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Section 44ADA: पेशेवरों के लिए वरदान है इनकम टैक्स का यह नियम, आधी कमाई पर नहीं देना होता एक भी पैसा टैक्स

Section 44ADA: पेशेवरों के लिए वरदान है इनकम टैक्स का यह नियम, आधी कमाई पर नहीं देना होता एक भी पैसा टैक्स

Upstox Hindi 1 week ago

भारत में टैक्स फाइलिंग और फाइनेंशियल प्लानिंग के दौरान लोग अक्सर ऐसे कानूनी रास्ते तलाशते हैं जिससे उनका टैक्स का बोझ कम हो सके। नौकरीपेशा लोगों के लिए तो कई तरह के डिडक्शन्स मौजूद होते हैं, लेकिन देश के फ्रीलांसरों और स्वतंत्र रूप से काम करने वाले पेशेवरों के लिए टैक्स लायबिलिटी को संभालना और भारी-भरकम बहीखाता रखना एक बड़ा सिरदर्द होता है।

इसी समस्या का समाधान करने के लिए इनकम टैक्स एक्ट में एक बेहद खास और शक्तिशाली नियम बनाया गया है, जिसे सेक्शन 44ADA कहा जाता है। इसे प्रिजम्पटिव टैक्सेशन स्कीम (Presumptive Taxation Scheme) भी कहते हैं। इस नियम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके तहत आपकी कुल सालाना कमाई का सीधा 50 पर्सेंट हिस्सा टैक्स के दायरे से पूरी तरह बाहर हो जाता है और आपको बची हुई केवल आधी इनकम पर ही टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स चुकाना पड़ता है। आइए समझते हैं कि यह नियम कैसे काम करता है और कौन इसका फायदा उठा सकता है।

क्या है सेक्शन 44ADA?

इनकम टैक्स विभाग का सेक्शन 44ADA मुख्य रूप से छोटे पेशेवरों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है ताकि उन्हें जटिल टैक्स प्रक्रियाओं से राहत मिल सके। इस स्कीम के तहत सरकार खुद यह मान लेती है कि एक पेशेवर को अपना काम चलाने के लिए उसकी कुल कमाई का 50 पर्सेंट हिस्सा खर्च के रूप में लगाना पड़ता है। उदाहरण के लिए, यदि आप एक आईटी कंसलटेंट या फ्रीलांसर हैं और आपकी साल भर की ग्रॉस रिसीट्स यानी कुल कमाई 40 लाख रुपये है, तो सेक्शन 44ADA का विकल्प चुनने पर आपकी टैक्स योग्य आय सीधे आधी यानी केवल 20 लाख रुपये मानी जाएगी। बाकी के 20 लाख रुपये को आपके प्रोफेशन का जायज खर्च मान लिया जाता है, जिस पर कोई टैक्स नहीं लगता है। इसके बाद आपको बची हुई आधी रकम पर अपने नॉर्मल टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स देना होता है।

कौन-कौन उठा सकता है इसका लाभ?

यह नियम देश के सभी टैक्सपेयर्स पर लागू नहीं होता है, बल्कि सरकार ने इसके लिए कुछ विशिष्ट क्षेत्रों को ही निर्धारित किया है। सेक्शन 44ADA का लाभ भारत में रहने वाले व्यक्तिगत टैक्सपेयर्स और पार्टनरशिप फर्म्स उठा सकते हैं, हालांकि ध्यान रहे कि लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप यानी एलएलपी को इस योजना से पूरी तरह बाहर रखा गया है। इस प्रिजम्पटिव स्कीम के दायरे में आने वाले प्रमुख पेशेवरों में कानूनी सलाहकार या वकील, चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े डॉक्टर्स, इंजीनियरिंग और आर्किटेक्ट्स शामिल हैं। इसके अलावा चार्टर्ड अकाउंटेंट और अकाउंटेंसी से जुड़े पेशेवर, टेक्निकल कंसलटेंट, सॉफ्टवेयर डेवलपर्स और इंटीरियर डेकोरेटर्स भी बहुत आसानी से इस बेहतरीन टैक्स छूट का फायदा उठा सकते हैं।

डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए बढ़ी हुई लिमिट

इस स्कीम का फायदा उठाने के लिए सरकार ने एक ऊपरी कमाई की सीमा तय की है, जिसे डिजिटल ट्रांजैक्शन करने वालों के लिए और अधिक आकर्षक बना दिया गया है। सामान्य नियमों के तहत यदि आपकी नकद प्राप्तियां कुल कमाई के 5 पर्सेंट से अधिक हैं, तो आपके लिए अधिकतम ग्रॉस रिसीट्स की सीमा 50 लाख रुपये तय की गई है। लेकिन यदि आप डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देते हैं और आपकी कुल नकद प्राप्तियां 5 पर्सेंट या उससे कम हैं, यानी आपका 95 पर्सेंट से ज्यादा काम बैंकिंग चैनल से होता है, तो सरकार इस सीमा को बढ़ाकर सीधे 75 लाख रुपये कर देती है। इन दोनों ही स्थितियों में आपको अपने कुल टर्नओवर का फ्लैट 50 पर्सेंट हिस्सा ही टैक्स के दायरे में लाना होता है, जिससे 75 लाख कमाने वाले डिजिटल प्रोफेशनल्स भी अपनी आधी आय को सीधे खर्च घोषित करके टैक्स से बचा सकते हैं।

ऑडिट के झंझट से पूरी तरह मुक्ति

इस नियम को अपनाने का एक दूसरा सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपको अपने दैनिक खर्चों के बिल और वाउचर संभाल कर रखने की कोई आवश्यकता नहीं होती है। सामान्य टैक्स नियमों के तहत किसी भी कारोबारी या पेशेवर को सेक्शन 44AA के तहत विस्तृत अकाउंट बुक्स जैसे लेजर, जर्नल और कैश बुक मेंटेन करनी पड़ती है और एक तय सीमा के बाद सेक्शन 44AB के तहत चार्टर्ड अकाउंटेंट से टैक्स ऑडिट भी कराना अनिवार्य होता है। लेकिन यदि आप सेक्शन 44ADA को चुनते हैं, तो आपको अकाउंट बुक्स रखने और टैक्स ऑडिट कराने से पूरी तरह छूट मिल जाती है। आपको बस आईटीआर-4 फॉर्म भरकर अपनी कुल रिसीट्स और उसका 50 पर्सेंट प्रॉफिट घोषित करना होता है, जिससे कंप्लायंस की लागत और समय दोनों की भारी बचत होती है।

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