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क्या लोन और वसीयत में मिले पैसे की भी देनी होगी जानकारी? ITR फाइल करने से पहले जान लें नियम

क्या लोन और वसीयत में मिले पैसे की भी देनी होगी जानकारी? ITR फाइल करने से पहले जान लें नियम

Upstox Hindi 3 months ago

देश भर में असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न यानी आईटीआर (ITR) भरने का सिलसिला आधिकारिक तौर पर शुरू हो चुका है। अगर आप भी इस साल अपना टैक्स रिटर्न दाखिल करने की तैयारी कर रहे हैं, तो आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर आपको एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव नजर आएगा।

विभाग ने अपनी ऑनलाइन फाइलिंग वेबसाइट के साथ-साथ ऑफलाइन जेएसओएन (JSON) यूटिलिटी में एक बिल्कुल नया कॉलम जोड़ दिया है। इस नए सेक्शन का नाम 'Receipts not in the nature of income' रखा गया है, जिसके जरिए टैक्स फाइलिंग की प्रक्रिया को पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा पारदर्शी बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

ऑनलाइन पोर्टल और डिजिटल यूटिलिटी पर हुआ यह बड़ा बदलाव

टैक्स फाइलिंग प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने के मकसद से यह नया विकल्प फिलहाल केवल डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ही पेश किया गया है। ध्यान देने वाली बात यह है कि अगर आप सरकार की तरफ से नोटिफाई किए गए आधिकारिक आईटीआर फॉर्म का पीडीएफ (PDF) वर्जन देखेंगे, तो उसमें यह कॉलम आपको कहीं भी नजर नहीं आएगा। इसे मुख्य रूप से ऑनलाइन फाइलिंग पोर्टल और डिजिटल यूटिलिटी का ही हिस्सा बनाया गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि जब आप अपना रिटर्न खुद ऑनलाइन सबमिट करने जाएंगे, तभी आपको कंप्यूटर स्क्रीन पर इस नए सेक्शन में अपनी वित्तीय जानकारी दर्ज करनी होगी।

टैक्स देनदारी पर नहीं पड़ेगा एक भी रुपये का अतिरिक्त बोझ

पोर्टल पर इस नए अपडेट के आने से आम टैक्सपेयर्स को घबराने की कोई जरूरत नहीं है। टैक्स मामलों के दिग्गजों और विशेषज्ञों ने स्थिति को पूरी तरह से स्पष्ट कर दिया है। इस नए कॉलम के जुड़ने से आपकी अंतिम टैक्स देनदारी पर एक रुपये का भी अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ने वाला है। वेद जैन एंड एसओसीएट्स के पार्टनर अंकित जैन के अनुसार, अब तक टैक्सपेयर्स के लिए सिर्फ 'Exempt Income' यानी टैक्स-फ्री कमाई का ब्योरा देना अनिवार्य होता था, जो नियम आगे भी जस का तस लागू रहेगा। हालांकि, इस नए विकल्प के जरिए आयकर विभाग केवल उन पैसों का स्पष्ट हिसाब-किताब मांग रहा है, जो देखने में आपकी आय जैसे लग सकते हैं, लेकिन कानूनी रूप से वे आपकी वास्तविक आय का हिस्सा नहीं होते हैं। यह महज एक अलग रिपोर्टिंग कैटेगरी है ताकि कर चोरी पर लगाम लगाई जा सके।

नए कॉलम में देनी होगी इन वित्तीय लेनदेनों की जानकारी

अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि इस नए सेक्शन में आखिर किस तरह के पैसों का जिक्र करना होगा। टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस कॉलम में आपको उन सभी प्राप्तियों की घोषणा करनी है जो टैक्स कानून में आय की परिभाषा में फिट नहीं बैठती हैं। इनमें मुख्य रूप से किसी बैंक, वित्तीय संस्थान या किसी व्यक्ति से लिया गया लोन, वसीयत या विरासत में मिली कोई भी संपत्ति या बड़ी नकद रकम शामिल है। इसके अलावा, अगर आपने अपनी कोई निजी पुरानी संपत्ति बेची है या किसी ग्रामीण इलाके में मौजूद कृषि भूमि की बिक्री से आपको कोई बड़ी रकम हासिल हुई है, तो उसकी पूरी जानकारी भी आपको इसी जगह देनी होगी।

शादी के शगुन, तोहफों और कर्ज को लेकर ये हैं नियम

शादी-विवाह में मिलने वाले शगुन या करीबियों से मिलने वाले महंगे तोहफों को लेकर भी विभाग के नियम बिल्कुल साफ हैं। सिंघानिया एंड कंपनी की पार्टनर रितिका नैयर सलाह देती हैं कि रिटर्न फाइल करते वक्त और इस नए कॉलम को भरते समय काफी सावधानी बरतने की जरूरत है। आपको अपनी हर तरह की टैक्स-फ्री कमाई को बिना सोचे-समझे इस कॉलम में नहीं डालना चाहिए। शादी में मिले गिफ्ट्स, रिश्तेदारों से प्राप्त उपहार और लोन की रकम हमेशा की तरह टैक्स के दायरे से पूरी तरह बाहर ही रहेंगे। चूंकि यह कॉलम केवल ऑनलाइन सिस्टम में फ्लैश हो रहा है, इसलिए फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि इसे खाली छोड़ने पर पोर्टल रिटर्न सबमिट करने देगा या नहीं, लेकिन टैक्सपेयर्स को अपनी वित्तीय जानकारी पूरी ईमानदारी के साथ देनी चाहिए ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की कानूनी स्क्रूटनी से बचा जा सके।

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