Dailyhunt Logo
  • Light mode
    Follow system
    Dark mode
    • Play Story
    • App Story
अनुशासन या सख्ती? बिहार के स्कूलों में शिक्षकों के लिए नया 'डिजिटल डंडा'

अनुशासन या सख्ती? बिहार के स्कूलों में शिक्षकों के लिए नया 'डिजिटल डंडा'

UPUK Live 1 week ago

बिहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए शिक्षा विभाग ने एक बेहद सख्त और अहम फैसला लिया है। स्कूलों में समय की पाबंदी और पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए विभाग ने उपस्थिति (Attendance) की व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है।

अब राज्य के सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों को 'ई-शिक्षाकोष' पोर्टल पर अपनी ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करानी होगी। शिक्षा विभाग का मानना है कि इस नई व्यवस्था से स्कूलों में अनुशासन बढ़ेगा और इसका सीधा फायदा छात्रों को मिलेगा, जिन्हें अब नियमित रूप से पढ़ाई मिल सकेगी।

ऑनलाइन हाजिरी से ही तय होगी सैलरी

नई प्रणाली के तहत, शिक्षकों के स्कूल आने और वापस जाने का पूरा समय अब डिजिटल तरीके से रिकॉर्ड होगा। विभाग ने साफ कर दिया है कि हर महीने शिक्षकों का वेतन इसी ऑनलाइन उपस्थिति रिकॉर्ड के आधार पर तैयार किया जाएगा। अगर किसी शिक्षक की हाजिरी पोर्टल पर दर्ज नहीं होती है, तो उसका असर सीधे उनके वेतन पर पड़ेगा। इस कदम का मुख्य उद्देश्य पूरी प्रक्रिया को जवाबदेह और पारदर्शी बनाना है, ताकि कोई भी शिक्षक अपनी ड्यूटी के प्रति लापरवाही न बरते।

देरी की आदत पड़ेगी भारी

समयपालन को लेकर विभाग ने बहुत ही कड़े नियम लागू किए हैं। शिक्षा विभाग के आदेशानुसार, यदि कोई शिक्षक महीने में तीन बार स्कूल आने में देरी करता है या स्कूल का समय खत्म होने से पहले ही परिसर से निकल जाता है, तो उनके एक दिन का वेतन काट लिया जाएगा। यह सख्त नियम सभी शिक्षकों पर समान रूप से लागू होगा। इसके साथ ही, विभाग ने फर्जी हाजिरी लगाने वालों को भी सख्त चेतावनी दी है। यदि डिजिटल सिस्टम में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या गलत जानकारी दर्ज कराने का मामला सामने आया, तो शिक्षक पर बड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

सुपौल से हुई शुरुआत, पूरे राज्य पर नजर

फिलहाल इस हाई-टेक उपस्थिति प्रणाली को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर सुपौल जिले से शुरू किया गया है। विभाग ने इस व्यवस्था को सफल बनाने के लिए जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO), प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO) और सभी स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को जिम्मेदारी सौंप दी है। इन अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे हर दिन इसकी निगरानी करें और इसकी रिपोर्ट सीधे विभाग को भेजें। माना जा रहा है कि अगर यह व्यवस्था सुपौल में सफल रही, तो जल्द ही इसे पूरे बिहार के स्कूलों में सख्ती से लागू कर दिया जाएगा।

Dailyhunt
Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: UPUKLive