भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की अगस्त 2026 की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक पर देशभर की नजरें टिकी हैं। इस बैठक में यह तय होगा कि रेपो रेट में कोई बदलाव किया जाएगा या उसे पहले की तरह बरकरार रखा जाएगा।
इस फैसले का सीधा असर होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन की EMI और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर मिलने वाले ब्याज पर पड़ता है। ऐसे में आम लोगों से लेकर उद्योग जगत और शेयर बाजार तक सभी इस फैसले का इंतजार कर रहे हैं।
3 से 5 अगस्त तक बैठक
RBI की छह सदस्यों की यह बैठक 3 अगस्त से शुरू हुई थी और 5 अगस्त 2026 यानी कि आज तक चलनी है। इस दौरान समिति देश की महंगाई, आर्थिक विकास, वैश्विक हालात और वित्तीय बाजारों की स्थिति की समीक्षा करेगी। इन सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद ब्याज दरों और मौद्रिक नीति को लेकर फैसला लिया जाएगा।
कब और कहां देख सकते हैं फैसला?
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा 5 अगस्त, बुधवार यानी कि आज सुबह 10 बजे मौद्रिक नीति का ऐलान करेंगे। इसके बाद दोपहर 12 बजे वह प्रेस कॉन्फ्रेंस को भी संबोधित करेंगे, जिसमें फैसले के पीछे की वजह और आगे की रणनीति के बारे में जानकारी देंगे।
- इस पूरे कार्यक्रम का सीधा प्रसारण RBI की आधिकारिक वेबसाइट पर होगा, जिसका लिंक https://www.rbi.org.in/ है।
- आप RBI के ऑफिशियल सोशल मीडिया हैंडल पर विजिट कर सकते हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X का लिंक है- https://x.com/RBI
- इसके अलावा YouTube पर भी लाइव स्पीच देखा जा सकता है। इसका लिंक है- https://www.youtube.com/@reservebankofindia593/streams
- RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा की घोषणाओं की पूरी जानकारी आप अपस्टॉक्स हिंदी की वेबसाइट पर भी पढ़ सकेंगे।
इस बार क्या रहने की उम्मीद?
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इस बार भी RBI रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करेगा। यानी लगातार चौथी बार ब्याज दरें स्थिर रह सकती हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार घरेलू अर्थव्यवस्था फिलहाल स्थिर है, लेकिन दुनिया भर में जारी अनिश्चितताओं को देखते हुए RBI फिलहाल सतर्क रुख बनाए रखना चाह सकता है।
हालांकि, कुछ जानकारों का मानना है कि अगर आने वाले महीनों में महंगाई या आर्थिक गतिविधियों में बड़ा बदलाव देखने को मिलता है, तो अगली बैठक में नीतिगत बदलाव की संभावना बन सकती है।
जून की बैठक में क्या हुआ था?
जून 2026 की MPC बैठक में RBI ने रेपो रेट को 5.25% पर ही बरकरार रखा था। साथ ही मौद्रिक नीति का रुख 'न्यूट्रल' रखा गया था। इसके अलावा स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) दर 5% और मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) व बैंक रेट 5.5% पर कायम रखे गए थे।
उस समय RBI गवर्नर ने कहा था कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक व्यापार मार्गों में बाधाओं के कारण दुनिया की अर्थव्यवस्था पर दबाव बना हुआ है। इसके बावजूद उन्होंने भरोसा जताया था कि भारत की अर्थव्यवस्था पहले की तुलना में ऐसे वैश्विक झटकों का सामना करने के लिए बेहतर स्थिति में है। RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए देश की GDP वृद्धि दर 6.6% और खुदरा महंगाई (CPI) 5.1% रहने का अनुमान भी दिया था।
आम लोगों के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
रेपो रेट वह ब्याज दर होती है, जिस पर RBI बैंकों को कर्ज देता है। अगर RBI रेपो रेट बढ़ाता है तो बैंकों के लिए कर्ज महंगा हो जाता है, जिसका असर ग्राहकों तक पहुंचता है। ऐसे में होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की EMI बढ़ सकती है। वहीं, रेपो रेट घटने पर कर्ज सस्ता हो सकता है और EMI कम होने की संभावना रहती है। हालांकि, ब्याज दरें घटने पर फिक्स्ड डिपॉजिट और बचत खाते पर मिलने वाला रिटर्न भी कम हो सकता है। इसलिए RBI की हर MPC बैठक का फैसला सीधे करोड़ों लोगों की जेब पर असर डालता है।

