अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने बेबाक और रहस्यमयी अंदाज के लिए जाने जाते हैं, लेकिन उनके एक ताजा सोशल मीडिया पोस्ट ने पूरी दुनिया के कूटनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा, "एक बड़ा तूफान आने वाला है और उसे कोई रोक नहीं पाएगा।" ट्रंप का यह बयान ऐसे नाजुक समय पर आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तलवारें खिंची हुई हैं।
भले ही दोनों देशों के बीच फिलहाल सीजफायर यानी युद्धविराम लागू है, लेकिन पर्दे के पीछे की तनातनी कम होने का नाम नहीं ले रही है। ट्रंप के इस "तूफान" वाले बयान के बाद कयासों का बाजार गर्म है। रक्षा विशेषज्ञ इसे ईरान पर किसी बड़े सैन्य एक्शन या सर्जिकल स्ट्राइक का संकेत मान रहे हैं। वहीं, कुछ लोग इसे मशहूर हॉलीवुड डायलॉग से जोड़कर देख रहे हैं, जो अक्सर किसी बड़ी तबाही से पहले की चेतावनी के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर आर-पार की जंग?
ट्रंप के इस तेवर के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि व्हाइट हाउस अब ईरान को घुटनों पर लाने के लिए दबाव और बढ़ाने वाला है। खुफिया रिपोर्ट्स की मानें तो अमेरिकी सेना ने बहुत ही कम समय में ईरान के सामरिक और सैन्य ठिकानों को तबाह करने का ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया है। ट्रंप की पोस्ट ने इन आशंकाओं को और हवा दे दी है।
इतना ही नहीं, ट्रंप ने ईरान के उस शांति प्रस्ताव को भी सिरे से खारिज कर दिया है जिसमें 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' से नाकेबंदी हटाने और युद्ध को हमेशा के लिए खत्म करने की पेशकश की गई थी। ट्रंप का रुख बिल्कुल साफ है-अमेरिका पहले दबाव बनाए रखेगा। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा है कि जब तक ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर कोई ठोस और स्थायी समझौता नहीं होता, तब तक नाकेबंदी हटाने या युद्ध खत्म करने का सवाल ही पैदा नहीं होता।
कैसे शुरू हुई थी यह खूनी जंग?
ईरान और अमेरिका के बीच इस ताजा संघर्ष की चिंगारी इसी साल 28 फरवरी को फूटी थी। तब अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के कई ठिकानों पर ताबड़तोड़ हवाई हमले किए थे। इसके जवाब में ईरान ने भी अपनी मिसाइलों का मुंह खोल दिया था। करीब 39 दिनों तक चली इस भीषण जंग ने पूरी दुनिया की धड़कनें बढ़ा दी थीं।
आखिरकार 8 अप्रैल को एक अस्थायी सीजफायर पर सहमति बनी, जिसे बाद में आगे भी बढ़ाया गया। लेकिन शांति की यह उम्मीद अब धुंधली पड़ती दिख रही है। ईरान चाहता है कि उस पर लगी आर्थिक और समुद्री नाकेबंदी तुरंत हटे, जबकि ट्रंप प्रशासन की पहली शर्त परमाणु समझौता है। दोनों देशों की इसी जिद ने बातचीत के रास्ते बंद कर रखे हैं और ट्रंप के "तूफान" वाले बयान ने अब आग में घी डालने का काम किया है।

