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राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मास्टरमाइंड मिल गया, 15000 थी सैलरी... फिर भी घर में लग्जरी कार, 20 लाख कैश और 1121 डॉलर

राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मास्टरमाइंड मिल गया, 15000 थी सैलरी... फिर भी घर में लग्जरी कार, 20 लाख कैश और 1121 डॉलर

UP Tak 6 days ago

Ram Mandir Case: अयोध्या के राम मंदिर में हुई चढ़ावा चोरी ने हर राम भक्त को झकझोर कर रख दिया है. मामला तूल पकड़ने के बाद सीएम योगी के निर्देश पर एसआईटी का गठन किया गया था. इस पूरे मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम यानी एसआईटी ने अपनी शुरुआती रिपोर्ट में अविनाश शुक्ला नाम के शख्स को इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड बताया है.

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में एसआईटी की यह शुरुआती रिपोर्ट रखी गई, जिसने हर किसी के हैरान कर दिया है. सूत्रों के मुताबिक, यह कोई छोटी-मोटी चोरी नहीं बल्कि पूरे 40 दिनों तक चलाया गया एक सोचा-समझा रैकेट था, जिसमें दान के पैसों पर करीब 70 बार हाथ साफ किया गया. आस्था के सबसे बड़े केंद्र में इतनी बड़ी सेंधमारी कैसे हो गई? जब आप इसके पीछे का तरीका और बरामदगी के आंकड़े सुनेंगे तो भी सन्न रह जाएंगे.

सीसीटीवी में कैद हुआ पाप का पूरा खेल

जांच टीम ने जब राम मंदिर के काउंटिंग रूम के सीसीटीवी फुटेज खंगाले, तो सच सामने आ गया. 30 साल का अविनाश शुक्ला, जिसे ट्रस्ट ने दान के पैसे गिनने की जिम्मेदारी दी थी, वही इस पूरे स्कैम का केंद्र निकला.

फुटेज में साफ दिखा कि अविनाश पैसे गिनते वक्त बड़ी चालाकी से नोटों की गड्डियां और खुले पैसे छिपा देता था. इस काम में अकेले अविनाश नहीं था, बल्कि उसके साथ अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, करुणेश पांडे, मनीष यादव और रमा शंकर मिश्रा जैसे लोग भी शामिल थे. ये लोग सीसीटीवी की नजरों से बचकर पैसों को ठिकाने लगाने में अविनाश की मदद कर रहे थे.

क्या थी आरोपियों की हैसियत?

ट्रस्ट की तरफ से दान गिनने वाले इन कर्मचारियों को सब काटकर महीने के सिर्फ 15,000 रुपये सैलरी मिलती थी. लेकिन इनके कारनामे किसी बड़े कॉरपोरेट स्कैम से कम नहीं थे.

घर से मिली 'रामराज्य कोष' की पेटी और लाखों का कैश

जब अयोध्या पुलिस ने अविनाश शुक्ला के ठिकानों पर छापेमारी की, तो जो चीजें बरामद हुईं उसने पुलिस को भी चौंका दिया:

  • नकद और जेवरात: अविनाश के पास से 20.39 लाख रुपये कैश, 1,121 अमेरिकी डॉलर, सोने-चांदी के गहने और एक लग्जरी एसयूवी कार बरामद हुई.
  • बैंक खातों में भारी ट्रांजैक्शन: 15 हजार कमाने वाले अविनाश के बैंक खातों में उसकी कमाई से कई गुना ज्यादा का लेन-देन हो रहा था.
  • फर्जी दान पेटी: सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि अविनाश के घर से एक दान पेटी मिली, जिस पर "रामराज्य कोष" लिखा था और उस पर एक एक्टिव क्यूआर कोड भी लगा था. यानी भक्तों की आस्था को सीधे अपने निजी खाते में डाइवर्ट करने का पूरा इंतजाम था.

अब तक इस मामले में अविनाश शुक्ला समेत कुल 8 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. पुलिस ने सभी आरोपियों से अब तक कुल 79 लाख रुपये से ज्यादा की बरामदगी की है.

सुरक्षा में भारी चूक, अब होगा 5 साल का ऑडिट

एसआईटी की 9 पन्नों की इस रिपोर्ट ने मंदिर प्रबंधन की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि:

1. काउंटिंग रूम में आने-जाने वाले कर्मचारियों की चेकिंग ठीक से नहीं होती थी.
2. सीसीटीवी की मॉनिटरिंग और सुपरविजन बेहद कमजोर था, जिसका फायदा इन आरोपियों ने उठाया.

यह मामला कितना गंभीर है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एसआईटी ने अब राम मंदिर ट्रस्ट के पिछले 5 सालों के खातों का फिर से ऑडिट करने का आदेश दे दिया है. साथ ही पिछले दो सालों में हुए बड़े आयोजनों के खर्चों की भी जांच की जा रही है.

लाखों भक्त अपनी कमाई से रामलला के चरणों में जो अर्पण कर रहे थे, उस पर इस तरह डाका डाला जाना वाकई शर्मनाक है. फिलहाल जांच का दायरा बढ़ता जा रहा है और मुमकिन है कि आने वाले दिनों में कुछ और बड़े चेहरों पर भी गाज गिरे.

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Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: UP Tak