अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण के लिए देश भर से करोड़ों लोगों ने श्रद्धापूर्वक चंदा दिया था। लेकिन अब इस पवित्र कार्य के नाम पर चंदा वसूली और हेराफेरी के संगीन आरोपों ने हड़कंप मचा दिया है।
इस मामले में अब एक नया और चौंकाने वाला मोड़ आया है, जिसमें कर्नाटक के एक बीजेपी विधायक और आरएसएस से जुड़े एक प्रमुख पदाधिकारी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
SIT को लिखी गई शिकायत में बड़ा धमाका मामले की शुरुआत तब हुई जब कर्नाटक के सामाजिक और आरटीआई कार्यकर्ता दीपक पाटिल ने उत्तर प्रदेश की विशेष जांच दल (SIT) को एक पत्र सौंपा। इस पत्र में उन्होंने आरोप लगाया है कि बीदर जिले की औराद विधानसभा से बीजेपी विधायक प्रभु चव्हाण और आरएसएस के पदाधिकारी गोपालजी ने राम मंदिर निर्माण के नाम पर ठेकेदारों से भारी-भरकम रकम अवैध तरीके से जुटाई। शिकायत में यह भी कहा गया है कि उनके सहयोगी सतीश नवबाडे की मदद से इस पूरी धांधली को अंजाम दिया गया।
चंदे के नाम पर 'कमाई' का आरोप शिकायतकर्ता दीपक पाटिल का दावा है कि पिछले कुछ वर्षों से वे इन नेताओं की गतिविधियों पर नजर रख रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि औराद तालुका के हर ठेकेदार से कम से कम 5 लाख रुपये या उससे अधिक की राशि जबरन या प्रभाव डालकर दान के रूप में ली गई। सबसे बड़ा आरोप यह है कि ये दान राशियां बिना किसी आधिकारिक विवरण के ली गईं। आरोप है कि जो पैसा दान में लिया गया, उसे सार्वजनिक दस्तावेजों में बहुत कम दिखाया गया, जबकि हकीकत में रकम बहुत बड़ी थी। जो भी इस पर सवाल उठाता, उसे 'हिंदू विरोधी' बताकर चुप करा दिया जाता था।
100 एकड़ बेनामी जमीन और रियल एस्टेट का खेल मामला सिर्फ चंदे की हेराफेरी तक सीमित नहीं है। कार्यकर्ता ने SIT को बताया कि राम मंदिर के उद्घाटन के बाद से ही इन लोगों की संपत्ति में अचानक बेतहाशा वृद्धि हुई है। आरोप है कि 'आदित्य डेवलपर्स' नाम की रियल एस्टेट फर्म के जरिए इन लोगों ने अपने रिश्तेदारों के नाम पर करीब 100 एकड़ से ज्यादा कृषि भूमि खरीदी है।
पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि इन संपत्तियों की खरीदारी मंदिर के लिए चंदा इकट्ठा करने और उद्घाटन के बाद ही तेजी से हुई। विधायक प्रभु चव्हाण पर यह भी आरोप है कि उन्होंने महाराष्ट्र और कर्नाटक के कई जिलों में बाजार भाव से भी ज्यादा कीमत देकर जमीनें खरीदीं, जिससे यह संदेह गहरा गया है कि इस काले धन का स्रोत क्या है। फिलहाल, SIT से पूरे मामले की गहराई से जांच करने और धन के स्रोत का पता लगाने की मांग की गई है।

