नई दिल्ली: दुनिया भर में जारी युद्ध और तनाव के बीच भारत के लिए एक बहुत बड़ी राहत की खबर आई है। पिछले काफी समय से कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर जो चिंताएं बनी हुई थीं, उन्हें भारत के एक पुराने और भरोसेमंद साथी ने दूर कर दिया है।
दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला से करीब 11 महीने के लंबे इंतजार के बाद अब भारी मात्रा में कच्चा तेल भारत पहुंचना शुरू हो गया है।
कमोडिटी मार्केट पर पैनी नज़र रखने वाली संस्था 'केपलर' (Kpler) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, इस महीने भारत के अलग-अलग बंदरगाहों पर वेनेजुएला से लगभग 1 करोड़ से लेकर 1.2 करोड़ बैरल कच्चा तेल पहुंचने की उम्मीद है। भारत के लिए यह खबर इसलिए भी अहम है क्योंकि वर्तमान में मिडिल ईस्ट के हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं।
ईरान-इजरायल युद्ध के बीच वेनेजुएला बना 'संकटमोचक'
भारत अपनी तेल की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा दूसरे देशों से आयात करता है। लेकिन पिछले कुछ समय से पश्चिमी एशिया में स्थिति काफी बिगड़ गई है। खासतौर पर 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमले के बाद वहां युद्ध की आग भड़क उठी है। इस तनाव की वजह से 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़' जैसा महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता लगभग बंद पड़ा है, जहां से भारत का अधिकांश तेल आता था। ऐसे मुश्किल वक्त में वेनेजुएला का आगे आना भारत के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
केपलर के सीनियर एनालिस्ट सुमित रितोलिया का कहना है कि यह तेल अचानक से नहीं मंगाया गया है, बल्कि इसके लिए बहुत पहले से ही मास्टरप्लान तैयार कर लिया गया था। आज के अनिश्चित दौर में सप्लाई के लिए दूसरे विकल्प तैयार रखना किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए बहुत फायदेमंद साबित होता है।
रिलायंस और नायरा की रिफाइनरी में होगा खेल
वेनेजुएला से आने वाला तेल थोड़ा 'भारी' (Heavy Crude) किस्म का होता है। इसे साफ करने के लिए सामान्य नहीं बल्कि खास मशीनों और एडवांस रिफाइनरी की जरूरत होती है। भारत इस मामले में काफी समृद्ध है। रिलायंस के जामनगर प्लांट और नायरा की वाडिनार रिफाइनरी में इस तेल को प्रोसेस करने की वर्ल्ड-क्लास सुविधाएं मौजूद हैं। माना जा रहा है कि तेल की कुछ खेप कोच्चि बंदरगाह पर भी उतारी जाएगी, जिसे भारत पेट्रोलियम (BPCL) की रिफाइनरी में भेजा जाएगा। BPCL के चेयरमैन संजय खन्ना ने पहले ही संकेत दे दिए थे कि अगर सही दाम पर तेल मिले तो वे वेनेजुएला से खरीदारी के लिए तैयार हैं।
आम आदमी की जेब पर क्या होगा असर?
वेनेजुएला से आने वाले इस तेल का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे डीजल और हवाई जहाज के ईंधन (Jet Fuel) का प्रोडक्शन बहुत शानदार होता है। बाजार में फिलहाल इन दोनों चीजों की डिमांड काफी ज्यादा है। विशेषज्ञों के अनुसार, जब रिफाइनरी में हल्के और भारी तेल को मिलाकर साफ किया जाता है, तो रिफाइनरी की कार्यक्षमता बढ़ जाती है। इससे आने वाले समय में घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिल सकती है।
11 साल पुराना रिश्ता और 16,000 किमी का सफर
भारत और वेनेजुएला का तेल का रिश्ता काफी पुराना है। साल 2013 में भारत अपनी जरूरत का 12 प्रतिशत तेल वेनेजुएला से ही लेता था। उस समय भी अमेरिकी दबाव के कारण ईरान से तेल कम करना पड़ा था, तब वेनेजुएला ही काम आया था। मार्च 2026 में भारत एक बार फिर वेनेजुएला का सबसे बड़ा खरीदार बनकर उभरा है।
हालांकि, यह सफर आसान नहीं है। ईरान से भारत तेल महज 10 दिन में पहुंच जाता है, लेकिन वेनेजुएला और भारत के बीच 16,000 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी है। वहां से तेल का जहाज अटलांटिक महासागर और दक्षिण अफ्रीका का चक्कर लगाते हुए करीब 35 से 45 दिन में भारत पहुंचता है। लेकिन वर्तमान संकट को देखते हुए यह इंतजार भारत के लिए पूरी तरह वसूल है।

