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SBI Funds Management IPO: पूरी तरह से OFS, यानी प्रमोटर्स की जेब में जाएगा पैसा, निवेश से पहले समझ लें रिस्क फैक्टर

SBI Funds Management IPO: पूरी तरह से OFS, यानी प्रमोटर्स की जेब में जाएगा पैसा, निवेश से पहले समझ लें रिस्क फैक्टर

Upstox Hindi 1 week ago

भारतीय शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। देश की सबसे पुरानी एसेट मैनेजमेंट कंपनी एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट लिमिटेड अपना आईपीओ लेकर आ रही है। यह आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फोर सेल यानी OFS होने वाला है, जिसका सीधा मतलब है कि इस बिक्री से मिलने वाला सारा पैसा कंपनी के प्रमोटर्स के पास जाएगा और कंपनी के बिजनेस को बढ़ाने के लिए कोई फंड नहीं मिलेगा।

प्रमोटर्स की जेब में पैसा जाने के इस पहलू को निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण रिस्क फैक्टर के रूप में देखा जा रहा है क्योंकि इससे कंपनी के पास कोई नई पूंजी नहीं आएगी। यह इश्यू निवेश के लिए 14 जुलाई को खुलेगा और 16 जुलाई को बंद हो जाएगा। एंकर इनवेस्टर्स के लिए यह आवंटन 13 जुलाई को किया जाएगा।

आईपीओ का प्राइस बैंड और लॉट साइज

कंपनी ने अपने इस बड़े आईपीओ के लिए प्राइस बैंड 545 रुपये से 574 रुपये प्रति इक्विटी शेयर तय किया है। इसके शेयरों की फेस वैल्यू 1 रुपये है। इस आईपीओ का लॉट साइज 26 इक्विटी शेयर्स का रखा गया है, यानी निवेशकों को कम से कम 26 शेयरों के लिए बोली लगानी होगी और इसके बाद इसी के मल्टीपल में दांव लगाया जा सकेगा। कंपनी ने इस पब्लिक इश्यू में क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए अधिकतम 50 पर्सेंट शेयर रिजर्व किए हैं। वहीं नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए कम से कम 15 पर्सेंट और रिटेल निवेशकों के लिए कम से कम 35 पर्सेंट हिस्सा रिजर्व रखा गया है। इसके अलावा कंपनी के एलिजिबल कर्मचारियों को प्रति इक्विटी शेयर 54 रुपये का डिस्काउंट भी दिया जा रहा है।

प्रमोटर्स बेच रहे हैं अपनी बड़ी हिस्सेदारी

यह आईपीओ पूरी तरह से OFS है, जिसके तहत कुल 11,102 करोड़ रुपये के इक्विटी शेयर बेचे जाएंगे। इसमें कंपनी के मौजूदा प्रमोटर्स स्टेट बैंक ऑफ इंडिया यानी SBI और अमुंडी इंडिया होल्डिंग अपनी हिस्सेदारी कम कर रहे हैं। इस ऑफर के तहत SBI कुल 12.83 करोड़ शेयर बेचेगा, जो कंपनी में उसकी 6.3 पर्सेंट हिस्सेदारी के बराबर है। वहीं अमुंडी इंडिया होल्डिंग 7.56 करोड़ शेयर बेचेगी, जो उसकी 3.7 पर्सेंट हिस्सेदारी के बराबर है। वर्तमान में ये दोनों प्रमोटर्स मिलकर एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट में लगभग 98 पर्सेंट हिस्सेदारी के मालिक हैं।

अगर प्रमोटर्स के पुराने निवेश की तुलना आज की वैल्यू से करें, तो उन्हें इस OFS से बहुत बड़ा मुनाफा होने जा रहा है। SBI के पास वर्तमान में कंपनी के 126 करोड़ शेयर हैं, जो 61.73 पर्सेंट हिस्सेदारी के बराबर है। SBI ने इन शेयरों को मात्र 0.15 रुपये प्रति शेयर की वेटेड एवरेज कॉस्ट पर खरीदा था, जिसमें उसका कुल निवेश केवल 19 करोड़ रुपये था। प्राइस बैंड के ऊपरी स्तर पर SBI की इस कुल हिस्सेदारी की वैल्यू करीब 68,670 करोड़ रुपये हो जाती है, जो उसके मूल निवेश से लगभग 3,600 गुना अधिक है। दूसरी तरफ अमुंडी इंडिया होल्डिंग के पास 74 करोड़ शेयर यानी 36.26 पर्सेंट हिस्सेदारी है, जिसे उसने 4.35 रुपये प्रति शेयर की वेटेड एवरेज कॉस्ट पर करीब 322 करोड़ रुपये में खरीदा था। ऊपरी प्राइस बैंड पर इसकी वैल्यू लगभग 40,330 करोड़ रुपये बैठती है, जो उसकी लागत से करीब 125 गुना ज्यादा है।

अलॉटमेंट और लिस्टिंग की तारीखें

इस आईपीओ के शेयरों का अलॉटमेंट अस्थाई रूप से 17 जुलाई को फाइनल किया जा सकता है। जिन निवेशकों को शेयर नहीं मिलेंगे, उन्हें सोमवार, 20 जुलाई 2026 को रिफंड जारी कर दिया जाएगा। जिन लोगों को शेयर अलॉट होंगे, उनके डीमैट अकाउंट में भी उसी दिन शेयर क्रेडिट कर दिए जाएंगे। इसके बाद मंगलवार, 21 जुलाई 2026 को कंपनी के शेयरों की लिस्टिंग बीएसई और एनएसई पर होने की पूरी संभावना है। इस आईपीओ का मैनेजमेंट कोटक महिंद्रा कैपिटल कंपनी, axis कैपिटल, बोफा सिक्योरिटीज इंडिया, एचएसबीसी सिक्योरिटीज, आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज, जेफरीज इंडिया, जेएम फाइनेंशियल, मोतीलाल ओसवाल और एसबीआई कैपिटल मार्केट्स जैसी बड़ी कंपनियों का कंसोर्टियम संभाल रहा है।

क्या करती है कंपनी?

SBI फंड्स मैनेजमेंट देश की सबसे पुरानी एसेट मैनेजमेंट कंपनी है। यह कंपनी SBI म्यूचुअल फंड के इनवेस्टमेंट मैनेजर के रूप में काम करती है, जिसने जून 1987 में अपना ऑपरेशन शुरू किया था। यह देश का पहला ऐसा म्यूचुअल फंड था जिसे यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया यानी यूटीआई से अलग स्थापित किया गया था। ड्राफ्ट पेपर्स के आंकड़ों के अनुसार, यह कंपनी भारत की सबसे बड़ी पैसिव एसेट मैनेजर भी है। इसके एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स यानी ईटीएफ और इनडेक्स फंड्स का पैसिव क्वार्टरली एवरेज एसेट्स अंडर मैनेजमेंट यानी QAAUM 31 दिसंबर 2025 तक 3,99,953 करोड़ रुपये था, जिसके साथ पैसिव मार्केट में इसकी हिस्सेदारी 29.6 पर्सेंट दर्ज की गई है।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

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