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Raebareli Police Controversy: रायबरेली में दरोगा पर वसूली के आरोप, NDPS केस में फंसाने का दावा लेकर एसपी कार्यालय पहुंचा पीड़ित पक्ष

Raebareli Police Controversy: रायबरेली में दरोगा पर वसूली के आरोप, NDPS केस में फंसाने का दावा लेकर एसपी कार्यालय पहुंचा पीड़ित पक्ष

UP Tak 2 weeks ago

Raebareli news: जिले की मित्र पुलिस एक बार फिर खाकी को शर्मसार करने वाले कारनामे को लेकर सुर्खियों में है. इस बार मामला भदोखर थाने का है, जहाँ निर्दोषों को फर्जी मुकदमे में फंसाने और फिर मोटी रकम वसूलने का एक सनसनीखेज खेल सामने आया है.

भदोखर थाना क्षेत्र के जमालपुर में खाद, बीज और दवा की दुकान चलाने वाले एक प्रतिष्ठित व्यापारी को जबरन गांजा तस्कर बनाने की साजिश रची गई. हद तो तब हो गई जब दिन के उजाले में उठाए गए व्यापारी को रात के अंधेरे में 'दौड़ाकर पकड़ने' की फिल्मी पटकथा एफआईआर (FIR) में लिख दी गई. अब इस पूरे फर्जीवाड़े और डेढ़ लाख रुपये की 'डील' का कच्चा चिट्ठा लेकर पीड़ित का भाई पुलिस कप्तान के दर पर न्याय की गुहार लगाने पहुंचा है.

शाम 4:30 बजे 'अगवा', रात 9:30 बजे 'मुठभेड़ वाला ड्रामा'

एसपी ऑफिस पहुंचे पीड़ित के भाई विनय श्रीवास्तव ने भदोखर पुलिस की कार्यप्रणाली के परखच्चे उड़ा दिए हैं. विनय ने बताया कि बीते 5 अप्रैल को भदोखर पुलिस दोपहर बाद करीब 4:30 बजे उनके भाई की जमालपुर स्थित दुकान पर धमकती है और उन्हें जबरन उठाकर थाने ले आती है. आरोप लगाया गया कि वे गांजे की सप्लाई करते हैं. असली खेल तब शुरू हुआ जब पुलिस ने एफआईआर दर्ज की. पुलिसिया कहानी के मुताबिक, व्यापारी को रात 9:30 बजे गश्त के दौरान 'दौड़ाकर' पकड़ा गया था. पीड़ित का दावा है कि उसके पास शाम 4:30 बजे से लेकर रात 7:30 बजे तक के ऐसे पुख्ता सबूत और रिकॉर्डिंग्स हैं, जो पुलिस की इस मनगढ़ंत कहानी की धज्जियां उड़ाने के लिए काफी हैं. दरोगा से लेकर सिपाही तक की कॉल रिकॉर्डिंग मेरे पास मौजूद है. पुलिस वाले खुद फोन पर कह रहे थे कि चले आओ, बैठकर सारी बात सेट कर लेते हैं.

निजी स्विफ्ट कार में बनी 'डील', वसूले ₹1.5 लाख

शिकायतकर्ता के अनुसार, भदोखर थाने के तत्कालीन दरोगा सुरेश चंद्र यादव ने इस पूरे मामले को मुंशीगंज पुलिस चौकी प्रभारी अनुज कुमार तोमर को यह कहकर सौंप दिया कि वे रायबरेली के NDPS (मादक पदार्थ) प्रभारी हैं. इसके बाद अनुज तोमर ने अपनी पर्सनल स्विफ्ट गाड़ी (UP 16...) में पीड़ित के भाई को बैठाया और मामले को रफा-दफा करने के एवज में 1.5 लाख रुपये की डिमांड रख दी. डर के मारे पीड़ित परिवार ने तुरंत 1 लाख रुपये चौकी प्रभारी को सौंप दिए। इतने से भी जब खाकी की भूख नहीं मिटी, तो रात में 20 हजार रुपये कैश 'नाश्ते-पानी' के नाम पर और वसूले गए. इसके बाद थाने के ही गौरव नाम के एक सिपाही ने 30 हजार रुपये यह कहते हुए झटके कि अफीम और गांजे की मात्रा कम दिखा रहे हैं, थोड़ा खर्चा-पानी दे दो तो जल्दी चालान कर देंगे ताकि एक दिन भी जेल में न रहना पड़े.

पोल खुली तो लौटाए 80% पैसे, बाकी पर कहा- 'ऊपर तक गया है माल'

मामला जब तूल पकड़ने लगा और पीड़ित पक्ष ने सबूत दिखाने शुरू किए, तो पुलिस बैकफुट पर आ गई. विनय श्रीवास्तव का आरोप है कि दरियापुर चौराहे के पास एक होटल में बैठक हुई, जहाँ चौकी प्रभारी अनुज कुमार तोमर ने ग्राम प्रधान प्रतिनिधि के माध्यम से वसूली गई रकम का लगभग 80 फीसदी हिस्सा (करीब ₹1.20 लाख) वापस कर दिया. जब बाकी बचे पैसों की मांग की गई, तो पुलिसकर्मियों ने साफ कह दिया कि बाकी का पैसा ऊपर तक दे दिया गया है, इसलिए वह वापस नहीं हो सकता. पुलिस के इस बयान ने अब महकमे के बड़े अफसरों को भी शक के घेरे में खड़ा कर दिया है.

जांच शुरू, महकमे में मची खलबली

फिलहाल, पीड़ित पक्ष ने इस पूरे मामले की लिखित शिकायत और घूसकांड से जुड़े ऑडियो-वीडियो साक्ष्य एडिशनल एसपी (ASP) आलोक सिंह के सामने पेश कर दिए हैं. एडिशनल एसपी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया है. अब देखना यह है कि खाकी को दागदार करने वाले इन 'वर्दीवाले गांजा तस्करों' पर गाज कब गिरती है.

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