बिहार सरकार राज्य की शिक्षा व्यवस्था को और अधिक संतुलित और प्रभावी बनाने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम उठाने जा रही है। प्रदेश के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने एक जरूरी अपडेट देते हुए बताया है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तय मानकों के अनुसार राज्यभर में शिक्षकों की उपलब्धता का पूरा आकलन कर लिया गया है।
सामने आई इस समीक्षा में यह चौंकाने वाला सच सामने आया है कि बिहार के कुछ चुनिंदा जिलों में निर्धारित आवश्यकता से 1,60,288 शिक्षक अधिक संख्या में कार्यरत हैं, जबकि इसके उलट कई ऐसे जिले भी हैं जहां अब भी शिक्षकों की भारी कमी बनी हुई है। इस बड़ी समस्या से निपटने के लिए अब सरकार इन अतिरिक्त शिक्षकों को उन जिलों में भेजने की पूरी तैयारी कर रही है जहां उनकी सबसे ज्यादा जरूरत है।
शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए बिहार सरकार का बड़ा कदम
30 छात्रों पर एक शिक्षक का तय किया गया है मानक
इस पूरे मामले पर जानकारी देते हुए शिक्षा मंत्री ने बताया कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत यह साफ प्रावधान है कि हर 30 विद्यार्थियों पर कम से कम एक शिक्षक होना अनिवार्य है। इसी मानक को आधार बनाकर पूरे राज्य के सभी जिलों में शिक्षकों की संख्या का गहरा विश्लेषण किया गया है। समीक्षा में यह बात खुलकर सामने आई कि कई जिलों में क्षमता से बहुत ज्यादा शिक्षक मौजूद हैं, तो वहीं दूसरी तरफ कुछ जिलों में पर्याप्त संख्या में शिक्षक उपलब्ध ही नहीं हैं। शिक्षा व्यवस्था के इस असंतुलन को हमेशा के लिए दूर करने के लिए ही अब यह नई स्थानांतरण नीति लागू की जा रही है।
राजधानी पटना के लिए बनाई जाएगी बिल्कुल अलग नीति
शिक्षा मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया है कि खासकर पटना जिला और इसके शहरी क्षेत्रों में शिक्षकों की संख्या राज्य में सबसे ज्यादा है। यही वजह है कि राजधानी में शिक्षकों के सही पदस्थापन के लिए एक बिल्कुल अलग और विशेष नीति तैयार की जा रही है। इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य के ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में स्थित विद्यालयों में भी पर्याप्त संख्या में शिक्षक अपनी सेवाएं दे सकें।
अब हर पांच साल पर अनिवार्य रूप से होगा शिक्षकों का तबादला
सरकार ने शिक्षकों की ट्रांसफर पॉलिसी में भी एक बड़ा और अहम बदलाव किया है। नई व्यवस्था के तहत अब हर पांच वर्ष के अंतराल पर शिक्षकों के तबादले की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। आपको बता दें कि इससे पहले पूरी नौकरी के दौरान शिक्षकों के स्थानांतरण के अवसर काफी सीमित हुआ करते थे, लेकिन अब इस नई व्यवस्था के आ जाने से पूरे प्रदेश में शिक्षकों का एक समान और संतुलित वितरण सुनिश्चित किया जा सकेगा।
शिक्षकों की मदद के लिए शुरू की गई खास हेल्पलाइन
इस पूरी स्थानांतरण प्रक्रिया को शिक्षकों के लिए बेहद आसान और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से शिक्षा विभाग ने दो खास टोल-फ्री नंबर 14417 और 18003454417 जारी किए हैं। ये दोनों हेल्पलाइन नंबर रोजाना सुबह 10 बजे से लेकर शाम 6 बजे तक पूरी तरह सक्रिय रहेंगे। इसके अलावा, ई-शिक्षा पोर्टल से जुड़ी किसी भी तकनीकी सहायता या समस्या के समाधान के लिए 9523300520 और 9430820499 नंबर भी शिक्षकों के लिए उपलब्ध करा दिए गए हैं ताकि उन्हें किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

