भारतीय शेयर बाजार में पिछले चार दिनों से जारी तेजी पर आखिरकार 7 जुलाई को ब्रेक लग गया। निवेशकों द्वारा की गई मुनाफावसूली और वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव के कारण बाजार में गिरावट दर्ज की गई।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी के कारण निवेशकों ने सावधानी बरतने का फैसला किया, जिससे बाजार का सेंटिमेंट कमजोर हो गया। 8 जुलाई को भी भारतीय बाजार के लाल निशान में खुलने की पूरी आशंका है, क्योंकि गिफ्ट निफ्टी से मिलने वाले संकेत काफी निराशाजनक हैं।
शेयर बाजार में गिरावट और गिफ्ट निफ्टी के संकेत
मंगलवार के कारोबारी सेशन में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक सेंसेक्स 104 अंक या 0.13 पर्सेंट गिरकर 78,180.72 के स्तर पर बंद हुआ। इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 भी 32 अंक या 0.13 पर्सेंट टूटकर 24,398.70 के स्तर पर आ गया। बुधवार को बाजार की शुरुआत एक बड़े झटके के साथ हो सकती है। गिफ्ट निफ्टी इंडेक्स में चल रहे रुझानों के मुताबिक, यह 24,235 के स्तर के पास ट्रेड कर रहा है। यह निफ्टी फ्यूचर्स के पिछले बंद स्तर से 205 अंकों से भी ज्यादा की बड़ी गिरावट को दर्शाता है, जिससे बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य टकराव
वैश्विक बाजारों में इस गिरावट की मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच शुरू हुआ नया विवाद है। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों पर किए गए हमलों के जवाब में अमेरिका ने ईरान पर नए और जोरदार हवाई हमले किए हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, इन शक्तिशाली हमलों का मकसद कमर्शियल जहाजों पर होने वाले हमलों की बड़ी कीमत वसूलना है। ईरान की मेहर न्यूज एजेंसी के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य के पास एक द्वीप पर बड़े धमाकों की खबर है। दूसरी तरफ, ईरान के डिप्टी फॉरेन मिनिस्टर काजेम गरीबाबादी ने चेतावनी दी है कि उनका देश इस अमेरिकी कार्रवाई का कड़ा बदला लेगा।
कच्चे तेल और गैस की कीमतों में भारी उछाल
इस नए सैन्य टकराव के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़त देखी जा रही है। अगस्त डिलीवरी के लिए अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई क्रूड 2.1 पर्सेंट बढ़कर 71.87 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। वहीं ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड सितंबर डिलीवरी के लिए 1.9 पर्सेंट की तेजी के साथ 75.53 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। इसके अलावा, अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने उस प्रतिबंध छूट को भी रद्द कर दिया है जिसके तहत ईरान को तेल निर्यात करने की अनुमति मिली हुई थी। यह दोनों देशों के बीच हुए अंतरिम शांति समझौते का एक मुख्य हिस्सा था। इस तनाव का असर यूरोप में प्राकृतिक गैस की कीमतों पर भी पड़ा है, जहां इसके फ्यूचर्स दाम 4.9 पर्सेंट तक बढ़ गए हैं।
ग्लोबल तेल सप्लाई पर मंडराया संकट
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का एक बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है, जहां से शांति के दिनों में दुनिया के कुल दैनिक तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है। ईरान ने संयुक्त राष्ट्र की शिपिंग एजेंसी को सूचित किया है कि वह इस जलमार्ग के कुछ हिस्सों पर अपना अधिकार रखता है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते इस विवाद के कारण अब शिपिंग कंपनियों और तेल उत्पादकों द्वारा इस रास्ते का इस्तेमाल बंद किए जाने की आशंका बढ़ गई है। इससे पहले गोल्डमैन सैक्स जैसे बड़े बैंकों ने चेतावनी दी थी कि क्षेत्रीय उत्पादकों द्वारा उत्पादन बढ़ाने से बाजार में तेल की अधिकता हो सकती है, लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। ब्रेंट क्रूड का मार्केट स्ट्रक्चर भी अब तेजी के संकेत दे रहा है, जहां नियर-टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स प्रीमियम पर ट्रेड कर रहे हैं।
(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

