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NSC में मिल रहा है FD से ज्यादा ब्याज, लेकिन निवेश से पहले समझ लें ये 4 जरूरी बातें

NSC में मिल रहा है FD से ज्यादा ब्याज, लेकिन निवेश से पहले समझ लें ये 4 जरूरी बातें

Upstox Hindi 2 weeks ago

NSC vs FD: नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट (NSC) एक पॉपुलर सरकारी निवेश योजना है। इसमें 5 साल के लिए पैसा निवेश होता है, जिसमें निवेशकों को फिक्स रिटर्न मिलता है। हाल ही में सरकार ने अप्रैल-जून 2026 तिमाही में NSC के लिए 7.7 फीसदी के ब्याज दर को बरकरार रखा है।

दूसरी तरफ ज्यादातर बड़े बैंकों में इस समय निवेशकों को फिक्स्ड डॉपिजिट (FD) पर 6 से 6.50 फीसदी तक का ब्याज ऑफर किया जा रहा है। इसका मतलब है कि इस समय NSC में FD की तुलना में ज्यादा रिटर्न मिल रहा है। हालांकि निवेश का फैसला लेने से पहले NSC से जुड़ी कुछ जरूरी बातें आपको समझ लेनी चाहिए।

NSC में क्या है खास

अगर निवेश की लिमिट की बात करें तो NSC में आप कम से कम ₹1,000 से निवेश शुरू कर सकते हैं और उसके बाद ₹100 के मल्टीपल में पैसा लगा सकते हैं। इसमें अधिकतम निवेश की कोई सीमा नहीं है। वहीं FD में भी आमतौर पर ₹1,000 से ₹10,000 के बीच न्यूनतम निवेश होता है और इसमें भी अधिकतम सीमा नहीं होती।

ब्याज मिलने के तरीके में फर्क

NSC और FD में ब्याज मिलने के तरीके में भी फर्क है। NSC में ब्याज हर साल जुड़ता (कंपाउंड) रहता है और आपको पूरा पैसा मैच्योरिटी पर मिलता है। वहीं FD में दो विकल्प होते हैं- Cumulative और Non-cumulative। Cumulative FD में ब्याज जोड़कर बढ़ता है, जबकि Non-cumulative FD में हर 3 महीने में ब्याज मिलता रहता है।

निकासी के नियम

लॉक-इन पीरियड की बात करें तो NSC में 5 साल तक पैसा निकाल नहीं सकते, सिर्फ कुछ खास परिस्थितियों (जैसे मृत्यु या कोर्ट के आदेश) में ही निकासी की अनुमति होती है। टैक्स सेविंग FD में भी 5 साल का लॉक-इन होता है, लेकिन सामान्य FD में आप समय से पहले पैसा निकाल सकते हैं, हालांकि उस पर पेनल्टी लगती है।

NSC में टैक्स बेनिफिट

NSC स्कीम खास इसलिए है क्योंकि इसमें Section 80C के तहत टैक्स बचत का फायदा भी मिलता है, लेकिन यह फायदा सिर्फ पुराने टैक्स सिस्टम के तहत ही मिलता है। इसमें धारा 80C के तहत निवेश की गई राशि (₹1.5 लाख तक) टैक्स फ्री है। NSC का ब्याज सालाना आधार पर फिर से निवेशित (Re-invested) माना जाता है, इसलिए पहले 4 साल तक इस पर 80C के तहत छूट मिल सकती है। लेकिन, तकनीकी रूप से यह ब्याज आपकी 'अन्य स्रोतों से आय' में जोड़ा जाता है। इसके अलावा मैच्योरिटी पर मिलने वाला कुल ब्याज पूरी तरह से टैक्स योग्य होता है। FD के मामले में भी मिलने वाला ब्याज आपकी इनकम के हिसाब से टैक्स के दायरे में आता है।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

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