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पिता की जगह CHC का निरीक्षण करने पहुंचे MLA शफीक अहमद अंसारी के बेटे, फिर कुर्सी पर बैठकर अधिकारियों को देने लगे ज्ञान, अब बुरे फंसे

पिता की जगह CHC का निरीक्षण करने पहुंचे MLA शफीक अहमद अंसारी के बेटे, फिर कुर्सी पर बैठकर अधिकारियों को देने लगे ज्ञान, अब बुरे फंसे

UP Tak 2 weeks ago

Shafiq Ahmed Ansari Son: रामपुर की स्वार-टांडा विधानसभा सीट से अपना दल (एस) के विधायक शफीक अहमद अंसारी के बेटे का नाम सुर्खियों में छाया हुआ है.विधायक के बेटे ने कुछ ऐसा कर दिया है जिससे वह लोगों के निशाने पर आ गए हैं.

बता दें कि विधायक शफीक अहमद अंसारी सीएचसी का निरीक्षण करने जाना था. लेकिन उनकी जगह उनके बेटे निरीक्षण करने पहुंच गए. लेकिन ये बात यहीं खत्म नहीं हुई. इस दौरान विधायक के बेटे ने प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ाते हुए खुद को ही अधिकारी समझ लिया और सरकारी अस्पताल के प्रभारी की कुर्सी पर बैठकर उन्हें निर्देश देने लगे. इस दौरान का वीडियो वायरल होते ही वह ट्रोलर्स के निशाने पर आ गए. लोग इस वीडियो को शेयर करते हुए सरकारी सिस्टम में घुसकर इस तरह की हरकत करने वाले विधायक के बेटे की जमकर क्लास लगा रहे हैं.

पिता की जगह निरीक्षण करने गया था बेटा

मिली जानकारी के अनुसार, अस्पताल प्रशासन को सूचना दी गई थी कि विधायक शफीक अहमद अंसारी सीएचसी का निरीक्षण करने आएंगे. लेकिन मौके पर विधायक की जगह उनके बेटे पहुंच गए. इस दौरान विधायक के बेटे अकेले नहीं थे उनके साथ पुलिस का भारी दलबल भी मौजूद था.इतने से भी जब उनका मन नहीं भरा तो उन्होंने बकायदा सरकारी अस्पताल के प्रभारी की कुर्सी हथियाई.फिर उसपर बैठकर अधिकारियों को निर्देश देते हुए अपना वीडियो बनवाकर सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया.विधायक के बेटे के पास अस्पताल के निरीक्षण या किसी अधिकारी को निर्देश देने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं थी.

'कुर्सी ऑफर नहीं की गई वो खुद ही बैठ गए'

मामला बढ़ता देख सीएमओ रामपुर दीपा सिंह ने कड़ा रुख अपनाया है. उन्होंने बताया कि अस्पताल प्रभारी के मुताबिक विधायक के आने का फोन था. लेकिन उनके पुत्र आ गए.सीएमओ ने साफ किया कि 'अधिकारी ने कुर्सी ऑफर नहीं की थी. वह खुद ही बैठ गए. ऐसा कोई प्रोटोकॉल नहीं है कि विधायक के बेटे अस्पताल का निरीक्षण करें.' फिलहाल सीएमओ ने एडिशनल सीएमओ के नेतृत्व में एक जांच कमेटी बना दी है.

पुलिस लेगी कोई एक्शन?

सीएमओ ने यह भी कहा कि यह पुलिस का मामला है कि आखिर किस प्रोटोकॉल के तहत विधायक पुत्र को इतना भारी पुलिस बल मुहैया कराया गया था. जब सीएमओ से पूछा गया कि क्या यह मामला जालसाजी का बनता है और क्या एफआईआर दर्ज होगी? इस पर उन्होंने कहा कि रिपोर्ट आने के बाद शासन से मिलने वाले दिशा-निर्देशों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल, इस घटना ने सूबे की प्रशासनिक व्यवस्था और सत्ताधारी नेताओं के परिजनों की मनमर्जी पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं.

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