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कानपुर DM ने प्रेमनाथ यादव, अमित यादव और नेहा श्रीवास्तव को क्लर्क से चपरासी क्यों बना दिया? वजह हैरान कर देगी

कानपुर DM ने प्रेमनाथ यादव, अमित यादव और नेहा श्रीवास्तव को क्लर्क से चपरासी क्यों बना दिया? वजह हैरान कर देगी

UP Tak 1 week ago

Kanpur News: उत्तर प्रदेश के सरकारी दफ्तरों में कामकाज में ढिलाई बरतने वालों के लिए कानपुर कलेक्ट्रेट से एक नजीर पेश की गई है. यहां तैनात तीन जूनियर क्लर्क प्रेमनाथ यादव, अमित कुमार यादव और नेहा श्रीवास्तव को उनकी कार्यकुशलता में कमी के चलते पद से हटाकर चतुर्थ श्रेणी यानी कि चपरासी के पद पर भेज दिया गया है.

वजह सिर्फ इतनी थी कि वे निर्धारित मानक के अनुसार टाइपिंग स्पीड हासिल नहीं कर सके थे.

25 शब्द प्रति मिनट की रफ्तार भी नहीं पा सके अधिकारी

सरकारी नियमों के अनुसार, जूनियर क्लर्क के पद पर तैनात कर्मचारी के लिए एक मिनट में कम से कम 25 शब्द टाइप करना अनिवार्य है. कलेक्ट्रेट में तैनात प्रेमनाथ यादव, अमित कुमार यादव और नेहा श्रीवास्तव दो बार आयोजित हुई टाइपिंग परीक्षा में इस न्यूनतम मानक को पूरा करने में विफल रहे. लगातार मिल रहे मौकों के बाद भी सुधार न होने पर जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने सख्त रुख अपनाते हुए तीनों का डिमोशन करने का आदेश जारी कर दिया.

दो बार मिला मौका फिर भी नहीं हुए पास

प्रशासन ने इन कर्मचारियों को सीधे दंड देने के बजाय सुधार के पर्याप्त अवसर दिए थे. साल 2024 में जब पहली बार जब टाइपिंग टेस्ट हुआ तो प्रेमनाथ यादव, अमित कुमार यादव और नेहा श्रीवास्तव ये तीनों कर्मचारी निर्धारित गति नहीं पकड़ पाए. तब प्रशासन ने सहानुभूति दिखाते हुए केवल इनका इंक्रीमेंट रोका और चेतावनी दी कि अगली बार खुद को सुधारें. एक साल का समय मिलने के बाद दोबारा परीक्षा हुई, लेकिन नतीजा फिर वही रहा. तीनों कर्मचारी अनिवार्य 25 शब्द प्रति मिनट की गति तक नहीं पहुंच सके. ऐसे में अब कार्रवाई करते हुए डीएम कैंप कार्यालय में तैनात प्रेमनाथ यादव और कलेक्ट्रेट के अमित और नेहा को अब क्लर्क के पद से हटाकर चतुर्थ श्रेणी का कर्मचारी बना दिया गया है.

मृतक आश्रित कोटे से मिली थी नौकरी

ये तीनों कर्मचारी मृतक आश्रित कोटे के तहत विभाग में आए थे. नियम कहता है कि ऐसी नियुक्तियों में एक साल के भीतर टाइपिंग परीक्षा पास करना अनिवार्य होता है. हालांकि सहानुभूति के आधार पर इन्हें नौकरी मिली थी. लेकिन पद की गरिमा और न्यूनतम योग्यता को पूरा न कर पाना इनके लिए भारी पड़ गया. जिला प्रशासन का स्पष्ट मानना है कि कलेक्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण कार्यालयों में फाइलों की नोटिंग और दस्तावेज तैयार करने का काम पूरी तरह टाइपिंग पर निर्भर है. अगर बुनियादी कार्यकुशलता ही नहीं होगी तो सरकारी काम प्रभावित होगा. इस कार्रवाई से पूरे विभाग में यह संदेश गया है कि अब केवल नौकरी पा लेना काफी नहीं है बल्कि पद के अनुरूप दक्षता साबित करना भी जरूरी है.

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