मध्य पूर्व में तनाव चरम पर है! अमेरिका और ईरान के बीच चल रही तनातनी अब एक बड़े युद्ध के रूप में बदलती दिख रही है। अमेरिकी सेना ने लगातार दूसरी रात ईरान के लगभग 90 ठिकानों को निशाना बनाकर जबरदस्त एयर स्ट्राइक की है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इस हमले का वीडियो जारी करते हुए कहा कि इसका एकमात्र मकसद होर्मुज़ स्ट्रेट में कमर्शियल जहाजों और निर्दोष नाविकों को निशाना बनाने की ईरान की क्षमता को पूरी तरह खत्म करना है।
तबाह हुए ईरान के कई सैन्य ठिकाने
अमेरिकी हमलों में ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, तटीय निगरानी उपकरण, मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज और नौसैनिक ठिकानों को भारी नुकसान पहुँचा है। अमेरिका का कहना है कि यह हमला कल रात होर्मुज़ स्ट्रेट में जहाजों पर हुई ईरानी बमबारी का सीधा जवाब है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि यदि ईरान ने अपनी हरकतों को नहीं रोका, तो आने वाले समय में और भी कठोर कदम उठाए जाएंगे।
ईरान का जवाबी हमला, कुवैत और बहरीन में मची हलचल
उधर, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने भी हार नहीं मानी है। ईरान ने पुष्टि की है कि उसने कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले किए हैं। ईरानी नेतृत्व ने अमेरिका को साफ चेतावनी दी है कि वे बेकार की धमकियां न दिखाएं, वरना इसका अंजाम उन्हें भुगतना पड़ेगा। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बग़र ग़ालिबाफ़ ने दो टूक कहा, "होर्मुज़ स्ट्रेट केवल ईरानी व्यवस्था के तहत ही खुलेगा, अमेरिकी धमकियों के दम पर नहीं।"
चाबहार से बंदर अब्बास तक विस्फोटों की गूंज
ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, बंदर अब्बास में आठ जोरदार विस्फोट हुए हैं। चाबहार और कोनारक शहरों में भी कई जगहों पर धमाकों की खबरें हैं। बुशेहर में IRGC के बैरक में आग लगने और चाबहार में बिजली आपूर्ति बाधित होने की भी जानकारी सामने आई है। अबू मूसा द्वीप पर भी मिसाइलें गिरने की खबर है, जिसे लेकर ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच पहले से ही विवाद चल रहा है।
क्या बातचीत का रास्ता हमेशा के लिए बंद हो गया?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नेटो शिखर सम्मेलन के दौरान बेहद तल्ख तेवर अपनाते हुए कहा कि अब ईरान से बातचीत करना "समय की बर्बादी" है। हालांकि, ईरान की तरफ से यह संकेत मिला था कि वे समझौता करना चाहते हैं, लेकिन ट्रंप ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने ईरान के नेतृत्व को 'मानसिक रूप से बीमार' तक कह दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के रुख में आए इस बदलाव से शांति वार्ता की संभावनाएं अब बेहद कम हो गई हैं, और क्षेत्र में फिर से एक बड़े युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं।

