पिछले कुछ महीनों के दौरान देश में 100-ऑक्टेन प्रीमियम पेट्रोल की बिक्री में दोगुनी से भी ज्यादा का जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। यह बाजार में इकलौता ऐसा खास फ्यूल ग्रेड है, जिसमें किसी भी प्रकार का इथेनॉल नहीं मिलाया जाता है।
इथेनॉल-मिक्स्ड फ्यूल यानी ई20 से गाड़ियों के इंजन को संभावित नुकसान पहुंचने की बढ़ती चिंताओं के बीच इस ईंधन की मांग में यह भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
जुलाई में तेजी से बढ़ी डिमांड, दिल्ली से आई सबसे ज्यादा मांग
विशेषज्ञों के अनुसार, जुलाई के महीने में यह बढ़ोतरी खासतौर पर बेहद तेज रही, क्योंकि उस दौरान पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने के मुद्दे पर देश भर में बहस और चिंताएं काफी तेज हो गई थीं। देश की सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियां अलग-अलग ब्रांड नामों के तहत इस 100-ऑक्टेन पेट्रोल को बेचती हैं। इनमें इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOCL) का ‘XP100’, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (BPCL) का ‘Speed100’ और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (HPCL) का ‘Power100’ मुख्य रूप से शामिल हैं। फ्यूल का यह विशेष ग्रेड मुख्य तौर पर सुपरकार, लग्जरी सेडान और सुपरबाइक जैसी हाई-परफॉर्मेंस गाड़ियों के लिए ही डिजाइन किया गया है।
हालांकि, इसकी कुल मांग अभी भी काफी सीमित बनी हुई है और यह भारत की कुल पेट्रोल बिक्री का महज 0.1 फीसदी हिस्सा ही है। इसके अलावा, इसकी खुदरा कीमत सामान्य पेट्रोल की तुलना में बहुत ज्यादा है। बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक सूत्र ने बताया कि हमने पिछले कुछ महीनों में इथेनॉल-फ्री पेट्रोल की डिमांड में उल्लेखनीय तेजी देखी है। सोशल मीडिया पर इथेनॉल मिलाने से गाड़ियों को नुकसान पहुंचने के दावों ने इस वृद्धि को काफी बढ़ावा दिया है, जिसमें सबसे ज्यादा मांग देश की राजधानी दिल्ली से दर्ज की गई है। हालांकि, इस मामले पर पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG), आईओसीएल, बीपीसीएल और एचपीसीएल की तरफ से कोई भी आधिकारिक बयान अभी तक सामने नहीं आया है।
सामान्य पेट्रोल से लगभग 57 फीसदी तक महंगा है यह फ्यूल
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में, इस इथेनॉल-मुक्त 100-ऑक्टेन पेट्रोल की खुदरा कीमत लगभग 160 रुपये प्रति लीटर है, जो सामान्य पेट्रोल की कीमत से करीब 57 फीसदी ज्यादा है। इसके मुकाबले, 20 फीसदी इथेनॉल-मिक्स्ड सामान्य पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपये प्रति लीटर है, जबकि E20 प्रीमियम ग्रेड जैसे XP95, Speed97 और poWer95 की कीमत लगभग 111 से 112 रुपये प्रति लीटर के आसपास है। वहीं दूसरी ओर, आर्थिक राजधानी मुंबई में 100-ऑक्टेन पेट्रोल की खुदरा कीमत लगभग 167.35 रुपये प्रति लीटर है, जबकि वहां सामान्य पेट्रोल 111.21 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है और E20 प्रीमियम ग्रेड की कीमत करीब 120-121 रुपये प्रति लीटर है। बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, कम मांग होने के कारण देश के 1 फीसदी से भी कम फ्यूल स्टेशनों पर 100-ऑक्टेन पेट्रोल उपलब्ध है और यह सुविधा ज्यादातर बड़े मेट्रो शहरों तक ही सीमित है।
क्या यह मांग कुछ ही समय के लिए है?
