अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर 60 दिनों के लिए बढ़ने की उम्मीद की जा रही है। इस प्रस्तावित समझौते का मकसद दोनों देशों के बीच बातचीत को आगे बढ़ाना और लंबे समय के समाधान की कोशिश करना है।
हालांकि अभी तक ट्रंप ने इस समझौते को अंतिम मंजूरी नहीं दी है। यहां हम समझेंगे कि इस प्रस्तावित समझौते में कौन से मुद्दों को शामिल किया गया है।
परमाणु हथियार
इस प्रस्तावित समझौते के तहत ईरान यह वादा करेगा कि वह परमाणु हथियार बनाने की दिशा में आगे नहीं बढ़ेगा। साथ ही वह अपने पास मौजूद अत्यधिक एनरिच्ड यूरेनियम के भंडार को कम करने या हटाने पर भी सहमत हो सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान के पास इस समय 60% तक एनरिच्ड यूरेनियम मौजूद है, जिसे आगे बढ़ाकर हथियार-ग्रेड स्तर तक ले जाया जा सकता है।
बताया जा रहा है कि अगले 60 दिनों में इस यूरेनियम का क्या किया जाएगा, इस पर विस्तार से बातचीत होगी। कुछ यूरेनियम को कमजोर किया जा सकता है, जबकि कुछ हिस्सा किसी तीसरे देश, जैसे रूस भेजा जा सकता है।
Strait of Hormuz पर क्या हो सकता है फैसला
इस समझौते का एक बड़ा हिस्सा Strait of Hormuz को दोबारा खोलना भी है। यह दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है, जहां से दुनिया के करीब 20% तेल की सप्लाई गुजरती है। युद्ध शुरू होने के बाद ईरान ने इस रास्ते को बंद कर दिया था, जिससे ग्लोबल ऑयल मार्केट में भारी तनाव पैदा हो गया था और तेल की कीमतें बढ़ गई थीं।
अगर समझौता लागू होता है, तो अमेरिका धीरे-धीरे ईरानी बंदरगाहों पर लगी रोक हटाएगा और Strait of Hormuz फिर से व्यापारिक जहाजों के लिए खोला जाएगा। इससे दुनियाभर में तेल सप्लाई सामान्य होने की उम्मीद है।
तेल बेचने की अनुमति
अमेरिका ईरान को तेल बेचने की सीमित अनुमति भी दे सकता है। इसके लिए कुछ प्रतिबंधों में ढील दी जा सकती है। इसके अलावा ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों को लेकर भी बातचीत होगी। समझौते में Israel और Hezbollah के बीच संघर्ष कम करने की बात भी शामिल बताई जा रही है।
हालांकि अभी स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है। ईरान की सरकारी एजेंसी Tasnim ने कहा है कि समझौते का अंतिम ड्राफ्ट अभी तैयार नहीं हुआ है और पश्चिमी मीडिया की कुछ रिपोर्ट्स गलत हैं। यानी दोनों पक्षों के बीच अभी भी बातचीत जारी है।
डोनाल्ड ट्रंप ने क्या कहा?
डोनाल्ड ट्रंप ने भी अभी पूरी तरह सकारात्मक संकेत नहीं दिए हैं। उन्होंने कहा कि ईरान समझौता करना चाहता है, लेकिन अमेरिका अभी मौजूदा प्रस्ताव से पूरी तरह संतुष्ट नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका "काम पूरा" करने का रास्ता चुन सकता है। इसी बीच अमेरिका ने ईरान के सैन्य तेल कारोबार पर नए प्रतिबंध लगाने का भी ऐलान किया है। यानी एक तरफ बातचीत चल रही है, तो दूसरी तरफ दबाव की रणनीति भी जारी है।

