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अब सच तलाशकर भारतीय इतिहास नए सिरे से लिखना होगा: शाह

नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज गुरुवार को बनारस पहुंचे। वहां उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) भारत अध्ययन केंद्र के तत्वाधान में आयोजित दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का दीप प्रज्वलित कर उद्घाटन किया।

इस दौरान शाह ने कहा कि वक्त आ गया है कि देश के इतिहासकार इतिहास को नए सिरे से लिखें। जिन्होंने पहले इतिहास लिखा है, उनके साथ विचार- विमर्श न करें। जो भी उन्होंने लिखा है, उसे जाने दें। हमें सत्य को खोजना चाहिए और लिखना चाहिए।

शाह ने आगे कहा कि इसके लिए हमें ही आगे आना होगा। इसमें इतिहासकारों की बड़ी भूमिका है। चंद्रगुप्त विक्रमादित्य के साथ इतिहास में बहुुत अन्याय हुआ है। उनके पराक्रम की जितनी तारीफ होनी थी, उतनी शायद नहीं हुई। उन्होंने कहा कि गुप्त साम्राज्य की सबसे बड़ी सफलता ये रही कि हमेशा के लिए वैशाली और मगध साम्राज्य के ट'कराव को समाप्त कर एक अखंड भारत की रचना की दिशा में गुप्त साम्राज्य आगे बढ़ा था।

शाह ने कहा कि महाभारत काल के 2000 साल बाद 800 साल का कालखंड दो प्रमुख शासन व्यवस्थाओं के कारण जाना गया। मौर्य वंश और गुप्त वंश। दोनों वंशों ने भारतीय संस्कृति को तब के विश्व के अंदर सर्वोच्च स्थान पर प्रस्थापित किया।

उन्होंने कहा कि सम्राट स्कंदगुप्त ने भारतीय संस्कृति, भारतीय भाषा, भारतीय कला, भारतीय साहित्य, भारतीय शासन प्रणाली, नगर रचना प्रणाली को हमेशा से बचाने की कोशिश की है। स्कंदगुप्त का बहत बड़ा योगदान दुर्ग की रचना, नगर की रचना और राजस्व के नियमों को संशोधित करके शासन व्यवस्था को आगे बढ़ाने में है। लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि आज स्कंदगुप्त पर अध्ययन के लिए कोई 100 पेज भी मांगेगा तो वो उपलब्ध नहीं है।

Dailyhunt
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