भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार 19 मई को आईटी सेक्टर एक बार फिर से आकर्षण का केंद्र बन गया है। आज के कारोबार में आईटी सेक्टर की कंपनियों में बेहद मजबूत और शानदार बढ़त देखी जा रही है।
इस ताजा तेजी के साथ ही आईटी पैक ने लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में अपनी बढ़त का विस्तार किया है। पिछले तीन सेशन के दौरान निफ्टी आईटी इंडेक्स अपने इंट्राडे हाई को मिलाकर लगभग 8 पर्सेंट तक बढ़ चुका है, जिससे निवेशकों में भारी उत्साह का माहौल बना हुआ है।
निफ्टी आईटी इंडेक्स का धमाकेदार प्रदर्शन
मंगलवार को निफ्टी आईटी इंडेक्स ने जबरदस्त छलांग लगाई और यह 4.14 पर्सेंट की भारी मजबूती के साथ 29,566.15 अंकों के इंट्राडे हाई स्तर पर पहुंच गया। सबसे बड़ी बात यह रही कि इस इंडेक्स में शामिल सभी 10 कंपनियां आज पूरी तरह से हरे निशान पर कारोबार कर रही थीं। व्यक्तिगत शेयरों के प्रदर्शन पर नजर डालें तो देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज लिमिटेड यानी टीसीएस का शेयर एनएसई पर करीब 3 पर्सेंट की बढ़त के साथ 2,350.60 रुपये पर कारोबार कर रहा था। वहीं इन्फोसिस का शेयर भी 4 पर्सेंट से ज्यादा की मजबूती के साथ 1,191.20 रुपये पर पहुंच गया। विप्रो के शेयर में 2 पर्सेंट से अधिक की तेजी देखी गई और यह 196.39 रुपये पर ट्रेड कर रहा था, जबकि एचसीएल टेक्नोलॉजीज का शेयर 3.43 पर्सेंट बढ़कर 1,185.90 रुपये और टेक महिंद्रा का शेयर लगभग 4 पर्सेंट चढ़कर 1,484.50 रुपये पर आ गया। छोटी आईटी कंपनियों में भी कोफोज का शेयर 4 पर्सेंट से ज्यादा बढ़कर 1,405.70 रुपये और पर्सिस्टेंट सिस्टम्स का शेयर करीब 3.8 पर्सेंट की तेजी के साथ 5,130 रुपये पर कारोबार कर रहा था।
रुपया कमजोर होने से मिला बड़ा सहारा
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि आईटी इंडेक्स में आई इस जोरदार तेजी के पीछे कई बड़े वैश्विक और घरेलू कारण जिम्मेदार हैं। इसमें सबसे पहला कारण अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये का कमजोर होना है। आमतौर पर जब भी रुपया कमजोर होता है, तो आईटी कंपनियों को इसका सीधा फायदा पहुंचता है क्योंकि ये कंपनियां अपने रेवेन्यू का एक बहुत बड़ा हिस्सा डॉलर के रूप में कमाती हैं।
रुपये की इस गिरावट से कंपनियों की अर्निंग रियलाइजेशन में काफी सुधार होता है और इन्फोसिस, टीसीएस, एचसीएल टेक और विप्रो जैसी बड़ी कंपनियों के मार्जिन को भी मजबूत सपोर्ट मिलता है। इसके साथ ही अमेरिकी शेयर बाजार में टेक और सॉफ्टवेयर कंपनियों के शेयरों में जारी मजबूती ने ग्लोबल लेवल पर आईटी सेक्टर के प्रति निवेशकों का सेंटिमेंट काफी बेहतर किया है। वॉल स्ट्रीट पर आई इस तेजी से यह संकेत मिल रहा है कि वैश्विक स्तर पर कंपनियों का टेक्नोलॉजी पर होने वाला खर्च अभी भी मजबूत बना हुआ है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आकर्षक वैल्यूएशन का असर
बाजार में इस समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई को लेकर भी काफी पॉजिटिव माहौल बना हुआ है। निवेशकों को पूरा भरोसा है कि एआई, क्लाउड माइग्रेशन, साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन पर दुनिया भर में बढ़ते खर्च का बड़ा फायदा भारतीय आईटी कंपनियों को मिलेगा। भले ही भारतीय कंपनियां सीधे तौर पर फ्रंटलाइन एआई प्रोडक्ट नहीं बनाती हैं, लेकिन वे एआई से जुड़ी सर्विसेज और पार्टनरशिप में भारी इंवेस्टमेंट कर रही हैं।
रेनेसेंस इंवेस्टमेंट मैनेजर्स के फाउंडर और सीआईओ पंकज मुरारका के अनुसार, आईटी सेक्टर पर एआई के असर को ठीक से समझा नहीं गया है। एआई कंपनियों के मौजूदा बिजनेस को प्रभावित करने के साथ-साथ नए अवसर भी पैदा कर रहा है। भारतीय आईटी कंपनियों ने अतीत में भी हर बड़े टेक्नोलॉजी बदलाव को बहुत अच्छे से अपनाया है। मुरारका का कहना है कि वर्तमान में ग्लोबल टेक खर्च में आई सुस्ती एआई से होने वाले नुकसान से कहीं बड़ी समस्या है। पिछले कुछ महीनों में कमजोर गाइडेंस और मैक्रो चिंताओं के कारण इन शेयरों में भारी करेक्शन आ चुका है, जिससे अब इनका वैल्यूएशन काफी आकर्षक और सस्ता हो गया है। इसी वजह से निवेशक अब इनमें जमकर खरीदारी कर रहे हैं। इसके अलावा, लगातार हो रही बिकवाली के बाद बाजार में शॉर्ट कवरिंग होने से भी आईटी शेयरों की इस तेजी को और ज्यादा रफ्तार मिल गई है।
(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

