वाशिंगटन/तेहरान: मिडिल ईस्ट की रणभूमि से एक ऐसी खबर आई है जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। पिछले 40 दिनों से जिस ईरान पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कहर बनकर टूट रहे थे, आज उसी ईरान के साथ सीजफायर (संघर्ष विराम) होते ही ट्रंप के सुर पूरी तरह बदल गए हैं।
कल तक युद्ध की बातें करने वाले ट्रंप अब इसे विश्व शांति के लिए एक 'ऐतिहासिक दिन' बता रहे हैं।
ईरान अब और बर्दाश्त नहीं कर सकता: ट्रंप
सीजफायर पर सहमति बनने के बाद ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर अपनी पहली प्रतिक्रिया दी। ट्रंप ने लिखा कि यह विश्व शांति की दिशा में एक बहुत बड़ा दिन है। उन्होंने दावा किया कि ईरान अब शांति चाहता है क्योंकि वह और अधिक तबाही बर्दाश्त करने की स्थिति में नहीं है। ट्रंप ने यह भी भरोसा दिलाया कि अमेरिका 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) में जहाजों की आवाजाही को फिर से सुचारू बनाने में पूरी मदद करेगा। ट्रंप के मुताबिक, अब सकारात्मक कदम उठाए जाएंगे और व्यापार के जरिए 'खूब पैसा' कमाया जाएगा।
मिडिल ईस्ट का 'स्वर्णिम युग' शुरू?
हैरानी की बात यह है कि जिस देश में ट्रंप एक दिन पहले तक भारी बमबारी कर रहे थे, अब वहां वे पुनर्निर्माण (Reconstruction) की बातें कर रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि ईरान में अब हर तरह की जरूरी सप्लाई फिर से शुरू की जा रही है। उन्होंने आगे कहा, "मैं खुद यह सुनिश्चित करूंगा कि सब कुछ ठीक से चले। मुझे पूरा विश्वास है कि यह मिडिल ईस्ट के लिए एक स्वर्णिम युग साबित हो सकता है।" ट्रंप की बातों से ऐसा लग रहा है कि वह अब युद्ध के बजाय व्यापारिक रिश्तों पर ध्यान देना चाहते हैं।
इजरायल और नेतन्याहू की शर्त
इस बीच इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का बयान भी चर्चा में है। उन्होंने साफ कर दिया है कि ईरान के साथ हुआ यह 14 दिनों का सीजफायर लेबनान पर लागू नहीं होगा। इजरायल ने ट्रंप के फैसले का समर्थन तो किया है, लेकिन एक सख्त शर्त के साथ। नेतन्याहू के कार्यालय ने कहा कि ईरान को तुरंत जलडमरूमध्य खोलना होगा और अमेरिका, इजरायल व अन्य देशों पर होने वाले सभी हमलों को रोकना होगा, तभी यह शांति कायम रह पाएगी।
शांति की दिशा में बड़ा कदम
बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ हमलों को दो हफ्ते के लिए सशर्त रोकने की घोषणा की है। इस डील के पीछे सबसे बड़ी वजह 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को फिर से खुलवाना है, जहां से दुनिया का बड़ा तेल व्यापार होता है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने भी संकेत दिए हैं कि अगर उन पर हमले रुकते हैं, तो तेहरान भी अपनी सैन्य कार्रवाई बंद कर देगा। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर हैं कि क्या यह 14 दिनों की शांति किसी स्थायी समाधान में बदल पाएगी या नहीं।

