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बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे को अखिलेश यादव ने भेजा मानहानि नोटिस, दोनों के बीच विवाद की क्या है जड़?

बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे को अखिलेश यादव ने भेजा मानहानि नोटिस, दोनों के बीच विवाद की क्या है जड़?

UP Tak 6 days ago

योध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला अब एक बड़े सियासी संग्राम में तब्दील हो चुका है. राम के दरबार में जहां चढ़ावे की गिनती होनी चाहिए थी वहां अब राजनीति फोन कॉल और सीडीआर की गिनती में उलझ गई है.

एक तरफ भाजपा सांसद निशिकांत दुबे का दावा है कि चोरी के आरोपी टिन्नू यादव और सपा प्रमुख अखिलेश यादव के बीच लगातार बातचीत होती थी. वहीं दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी ने पलटवार करते हुए कहा था कि अगर 10 मिनट के भीतर निशिकांत दुबे अपना एक्स पोस्ट डिलीट नहीं करते हैं तो वह उनपर FIR कराएंगे. इस बीच अखिलेश यादव ने निशिकांत दुबे को मानहानि का कानूनी नोटिस थमा दिया है. दोनों के बीच सोशल मीडिया पर हो रहे लगातार टकराव का मामला सूर्खियों में बना हुआ है.

क्या है पूरा मामला

इस पूरे विवाद में उस समय सबसे बड़ा मोड़ आ गया जब समाजवादी पार्टी ने केवल बयानों तक सीमित न रहकर सीधे अदालत का रुख करने का मन बना लिया. सपा ने भाजपा सांसद निशिकांत दुबे को मानहानि का नोटिस भेजकर साफ कर दिया है कि अब यह लड़ाई अदालत की चौखट पर लड़ी जाएगी. भाजपा जहां लगातार यह सवाल पूछ रही है कि अगर सब कुछ सामान्य था तो राम मंदिर के चढ़ावा चोरी के आरोपी टिन्नू यादव और सपा नेताओं के बीच इतनी बातचीत क्यों हो रही थी? क्या यह सिर्फ एक संयोग था या फिर इसके पीछे कोई बड़ी वजह थी? वहीं समाजवादी पार्टी का कहना है कि सिर्फ हवा-हवाई बयानबाजी से किसी का चरित्र हनन नहीं किया जा सकता. अगर सत्तापक्ष के पास आरोप हैं तो उन्हें अदालत के सामने सबूत पेश करने चाहिए.

प्रेस कॉन्फ्रेंस में बरसे अखिलेश यादव

सपा प्रमुख अखिलेश यादव पहले ही सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए लिख चुके हैं कि 'फुगनी को फांसी, शाख को माफी.' उनका सीधा आरोप है कि जांच एजेंसियां केवल छोटी मछलियों को फंसाकर जेल भेज रही हैं. जबकि चंदे की चोरी के असली जिम्मेदार और बड़ी मछलियों को बचाया जा रहा है. हाल ही में हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब पत्रकारों ने भाजपा सांसदों द्वारा लगाए जा रहे आरोपों पर सवाल पूछा तो अखिलेश यादव ने तल्ख तेवर दिखाते हुए कहा 'सोचो, दिल्ली वालों के परिचय क्या हैं? इस पे तो हमारी पार्टी सीधे एफआईआर दर्ज कराएगी. सोशल मीडिया पर जितना भी झूठा प्रचार हमारे खिलाफ चलाया जा रहा है. एक-एक चुनकर उन सब पर एफआईआर दर्ज होगी. इसके अलावा अब कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है क्योंकि इस सरकार से न्याय मिलने वाला नहीं है. सरकार किसी की न्यायसंगत शिकायत सुनती ही नहीं है. इसलिए अब हमारे पास न्यायालय का ही एकमात्र रास्ता है.'

अदालत खोलेगी इस विवाद का ताला

स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों के नजदीक आते ही हर आपराधिक मामला एक राजनीतिक अखाड़ा बन जाता है. इस मामले में भी राजनीति की घंटी कम और आरोपों की घंटी ज्यादा बज रही है.

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या केवल किसी आरोपी से फोन पर बात होना ही किसी बड़ी साजिश का हिस्सा होने का सबूत माना जा सकता है? या फिर बिना जांच पूरी हुए सिर्फ राजनीतिक माहौल बनाने के लिए चरित्र हनन की राजनीति की जा रही है? चूंकि राम मंदिर देश के करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है, इसलिए इस मामले का हर पहलू बेहद संवेदनशील हो चुका है. अब इस सियासी और कानूनी लड़ाई की अगली तारीख अदालत ही तय करेगी और देखना होगा कि बंद लिफाफे में बंद सच का ताला कानून किस तरह खोलता है.

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