तेल कंपनियों के अधिकारियों का मानना है कि मांग में आया यह हालिया उछाल कुछ समय के लिए ही है और जैसे-जैसे इथेनॉल-ब्लेंडेड फ्यूल को लेकर लोगों की चिंताएं कम होंगी, इसकी बिक्री में अपने आप कमी आ जाएगी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह फ्यूल असल में सुपर-प्रीमियम गाड़ियों के लिए बनाया गया है, लेकिन मौजूदा ट्रेंड को देखकर ऐसा लगता है कि आम गाड़ियों के मालिक भी इसे खरीद रहे हैं। हालांकि, लंबे समय तक ऐसा करना उनके लिए मुमकिन नहीं हो पाएगा क्योंकि इससे उनके फ्यूल का खर्च बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा।
पिछले हफ्ते ही सरकार ने यह साफ किया था कि सरकारी फ्यूल रिटेलर्स द्वारा बेचे जाने वाले प्रीमियम ग्रेड पेट्रोल की सप्लाई बिना किसी इथेनॉल ब्लेंडिंग के आगे भी जारी रखी जाएगी। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि इथेनॉल ब्लेंडिंग को 20 फीसदी से ज्यादा बढ़ाने का फिलहाल कोई फैसला नहीं लिया गया है और न ही E0 या E10 पेट्रोल को दोबारा बाजार में वापस लाने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन है।
100-ऑक्टेन पेट्रोल के फायदे और इंजन नॉकिंग से राहत
100-ऑक्टेन पेट्रोल का रिसर्च ऑक्टेन नंबर (RON) पूरे 100 होता है, जिसकी वजह से यह आम पेट्रोल के मुकाबले इंजन की नॉकिंग को बेहद प्रभावी तरीके से रोकता है। ज्यादा ऑक्टेन रेटिंग होने के कारण यह फ्यूल जलने से पहले उच्च तापमान और भारी कम्प्रेशन को आसानी से झेल सकता है, इसीलिए यह हाई-परफॉर्मेंस और हाई-कम्प्रेशन वाले इंजनों के लिए सबसे सही माना जाता है। हाल ही में इस फ्यूल को खरीदने वाले एक ग्राहक ने साझा किया कि 100-ऑक्टेन फ्यूल बहुत महंगा है और E20 पेट्रोल से लगभग 45 फीसदी ज्यादा कीमत पर मिलता है, इसलिए माइलेज से होने वाला कोई भी फायदा आर्थिक रूप से सही नहीं बैठता। इसका इकलौता और बड़ा फायदा यही है कि इसका इस्तेमाल करके ड्राइवर इथेनॉल-ब्लेंडेड फ्यूल से इंजन को होने वाले संभावित नुकसान से पूरी तरह बच सकते हैं।
E20 पेट्रोल को लेकर क्यों मचा हुआ है विवाद?
E20 पेट्रोल को लेकर विवाद मुख्य रूप से इसलिए है क्योंकि कुछ खास गाड़ियों, विशेषकर पुराने मॉडलों के इंजन जो इस तरह के फ्यूल के लिए डिजाइन नहीं किए गए थे, उनके पार्ट्स जल्दी खराब हो सकते हैं, गाड़ी का माइलेज कम हो सकता है और मेंटेनेंस का खर्च काफी बढ़ सकता है। इस महीने की शुरुआत में सरकार ने खुद यह माना था कि सामान्य पेट्रोल की तुलना में E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से गाड़ियों का माइलेज 3 से 5 फीसदी तक कम हो जाता है।
हालांकि, सरकार ने यह भी तर्क दिया कि इस ब्लेंड से इंजन को ज्यादा ऑक्टेन रेटिंग मिलती है, एंटी-नॉकिंग परफॉर्मेंस बेहतर होती है, ईंधन तेजी से जलता है, गाड़ी का पिकअप सुधरता है, वाहन आसानी से रफ्तार पकड़ता है और इंजन अंदर से साफ-सुथरा चलता है। सरकार ने E20 के साथ-साथ शुद्ध पेट्रोल या E10 बेचने की संभावना को सिरे से खारिज करते हुए यह भी बताया कि पब्लिक सेक्टर के बैंकों ने देश में इथेनॉल के प्रोडक्शन और उससे जुड़े बुनियादी ढांचे के लिए सालाना लगभग 1 लाख करोड़ रुपये की भारी-भरकम फाइनेंसिंग की है।

