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बंगाल में 'खेला' हो गया? सर्वे के आंकड़ों ने उड़ाए ममता के होश, बीजेपी की जबरदस्त छलांग

बंगाल में 'खेला' हो गया? सर्वे के आंकड़ों ने उड़ाए ममता के होश, बीजेपी की जबरदस्त छलांग

UPUK Live 1 week ago

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की सियासत में 2026 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले एक बड़ा उलटफेर होता दिख रहा है। हालिया ओपिनियन पोल्स और सर्वे के जो आंकड़े सामने आए हैं, उन्होंने राज्य के राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है।

सर्वे के संकेत बता रहे हैं कि इस बार बंगाल में मुकाबला सिर्फ कड़ा ही नहीं, बल्कि बेहद रोमांचक होने वाला है। जहां एक तरफ ममता बनर्जी का किला बचाने की चुनौती है, वहीं बीजेपी का ग्राफ किसी रॉकेट की तरह ऊपर जाता दिख रहा है।

सर्वे के आंकड़ों ने चौंकाया: कांटे की टक्कर

ताजा सर्वे के मुताबिक, मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच ही सिमट गया है। हालांकि, ममता बनर्जी की टीएमसी अभी भी बढ़त बनाए हुए है, लेकिन बीजेपी ने अपने प्रदर्शन में जो सुधार किया है, उसने समीकरण बिगाड़ दिए हैं। 294 सीटों वाली विधानसभा में टीएमसी को 140 से 160 सीटें मिलने का अनुमान है। वहीं, बीजेपी 130 से 150 सीटों के करीब पहुंचती दिख रही है। यह स्थिति साफ करती है कि दोनों दल बहुमत के जादुई आंकड़े के बेहद करीब हैं और बाजी किसी भी तरफ पलट सकती है।

वोट शेयर में भी घटा फासला

सिर्फ सीटों के मामले में ही नहीं, बल्कि वोट प्रतिशत के मामले में भी फासला अब नाममात्र का रह गया है। अनुमान है कि तृणमूल कांग्रेस को 43 से 45 प्रतिशत वोट मिल सकते हैं, जबकि बीजेपी का वोट शेयर 41 से 43 प्रतिशत तक पहुंचता दिख रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अब मुकाबला 'तू डाल-दाल, मैं पात-पात' वाला हो गया है, जहां महज 1-2 परसेंट का स्विंग भी पूरे चुनाव का नतीजा बदल सकता है।

बीजेपी के बढ़ते ग्राफ का असली राज

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी की इस मजबूती के पीछे उनकी बदली हुई रणनीति है। इस बार पार्टी ने केवल बड़े चेहरों के बजाय स्थानीय मुद्दों और जमीनी कार्यकर्ताओं पर ज्यादा फोकस किया है। साथ ही, कुछ वर्गों में राज्य सरकार के प्रति दिख रही नाराजगी का फायदा भी भगवा खेमे को मिलता दिख रहा है। चुनावी मैनेजमेंट और वोटर लिस्ट को लेकर बीजेपी की सक्रियता ने भी उसे रेस में आगे ला खड़ा किया है।

ममता की मजबूती और चुनाव की तारीखें

भले ही चुनौती बड़ी हो, लेकिन ममता बनर्जी का करिश्मा और टीएमसी का मजबूत कैडर अभी भी उनकी सबसे बड़ी ताकत बना हुआ है। पार्टी अपने संगठन के दम पर किला बचाने की पुरजोर कोशिश कर रही है। आपको बता दें कि बंगाल में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल 2026 को दो चरणों में वोटिंग होनी है, जबकि नतीजों का ऐलान 4 मई 2026 को किया जाएगा। जैसे-जैसे तारीख करीब आ रही है, बंगाल का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है।

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