नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में तनाव अब अपने चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को बेहद कड़े शब्दों में अल्टीमेटम दिया है, लेकिन ईरान झुकने के बजाय वाशिंगटन का मजाक उड़ाने पर उतर आया है।
ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर मंगलवार तक सीजफायर नहीं हुआ और होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरान पर अब तक का सबसे बड़ा हमला करेगा। ट्रंप का साफ कहना है कि अगर शांति समझौता नहीं हुआ, तो वह पूरे ईरान को तबाह करने की ताकत रखते हैं।
ईरान का बेबाक जवाब: 'चाबियां खो गई हैं'
ट्रंप की इस आक्रामक धमकी को गंभीरता से लेने के बजाय ईरान ने इसे मजाकिया अंदाज में खारिज कर दिया है। जिम्बाब्वे में ईरानी दूतावास ने एक रहस्यमयी टिप्पणी करते हुए कहा, "हमने होर्मुज खोलने वाली चाबियां खो दी हैं।" दूतावास ने ट्रंप के अल्टीमेटम का उपहास उड़ाते हुए 'अगला अनुरोध, कृपया' जैसी बातें लिखी हैं। ईरान का यह रुख साफ करता है कि वह फिलहाल अमेरिका के दबाव में आने को तैयार नहीं है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर कब्जे से दुनिया में हाहाकार
मिडिल ईस्ट में जारी इस जंग के बीच ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर पूरी तरह अपना नियंत्रण बना रखा है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के लिए कितना अहम है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस व्यापार इसी रास्ते से होता है। ईरान के इस कदम से वैश्विक तेल आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे भारत समेत पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था हिल गई है।
ईरान की शर्त: पहले मुआवजा दो, फिर रास्ता खुलेगा
होर्मुज को फिर से खोलने के बदले ईरान ने अपनी शर्तें भी सामने रख दी हैं। ईरान का कहना है कि अमेरिका और इजरायल के हमलों से उसे जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई की जाए। ईरान इस बात पर अड़ा है कि या तो उसे मुआवजा मिले या फिर वह इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों पर भारी टैक्स वसूलेगा।
ट्रंप का 'मंगलवार' वाला अल्टीमेटम और ईरान का पलटवार
डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कर दिया है कि अगर मंगलवार तक उनकी बात नहीं मानी गई, तो अमेरिका ईरान के बिजली संयंत्रों, पुलों और मुख्य बुनियादी ढांचे को निशाना बनाएगा। इस बीच, ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ ने पलटवार करते हुए कहा कि ट्रंप अमेरिका को 'जीते-जी नरक' में धकेल रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रंप प्रशासन इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के इशारे पर काम कर रहा है।
मौजूदा हालात को देखते हुए ऐसा लग रहा है कि संकट अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। सैन्य तनाव और कूटनीतिक दांव-पेच के बीच पूरी दुनिया की नजरें अब मंगलवार की डेडलाइन पर टिकी हैं।

