अमेरिका और ईरान के बीच हुए दो हफ्तों के सीजफायर (संघर्ष विराम) समझौते को लेकर एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है जिसने पूरी दुनिया के बाजारों में हलचल मचा दी है। इस समझौते में एक चौंकाने वाला प्रावधान शामिल किया गया है, जिसके तहत ईरान और ओमान को दुनिया के सबसे अहम तेल मार्ग, 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले जहाजों पर 'ट्रांजिट फीस' यानी टोल वसूलने की इजाजत मिल सकती है।
क्यों खास है यह 34 किलोमीटर का रास्ता?
रणनीतिक रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है। यह फारस की खाड़ी का वो संकरा मुहाना है जहां से दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। मात्र 34 किलोमीटर चौड़ा यह रास्ता ईरान और ओमान के समुद्री क्षेत्र में आता है। अब तक इसे एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग के रूप में 'टोल-फ्री' रखा गया था, यानी यहां से गुजरने के लिए किसी देश को पैसे नहीं देने पड़ते थे। लेकिन अब हालात बदलने वाले हैं।
ईरान क्यों वसूलना चाहता है पैसा?
समाचार एजेंसी एपी (AP) के मुताबिक, तेहरान के अधिकारियों का कहना है कि ईरान इस टोल से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल युद्ध में तबाह हुए अपने बुनियादी ढांचे को ठीक करने के लिए करेगा। हालिया संघर्ष के कारण ईरान के रक्षा, प्रशासनिक और नागरिक ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। ईरान इस 'रिकंस्ट्रक्शन फंड' के जरिए अपने देश को दोबारा खड़ा करना चाहता है।
सीजफायर और ट्रंप का रुख
बुधवार की सुबह अमेरिका और ईरान 40 दिनों से चले आ रहे संघर्ष को रोकने पर सहमत हुए। इस समझौते के तहत ईरान ने कुछ शर्तों के साथ इस रणनीतिक जलमार्ग को फिर से खोलने की बात कही है। बता दें कि 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से यह रास्ता लगभग बंद था, जिससे वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें आसमान छूने लगी थीं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए कहा कि ईरान ने एक 10-सूत्रीय प्रस्ताव दिया है, जो बातचीत के लिए एक "व्यावहारिक आधार" है। ट्रंप को उम्मीद है कि अगले दो हफ्तों में इस डील को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। हालांकि, शांति के इस दौर में भी ईरान के मोजतबा खामेनेई ने अपनी सेना को अलर्ट रहने को कहा है, जिसका मतलब है कि तनाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
कितनी होगी फीस और क्या है नियम?
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यह ट्रांजिट फीस फिक्स नहीं होगी। यह जहाज के प्रकार, उस पर लदे माल और मौजूदा परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने स्पष्ट किया है कि वे ओमान के साथ मिलकर इसका प्रोटोकॉल तैयार कर रहे हैं। उनका दावा है कि इस कदम का मकसद रास्ता रोकना नहीं, बल्कि उसे और बेहतर बनाना है।
हालांकि, संयुक्त राष्ट्र के समुद्री कानून (UNCLOS) के तहत, कोई भी देश सिर्फ रास्ता देने के बदले पैसे नहीं मांग सकता। वे केवल पायलटिग या टगिंग जैसी विशेष सेवाओं के लिए शुल्क ले सकते हैं। यही वजह है कि संयुक्त अरब अमीरात और कतर जैसे पड़ोसी देश इस फैसले का विरोध कर रहे हैं और खुले समुद्री आवागमन की मांग कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि इस्लामाबाद में होने वाली अगली बैठक में इस 'टोल टैक्स' पर अंतिम मुहर लगती है या नहीं।

