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'48 घंटे में डील करो या तबाही झेलो', ट्रंप ने ईरान को दिया आखिरी मौका; क्या बंद होगा होर्मुज स्ट्रेट?

'48 घंटे में डील करो या तबाही झेलो', ट्रंप ने ईरान को दिया आखिरी मौका; क्या बंद होगा होर्मुज स्ट्रेट?

UPUK Live 1 week ago

वॉशिंगटन/तेहरान: पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) की आग अब एक ऐसे खौफनाक मोड़ पर पहुंच गई है, जहां से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था हिल सकती है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को आर-पार की चेतावनी देते हुए केवल 48 घंटे का समय दिया है।

ट्रंप का साफ कहना है कि अगर इस समय सीमा के भीतर समझौता नहीं हुआ, तो ईरान को ऐसे "भीषण परिणाम" भुगतने होंगे जिसकी उसने कल्पना भी नहीं की होगी।

48 घंटे का 'डेडली' काउंटडाउन शुरू

यह तनावपूर्ण बयान तब आया है जब 6 अप्रैल की डेडलाइन बिल्कुल नजदीक है और दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत पटरी से उतरती दिख रही है। डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'Truth Social' पर हुंकार भरते हुए लिखा, "याद है जब मैंने ईरान को समझौता करने और होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए 10 दिन का समय दिया था? वह समय अब तेजी से खत्म हो रहा है। अगले 48 घंटों के भीतर उन पर भयानक मुसीबत टूट पड़ेगी।" ट्रंप की इस धमकी ने वैश्विक बाजारों, खासकर कच्चा तेल सप्लाई को लेकर दुनिया भर की नींद उड़ा दी है।

होर्मुज स्ट्रेट: विश्व युद्ध की नई वजह?

इस पूरे विवाद की जड़ में 'होर्मुज स्ट्रेट' (Strait of Hormuz) है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण रास्तों में से एक है, क्योंकि वैश्विक तेल और गैस सप्लाई का एक बहुत बड़ा हिस्सा यहीं से होकर गुजरता है। ईरान ने इस मार्ग पर अपना नियंत्रण और बाधाएं बढ़ा दी हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में हाहाकार मचा है। ट्रंप की मुख्य मांग यही है कि ईरान बिना किसी शर्त के इस रास्ते को फिर से खोल दे। अगर यह मार्ग बंद रहता है, तो दुनिया भर में ऊर्जा संकट गहरा जाएगा और पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी।

सोमवार को शेयर बाजार में मचेगी भारी हलचल!

ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते इस 'त्रिकोणीय' तनाव पर दुनिया भर के निवेशकों की सांसें अटकी हुई हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के इस अल्टीमेटम का असर सोमवार को शेयर बाजार खुलते ही दिखेगा। अगर 48 घंटों के भीतर कोई ठोस डील नहीं होती है और अमेरिका सैन्य कार्रवाई की दिशा में कदम बढ़ाता है, तो सोमवार को शेयर मार्केट में बड़ी गिरावट (Crash) देखने को मिल सकती है।

दूसरी ओर, अगर इन 48 घंटों में पर्दे के पीछे कोई सकारात्मक बातचीत होती है और तनाव कम होने के संकेत मिलते हैं, तो बाजार में राहत की लहर दौड़ सकती है। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें घड़ी की सुइयों पर टिकी हैं-क्या युद्ध होगा या डील? फैसला अगले दो दिनों में हो जाएगा।

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