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2027 चुनाव से पहले योगी सरकार का मास्टरस्ट्रोक, 60 लाख महिलाओं को दिया बड़ा तोहफा

2027 चुनाव से पहले योगी सरकार का मास्टरस्ट्रोक, 60 लाख महिलाओं को दिया बड़ा तोहफा

UPUK Live 1 week ago

त्तर प्रदेश में रक्षाबंधन के मौके पर शुरू हुई मुफ्त बस यात्रा की राजनीति अब महज तीन दिनों के त्योहार तक सीमित नहीं रह गई है। सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार ने 27 से 29 अगस्त तक महिलाओं को रोडवेज और सिटी बसों में एक सहयात्री के साथ मुफ्त सफर का मौका दिया है।

इसके साथ ही, 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र की बुजुर्ग महिलाओं के लिए ‘लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति यात्रा योजना’ का आगाज कर आजीवन मुफ्त बस सफर की सुविधा लागू कर दी गई है।

सरकार के अनुमानों के मुताबिक, इस योजना से प्रदेश की लगभग 1 करोड़ बुजुर्ग महिलाएं लाभान्वित हो सकती हैं। इस ऐतिहासिक फैसले से सरकारी खजाने पर हर महीने करीब 22.55 करोड़ रुपये यानी सालाना लगभग 270.6 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा। अनुमान है कि रोजाना औसतन 88,438 महिला यात्री इस मुफ्त सेवा का लाभ उठाएंगी।

लेकिन असली सवाल यह खड़ा होता है कि क्या यह सिर्फ जन कल्याण से जुड़ी एक योजना है या फिर 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले महिला मतदाताओं को साधने की एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति?

आंकड़ों के जरिए समझिए इस योजना का बड़ा असर

यदि हम राजनीतिक प्रभाव को समझने के लिए 1 करोड़ पात्र महिलाओं के आधार पर अलग-अलग संभावनाओं का विश्लेषण करें:

  • 10% महिलाएं योजना का लाभ लेंगी = 10 लाख महिलाएं
  • 50% महिलाएं योजना का लाभ लेंगी = 50 लाख महिलाएं
  • 60% महिलाएं योजना का लाभ लेंगी = 60 लाख महिलाएं

मान लीजिए कि औसतन एक महिला यात्री का बस से आने-जाने का मासिक खर्च ₹1,000 है, तो कुल बचत का गणित कुछ इस प्रकार होगा:

लाभार्थी महिलाओं की संख्याअनुमानित मासिक बचतअनुमानित सालाना बचत
10 लाख₹100 करोड़₹1,200 करोड़
50 लाख₹500 करोड़₹6,000 करोड़
60 लाख₹600 करोड़₹7,200 करोड़

यानी अगर कुल पात्र महिलाओं में से आधी महिलाएं (50 लाख) भी नियमित तौर पर रोडवेज बसों का इस्तेमाल करती हैं, तो महिलाओं के परिवारों की कुल संभावित बचत ₹500 करोड़ प्रति महीना तक पहुंच सकती है।

हालांकि, यह ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि यह महिलाओं की संभावित व्यक्तिगत बचत का आंकड़ा है, सरकार का प्रत्यक्ष खर्च नहीं। सरकार ने योजना के संचालन के लिए मासिक ₹22.55 करोड़ के अतिरिक्त व्यय का अनुमान तय किया है।

यहीं से शुरू होता है 2027 का चुनावी समीकरण

उत्तर प्रदेश में 2027 का विधानसभा चुनाव भले ही दूर नजर आ रहा हो, लेकिन सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने ‘आधी आबादी’ यानी महिला वोटरों को अपने पाले में लाने के लिए मोर्चेबंदी तेज कर दी है। एक तरफ जहां भाजपा नीत सरकार मुफ्त बस यात्रा जैसी योजनाओं से महिलाओं को सीधा लाभ पहुंचा रही है, वहीं समाजवादी पार्टी भी महिलाओं के लिए सालाना आर्थिक मदद जैसे बड़े वादों के साथ मैदान में उतर रही है।

राजनीतिक चश्मे से देखें तो 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए आजीवन मुफ्त सफर केवल एक बार की जाने वाली घोषणा नहीं है। यह एक ऐसा प्रत्यक्ष लाभ है, जिसका अहसास महिला यात्री को हर बार बस में चढ़ते और उतरते समय होगा।

ऐसे में विपक्ष द्वारा सवाल उठाया जाना लाजिमी है कि सरकार इस योजना का वित्तीय बोझ लंबे समय तक कैसे संभालेगी? हालांकि, योगी सरकार की ओर से रुख साफ है कि इस योजना का पूरा खर्च राज्य सरकार खुद वहन करेगी और उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) को इसकी भरपाई की जाएगी।

एक आंकड़ा जो पूरी कहानी बदल सकता है

सरकारी और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस योजना के लिए पात्र महिलाओं का अनुमान लगभग 1 करोड़ बताया गया है, जबकि कुछ अन्य आंकलनों में यह संख्या करीब 81 लाख के आसपास आंकी गई है।

यदि विश्लेषण के लिए 1 करोड़ का आंकड़ा आधार माना जाए, तो हर 10 प्रतिशत कवरेज का सीधा मतलब 10 लाख महिला लाभार्थी होता है। चुनावी राजनीति में 10 लाख का आंकड़ा बेहद निर्णायक साबित हो सकता है। 10 लाख, 20 लाख या 60 लाख-इनमें से हर संख्या अपने साथ पूरे परिवार और सामाजिक स्तर पर एक बहुत बड़ा राजनीतिक प्रभाव डालने का माद्दा रखती है।

इसलिए सवाल केवल इतना नहीं है कि ‘बस का किराया कौन भरेगा?’, बल्कि मुख्य सवाल यह है कि इस मुफ्त सफर का राजनीतिक फायदा चुनाव में किसे मिलेगा?

योगी सरकार इसे महिला सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण का बड़ा कदम बता रही है। वहीं, विपक्षी दल इसे चुनावी समय में सरकारी खजाने पर बढ़ता बोझ और वोटरों को लुभाने का पैंतरा करार दे सकते हैं। सच यह है कि इस योजना का लाभ महिलाओं को आज से मिलना शुरू हो जाएगा, लेकिन इसका असली राजनीतिक नतीजा 2027 के चुनावी समर में ही देखने को मिलेगा।

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Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: UPUKLive