आईपीओ मार्केट में निवेश कर कमाई करने वालों के लिए एक नया मौका आने वाला है। मेटल रीसाइक्लिंग के बिजनेस से जुड़ी देश की एक बड़ी कंपनी सीएमआर ग्रीन टेक्नोलॉजीज अपना आईपीओ लेकर आ रही है।
यह आईपीओ अगले हफ्ते यानी 3 जून 2026 को सब्सक्रिप्शन के लिए खुलेगा और निवेशक इसमें 5 जून 2026 तक अपने पैसे लगा सकेंगे। कंपनी ने इस आईपीओ के जरिए शेयर बाजार में कदम रखने की पूरी तैयारी कर ली है और इसके लिए प्राइस बैंड भी घोषित कर दिया गया है। अगर आप भी इस आईपीओ में पैसा लगाने की सोच रहे हैं, तो आपके लिए कंपनी के बिजनेस, उसकी कमाई और निवेश से जुड़े नियमों को विस्तार से जान लेना बेहद जरुरी है।
जानिए कितना करना होगा कम से कम निवेश
कंपनी ने अपने इस आईपीओ के लिए 183 रुपये से लेकर 192 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। रिटेल निवेशकों के लिए कंपनी ने 78 शेयरों का एक लॉट साइज तय किया है। इसका मतलब यह हुआ कि अगर आप इस आईपीओ में एक लॉट के लिए अप्लाई करना चाहते हैं, तो आपको ऊपरी प्राइस बैंड के हिसाब से कम से कम 14,976 रुपये का निवेश करना होगा। कोई भी रिटेल निवेशक अधिकतम 13 से 14 लॉट के लिए दांव लगा सकता है, जिसकी कुल वैल्यू लगभग दो लाख रुपये तक बैठती है। इस आईपीओ में 35 पर्सेंट हिस्सा रिटेल निवेशकों के लिए रिजर्व रखा गया है, जबकि 50 पर्सेंट हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स और 15 पर्सेंट हिस्सा नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए तय किया गया है।
आईपीओ के पैसों का क्या करेगी कंपनी?
इस आईपीओ से जुड़ी एक सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल यानी ओएफएस होने वाला है। इस आईपीओ का कुल साइज करीब 3.28 करोड़ शेयरों का है, जिसकी कुल वैल्यू लगभग 630.88 करोड़ रुपये बैठती है। ऑफर फॉर सेल होने की वजह से इस आईपीओ के जरिए मार्केट से जुटने वाला सारा पैसा कंपनी के प्रमोटर्स और पुराने निवेशकों के पास जाएगा, जो अपनी हिस्सेदारी बेच रहे हैं। कंपनी को इस आईपीओ से सीधे कोई फंड नहीं मिलेगा और न ही वह इन पैसों का इस्तेमाल अपने बिजनेस को बढ़ाने के लिए करेगी। हालांकि, शेयर बाजार में लिस्टिंग होने के बाद कंपनी की ब्रांड इमेज और मार्केट में विजिबिलिटी काफी बढ़ जाएगी, जिससे कंपनी को फ्यूचर में अपनी साख मजबूत करने में बड़ी मदद मिलेगी।
क्या है कंपनी का मुख्य बिजनेस?
साल 2006 में शुरू हुई सीएमआर ग्रीन टेक्नोलॉजीज मुख्य रूप से नॉन-फेरस मेटल रीसाइक्लिंग के क्षेत्र में काम करती है। यह कंपनी भारत में एल्युमिनियम और जिंक डाई-कास्टिंग अलॉय बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है। कंपनी के पास कबाड़ यानी स्क्रैप मेटल को प्रोसेस करके नया और काम का मेटल तैयार करने की बड़ी प्रोडक्शन कैपेसिटी मौजूद है। कंपनी के ग्राहकों की लिस्ट काफी मजबूत है, जिसमें मुख्य रूप से ऑटोमोटिव सेक्टर की बड़ी गाड़ियां और उनके कलपुर्जे बनाने वाली ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स यानी ओईएम कंपनियां शामिल हैं। कंपनी के बड़े ग्राहकों में बजाज ऑटो, हीरो मोटोकॉर्प, होंडा कार्स इंडिया और रॉयल एनफील्ड जैसी नामी गिरामी कंपनियों के नाम आते हैं, जो इनके ऑपरेशन को लगातार मजबूती देते हैं।
कैसी चल रही है कंपनी की कमाई?
निवेश करने से पहले कंपनी के फाइनेंशियल रिकॉर्ड को देखना बहुत जरुरी होता है। पिछले कुछ सालों में कंपनी के कंसोलिडेटेड रेवेन्यू और नेट प्रॉफिट में बड़ा उतार-चढ़ाव देखा गया है। फाइनेंशियल ईयर 2023 में कंपनी का कुल रेवेन्यू 5,889.90 करोड़ रुपये था और उसे 104.51 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट हुआ था। इसके बाद फाइनेंशियल ईयर 2024 में कंपनी का रेवेन्यू बढ़कर 5,968.44 करोड़ रुपये तो हुआ, लेकिन कुछ अतिरिक्त खर्चों की वजह से कंपनी को 838.56 करोड़ रुपये का बड़ा घाटा उठाना पड़ा था। हालांकि, फाइनेंशियल ईयर 2025 में कंपनी ने बहुत शानदार वापसी की और उसका कुल रेवेन्यू बढ़कर 6,696.66 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जबकि कंपनी ने 155.04 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट कमाया। इसके बाद दिसंबर 2025 तक के शुरुआती नौ महीनों में भी कंपनी ने 6,291 करोड़ रुपये के रेवेन्यू पर 162.39 करोड़ रुपये का दमदार नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। शेयरों की लिस्टिंग 10 जून 2026 को होने की उम्मीद है।
(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

