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कौन हैं कमला देवी जिससे इटावा में जाकर अखिलेश यादव ने बंधवाई राखी, हो रही चर्चा!

कौन हैं कमला देवी जिससे इटावा में जाकर अखिलेश यादव ने बंधवाई राखी, हो रही चर्चा!

UP Tak 1 week ago

क्षाबंधन के त्यौहार पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव अपने गृह जनपद सैफई पहुंचे. वहां पहुंचकर उन्होंने न केवल पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटने का मूलमंत्र दिया.

इस दौरान सैफई की सड़कों पर जब अखिलेश यादव का काफिला निकला तो महिलाएं और बच्चियां उन्हें राखी बांधने के लिए उमड़ पड़ीं. अखिलेश ने भी मुस्कुराते हुए सभी से राखी बंधवाई और बड़े भाई का धर्म निभाते हुए लिफाफे भेंट किए.

लेकिन इस पूरे दौरे की सबसे खास और इमोशनल कर देने वाली तस्वीर तब सामने आई जब अखिलेश यादव इटावा की फ्रेंड्स कॉलोनी स्थित कमला देवी के घर पहुंचे. आइए जानते हैं कौन हैं कमला देवी और क्यों अखिलेश यादव अपने पिता मुलायम सिंह यादव की इस खास परंपरा को आज भी जिंदा रखे हुए हैं.

कौन हैं कमला देवी? अखिलेश और नेताजी से क्या है खास रिश्ता?

इटावा की फ्रेंड्स कॉलोनी में एक बेहद सामान्य जीवन जीने वाली कमला देवी कोई आम रिश्तेदार नहीं हैं बल्कि वे समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव की इकलौती बहन हैं. पांच भाइयों के बीच अकेली बहन कमला देवी ने खुद को हमेशा राजनीति की चकाचौंध से दूर रखा.

नेताजी मुलायम सिंह यादव के लिए कमला देवी सिर्फ छोटी बहन नहीं थीं बल्कि उनके दिल के बेहद करीब थीं. वहीं अखिलेश यादव के लिए वे महज बुआ नहीं बल्कि बचपन में मां की तरह प्यार देने और संभालने वाली शख्सियत रही हैं. अखिलेश के बचपन का एक बड़ा हिस्सा अपनी इसी बुआ की गोद में गुजरा है. यही वजह है कि दोनों के बीच आज भी अटूट आत्मीय रिश्ता है.

'जब तक नेताजी रहे, कोई रक्षाबंधन नहीं छूटा'

नेताजी मुलायम सिंह यादव का अपनी बहन कमला देवी के प्रति प्रेम जगजाहिर था. वे हर रक्षाबंधन पर शुभ मुहूर्त देखकर अपनी बहन के घर राखी बंधवाने जरूर पहुंचते थे. नेताजी के आने की खबर मिलते ही कमला देवी के घर के बाहर लोगों का हुजूम उमड़ पड़ता था.

10 अक्टूबर 2022 को जब मुलायम सिंह यादव का निधन हुआ तो लोगों के मन में सवाल था कि क्या यह परंपरा टूट जाएगी? लेकिन मुलायम सिंह यादव के जाने के बाद अखिलेश यादव और शिवपाल सिंह यादव ने इस परंपरा को टूटने नहीं दिया. अखिलेश यादव हर साल रक्षाबंधन पर अपनी बुआ के घर पहुंचते हैं, उनका हाल-चाल जानते हैं, राखी बंधवाते हैं और अपने पिता के बनाए रिवाज को बाखूबी आगे बढ़ा रहे हैं.

बहन के बनाए अचार के मुरीद थे नेताजी

मुलायम सिंह यादव और उनकी बहन कमला देवी के स्नेह के कई किस्से आज भी सुने और सुनाए जाते हैं. कहा जाता है कि मां के निधन के बाद कमला देवी ही नेताजी के लिए अचार बनाकर भेजा करती थीं. मुलायम सिंह यादव को अपनी बहन के हाथ का अचार इतना पसंद था कि अचार खत्म होते ही वे खुद फोन करके कहते थे 'अचार खत्म हो गया है, बनाकर रख देना.' चर्चा तो यह भी है कि एकाध बार बहन के हाथ का अचार विशेष रूप से हेलीकॉप्टर से भी मंगवाया गया था.

संसद का सत्र छोड़ अस्पताल पहुंचे थे मुलायाम सिंह

एक और मशहूर किस्सा है कि जब मुलायम सिंह यादव संसद सत्र के लिए जा रहे थे तभी उन्हें खबर मिली कि उनकी बहन कमला देवी की तबीयत खराब है और उन्हें मेदांता अस्पताल ले जाया गया है. नेताजी ने बिना एक पल गंवाए संसद जाने के बजाय अपने काफिले को सीधे अस्पताल की तरफ मोड़ दिया था.

2027 चुनाव का संदेश और कार्यकर्ताओं में उत्साह

अपने इस दौरे के दौरान अखिलेश यादव ने जहां एक तरफ पारिवारिक और भावनात्मक रिश्तों को संजोया. वहीं दूसरी तरफ पार्टी दफ्तर में कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर उन्हें 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव के लिए तैयार रहने को कहा. उन्होंने संदेश दिया कि सपा की जनहितकारी नीतियों को लेकर हर घर तक जाना है. इसके बाद वे अपने चाचा और सपा के राज्यसभा सांसद प्रो. रामगोपाल यादव के आवास पर भी गए और उनका आशीर्वाद लिया.

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