प्राइवेट इक्विटी कंपनी अमारा पार्टनर्स ने पावर ट्रांसमिशन सेक्टर की कंपनी करमतारा इंजीनियरिंग के प्रि-आईपीओ राउंड में लगभग 75 करोड़ रुपये की इन्वेस्टमेंट की है। कंपनी ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
करमतारा इंजीनियरिंग घरेलू और विदेशी बाजारों के लिए ट्रांसमिशन लाइन टावर, सोलर स्ट्रक्चर और ट्रैकर कलपुर्जों, विंड एनर्जी स्ट्रक्चर, स्ट्रक्चरल स्टील 'प्रोफाइल' और 'फास्टनर' समेत विभिन्न इंजीनियरिंग स्टील प्रोडक्ट्स को मैनुफैक्चर करती है। करमतारा इंजीनियरिंग ने पब्लिक अनाउंसमेंट में कहा कि उसने 6 जुलाई को अमारा पार्टनर्स ग्रोथ फंड-1 को 310 रुपये प्रति शेयर के इश्यू प्राइस पर 24,19,355 अनिवार्य रूप से परिवर्तनीय तरजीही शेयर (Compulsorily Convertible Preference Shares, CCPS) अलॉट किए हैं, जिससे 75 करोड़ रुपये जुटाए गए हैं।
प्रि-आईपीओ इन्वेस्टमेंट के बाद, सेबी के नियमों के हिसाब प्रस्तावित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (Initial Public Offering, IPO) में नए शेयर के इश्यू का साइज समान राशि से घटा दिया जाएगा। कंपनी को भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) से मंजूरी मिल गई है और वह अपने प्रस्तावित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) की दिशा में आगे बढ़ रही है।
करमतारा इंजीनियरिंग IPO को लेकर क्या है अपडेट?
करमतारा इंजीनियरिंग लिमिटेड को 1,750 करोड़ के IPO के लिए SEBI से रेगुलेटरी मंजूरी मिल गई थी। इस इश्यू में 1,350 करोड़ रुपये के फ्रेश इक्विटी शेयर जारी करना और 400 करोड़ रुपये के OFS शामिल था। यह आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए कब खुलेगा, इसको लेकर अभी तक कोई जानकारी नहीं है।
करमतारा इंजीनियरिंग लिमिटेड के बारे में
1996 में बनी करमतारा इंजीनियरिंग लिमिटेड, रिन्यूएबल एनर्जी और ट्रांसमिशन लाइनों के लिए प्रोडक्ट बनाने का काम करती है। कंपनी कई तरह के प्रोडक्ट्स बनाती है और सोलर स्ट्रक्चर (फिक्स्ड-टिल्ट और ट्रैकर्स), सोलर एनर्जी और ट्रांसमिशन सेक्टर के लिए फास्टनर्स, और ओवरहेड ट्रांसमिशन लाइन हार्डवेयर फिटिंग के लिए वन-स्टॉप शॉप के तौर पर काम करती है। कंपनी विंड टर्बाइन के लिए ट्यूबलर टावर बनाने की सुविधा शुरू करके विंड एनर्जी सेक्टर में कदम रख चुकी है। 30 सितंबर, 2024 तक, कंपनी की ग्लोबल मौजूदगी है और यह नॉर्थ अमेरिका, यूरोप, एशिया, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और लैटिन अमेरिका के 50 से ज्यादा देशों में एक्सपोर्ट करती है। इसकी पहुंच और डिलीवरी मॉडल का दायरा बहुत बड़ा है। कंपनी इन-हाउस गैल्वनाइजिंग सुविधाओं (जो भारत के सोलर एनर्जी सेक्टर में सबसे बड़ी हैं - 258,000 MTPA) और रोलिंग मिल भट्टियों के साथ बैकवर्ड इंटीग्रेशन पर ध्यान देती है, जिससे सप्लाई चेन, समय की बचत और लागत के मामले में उसे कॉम्पिटिटिव फायदा मिलता है।
(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

