्यूडी विभाग की बड़ी लापरवाही के कारण यह स्थिति पैदा हुई है. आरोप है कि पुल के जिस हिस्से में पानी अधिक था. वहां नीचे लोहे का पीपा (प्लाटून) लगाने के बजाय सिर्फ बालू के ऊपर लोहे की पटरी डाल दी गई थी. जैसे ही गंगा का जलस्तर थोड़ा बढ़ा, बालू बह गई और पुल बीच से धंस गया.

अधिकारियों पर बरसे विधायक

पुल धंसने की खबर और वीडियो वायरल होते ही प्रशासन में खलबली मच गई. आनन-फानन में विभाग ने रात के अंधेरे में ही मरम्मत का काम शुरू किया.लेकिन खामियां अब भी बरकरार हैं.पुल के बीच का हिस्सा पानी में डूबे होने के कारण दर्शनार्थियों को घुटनों तक गंगा के पानी में उतरकर आना-जाना पड़ रहा है. बुजुर्गों और बच्चों के लिए यह काफी जोखिम भरा साबित हो रहा है.

बीजेपी विधायक रत्नाकर मिश्रा ने इस मामले में पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों से फोन पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है. विधायक ने कहा कि 'अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि पुल को तत्काल और मजबूती के साथ दुरुस्त किया जाए. श्रद्धालुओं की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं होगा.' वहीं स्थानीय निवासी रामचंद्र निषाद ने बताया कि पुल निर्माण के समय ही लापरवाही बरती गई थी. जहां गहराई ज्यादा थी वहां रेत के ऊपर लोहे की प्लेटें डाल दी गई थीं जो पानी बढ़ने के साथ ही डूब गईं.

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