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UP Tak Ground Report: राम मंदिर चढ़ावा चोरी में घिरे चंपत राय को लेकर बनारस के पंडितो ने तगड़ा बोल दिया

UP Tak Ground Report: राम मंदिर चढ़ावा चोरी में घिरे चंपत राय को लेकर बनारस के पंडितो ने तगड़ा बोल दिया

UP Tak 1 week ago

UP ki Rai: अयोध्या राम मंदिर में हुए चढ़ावा चोरी के सनसनीखेज मामले ने अब एक नया और बेहद गंभीर मोड़ ले लिया है. SIT की जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि अप्रैल के अंत से लेकर 5 जून के बीच मंदिर में एक-दो बार नहीं बल्कि पूरे 70 बार चोरियां हुईं और ये सारी वारदातें सीसीटीवी कैमरों में भी रिकॉर्ड हुईं.

इस मामले में ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा की भूमिका संदिग्ध पाए जाने और महासचिव चंपत राय के मौन पर वाराणसी के विप्र और पंडित समाज ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. पिशाच मोचन कुंड पर जुटे युवा पुजारियों और देश-भर से आए श्रद्धालुओं ने दोटूक कहा है कि बिना बड़े हुक्मरानों की शह के इतनी बड़ी चोरी मुमकिन नहीं है. इसलिए केवल छोटे प्यादों को मोहरा बनाने के बजाय चंपत राय सहित पूरे शीर्ष नेतृत्व पर कार्रवाई कर इस ट्रस्ट को तुरंत भंग कर देना चाहिए.

70 बार हुई चोरी पर क्या बोले काशी के पंडित

वाराणसी में पिछले 20 सालों से पुरोहित कार्य कर रहे पंडित राजीव ओझा ने इस घटना को सनातन धर्म पर एक बहुत बड़ा आघात बताया है. उन्होंने कहा 'जिस गहरी आस्था के साथ पूरे देश ने राम मंदिर के निर्माण में सहयोग दिया आज उसी मंदिर में हुई चोरी ने हर सनातनी के दिल को छलनी कर दिया है. सवाल यह है कि जब 70 बार चोरियां हो रही थीं तो मंदिर प्रशासन और ट्रस्ट इतने दिनों तक कहां सो रहे थे? अगर शुरुआत में ही कड़ी कार्रवाई की जाती तो यह नौबत ही नहीं आती.'

'बिना हवलदार के चौकीदार की हिम्मत नहीं होती'

वाराणसी में शिक्षा-दीक्षा ले रहे पंडित अभिजीत आनंद दुबे ने छोटे कर्मचारियों की गिरफ्तारियों पर गंभीर सवाल उठाए. उनका कहना था कि इस घोटाले से अब आम भक्तों की आस्था डिगेगी जिससे आगे चलकर मंदिरों में चढ़ावा भी कम हो जाएगा. वहीं बिहार के बेतिया से त्रिपिंडी श्राद्ध कराने काशी पहुंचे श्रद्धालु पुरुषोत्तम पांडे और हरेंद्र पांडे ने तीखा तंज कसते हुए कहा 'बिना हवलदार के किसी चौकीदार की इतनी हिम्मत नहीं होती कि वह करोड़ों की चोरी कर ले. सारा पावर और शह ऊपर बैठे लोगों की होती है. लेकिन गाज हमेशा गरीब और छोटे कर्मचारियों पर गिराकर मामले की लीपापोती कर दी जाती है.'

चंपत राय और अनिल मिश्रा पर सीधा निशाना

पंडित समाज का गुस्सा सीधे तौर पर ट्रस्ट के सर्वेसर्वा और महासचिव चंपत राय पर फूटा है. पुजारियों का कहना है कि ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा का इस्तीफा हो जाना ही काफी नहीं है बल्कि चंपत राय का इस पूरे मुद्दे पर चुप्पी साधे रखना उनकी संलिप्तता की ओर इशारा करता है. विप्र समाज ने मांग की है कि 'वर्तमान राम मंदिर ट्रस्ट को तत्काल प्रभाव से भंग कर देना चाहिए. इसकी जगह पूरी तरह से ईमानदार, सुयोग्य और निष्पक्ष लोगों को शामिल कर एक नए न्यास बोर्ड का गठन किया जाना चाहिए.

राजनीतिक क्रेडिट पर भी उठाए सवाल

पुजारियों ने रोष जताते हुए कहा कि जब मंदिर निर्माण का अच्छा काम होता है तो देश के बड़े-बड़े राजनीतिक दल, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री घूम-घूमकर इसका पूरा क्रेडिट लेते हैं. लेकिन आज जब इसी पावन धाम में चंदा चोरी जैसा कलंक लगा है तो इसकी जिम्मेदारी लेने के लिए कोई आगे क्यों नहीं आ रहा है?

काशी के विप्र समाज के अनुसार, राम मंदिर जैसी पवित्र जगह पर हुआ यह वित्तीय घोटाला पूरे विप्र और हिंदू समाज के माथे पर एक काले धब्बे की तरह है जिसे भारत के इतिहास की सबसे शर्मनाक धार्मिक घटना माना जा सकता है. पिशाच मोचन जैसे पावन स्थल से पंडितों और श्रद्धालुओं ने सर्वसम्मति से केंद्र सरकार से मांग की है कि इस पूरे मामले की सीधे सीबीआई से उच्चस्तरीय जांच कराई जाए. नीचे से लेकर ऊपर तक चाहे वह ट्रस्ट का अध्यक्ष हो, महासचिव चंपत राय हों या कोई सफाईकर्मी जो भी इस महापाप में संलिप्त पाया जाए, उसे सख्त से सख्त सजा देकर जेल की सलाखों के पीछे भेजा जाना चाहिए.

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