क्या आयकर रिटर्न यानी आईटीआर में सालाना आय में गिरावट दिखाकर कोई व्यक्ति अपनी पत्नी और बच्चों को मेंटेनेंस देने की जिम्मेदारी से बच सकता है? गुरुग्राम की एक फैमिली कोर्ट के फैसले से साफ हो गया है कि यह इतना आसान नहीं है।
कोर्ट ने डेलॉयट कंपनी में सीनियर एग्जीक्यूटिव के पद पर कार्यरत व्यक्ति को अपनी पत्नी और बच्चों के लिए हर महीने 2 लाख रुपये का मेंटेनेंस देने का आदेश दिया है। पति ने दावा किया था कि उसकी सालाना नेट सैलरी घटकर करीब 36 लाख रुपये रह गई है, लेकिन कोर्ट उसकी दलीलों से सहमत नहीं हुआ।
सैलरी घटकर 36 लाख होने की दलील खारिज
टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक, इस जोड़े की शादी 12 जुलाई 2005 को लखनऊ में हुई थी और उनके जुड़वां बच्चे हैं। शुरुआत में पत्नी ने मेंटेनेंस के रूप में हर महीने 4 लाख रुपये और मुकदमे के खर्च के लिए 7.5 लाख रुपये मांगे थे। पति ने अपनी वित्तीय स्थिति बदलने का तर्क देते हुए कहा कि उसकी सालाना नेट सैलरी घटकर लगभग 36 लाख रुपये रह गई है। उसने 1.7 करोड़ रुपये के होम लोन और माता-पिता की जिम्मेदारी का हवाला दिया। उसने बताया कि वह बच्चों की बोर्डिंग स्कूल की पढ़ाई पर हर साल करीब 19.2 लाख रुपये खर्च कर रहा है।
फैमिली कोर्ट की प्रिंसिपल जज पूनम कंवर ने आय में आई गिरावट के स्पष्टीकरण को असंतोषजनक माना, क्योंकि पति अभी भी कंपनी में उसी बड़े पद पर कार्यरत है। उसके पुराने आईटीआर में असेसमेंट ईयर 2023-24 में लगभग 2 करोड़ रुपये और 2024-25 में 2.9 करोड़ रुपये की आय दिखाई गई थी। कोर्ट ने मेंटेनेंस की रकम तय करते समय उसकी पिछली कमाई की क्षमता को ध्यान में रखा।
स्कूल फीस देने से खत्म नहीं होती जिम्मेदारी
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बच्चों की पढ़ाई के खर्च और परिवार के बाकी मेंटेनेंस के बीच अंतर होता है। केवल बच्चों की स्कूल फीस भर देने से उनकी सभी आर्थिक जरूरतें पूरी नहीं हो जातीं, क्योंकि उनके अन्य दैनिक खर्चे भी बने रहते हैं। कोर्ट ने पति को हर महीने की 10 तारीख तक 2 लाख रुपये का भुगतान करने, बच्चों की स्कूल फीस देने और मुकदमे के खर्च के तौर पर 50,000 रुपये देने का निर्देश दिया।
शिक्षित पत्नी को मेंटेनेंस देने पर क्या है नियम
पति ने दलील दी थी कि उसकी पत्नी उच्च शिक्षित है और कमाने में सक्षम है। उसने आरोप लगाया कि पत्नी ने पीपीएफ व एफडी जैसी संपत्तियों को छुपाया और जॉर्जिया की यात्रा की। कोर्ट ने अंतरिम स्तर पर इन दलीलों को खारिज कर दिया। करणजावाला एंड कंपनी की पार्टनर मनमीत कौर के अनुसार, किसी शिक्षित पत्नी को सिर्फ इसलिए मेंटेनेंस देने से मना नहीं किया जा सकता कि उसके पास डिग्री है। अघोषित संपत्ति के आरोपों के लिए ठोस सबूतों की आवश्यकता होती है।

