एक तरफ जहां ईरान युद्ध की भयंकर तबाही की वजह से दुनिया के तमाम देश गंभीर तेल संकट से जूझ रहे हैं और पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान छू रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनियां अपनी तिजोरियां भरने में लगी हुई हैं।
हालात यह हैं कि जैसे ही युद्ध की शुरुआत हुई, इन तेल कंपनियों की कमाई कई गुना तेजी से बढ़ गई और पिछले कई सालों के सारे रिकॉर्ड टूट गए। जब इन दिग्गज कंपनियों के मुनाफे के आंकड़े दुनिया के सामने आए, तो खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी इस जरूरत से ज्यादा और अंधी कमाई को देखकर बुरी तरह भड़क उठे और अपनी नाराजगी जाहिर की।
यह पूरा खेल ‘होर्मुज स्ट्रेट’ के बंद होने की वजह से शुरू हुआ था। आपको बता दें कि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम और संवेदनशील समुद्री मार्गों में से एक है, जिसके रास्ते ही पूरी दुनिया का करीब 20 फीसदी तेल और गैस का निर्यात किया जाता है। सबसे हैरान कर देने वाली बात तो यह है कि इस युद्ध का फायदा उठाकर मोटा मुनाफा कमाने वाली ज्यादातर कंपनियां अमेरिका और यूरोप की हैं, जबकि उन पश्चिमी कंपनियों का होर्मुज स्ट्रेट से कोई सीधा लेना-देना या असर नहीं था। मशहूर मीडिया संस्थान अल-जजीरा की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस बंपर कमाई करने वाली कंपनियों में एक्सॉनमोबिल (ExxonMobil), शेवरॉन (Chevron), शेल (Shell) और बीपी (BP) जैसी दुनिया की दिग्गज तेल कंपनियां शामिल हैं।
अमेरिका और यूरोप की कंपनियों का मुनाफा आसमान पर
अमेरिका की सबसे बड़ी तेल कंपनी एक्सॉनमोबिल ने अपनी दूसरी तिमाही में चौंकाने वाला 14.7 अरब डॉलर का भारी-भरकम मुनाफा दर्ज किया है। यह आंकड़ा पिछले चार साल में सबसे ज्यादा है। इसके अलावा, अमेरिका की ही दूसरी सबसे बड़ी तेल कंपनी शेवरॉन ने भी दूसरी तिमाही में 12 अरब डॉलर का तगड़ा मुनाफा कमाया, जो पिछले 6 सालों में सबसे बड़ा रिकॉर्ड है। यूरोप की प्रमुख ऊर्जा कंपनी शेल ने तो अपना मुनाफा दोगुने से भी ज्यादा बढ़ा लिया। वहीं, फ्रांस की नामी तेल कंपनी टोटलएनर्जीज का दूसरी तिमाही का मुनाफा सीधे 67 फीसदी उछल गया, जो कि लगभग पिछले तीन साल का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन रहा है।
सऊदी अरामको को भी हुआ तगड़ा फायदा
सिर्फ पश्चिमी देश ही नहीं, बल्कि ब्रिटेन की बड़ी तेल कंपनी बीपी (BP) ने भी दूसरी तिमाही में 5.73 अरब डॉलर का मुनाफा कमाया, जो पिछले साल के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि सिर्फ पश्चिमी कंपनियों को ही नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी सरकारी तेल कंपनी ‘सऊदी अरामको’ को भी इस स्थिति का बहुत बड़ा फायदा मिला। कंपनी की दूसरी तिमाही की कमाई एक साल पहले की तुलना में 44 फीसदी बढ़कर सीधे 32.69 अरब डॉलर पर पहुंच गई। दरअसल, सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन की मौजूदगी की वजह से देश को अपने तेल के निर्यात के लिए होर्मुज स्ट्रेट पर बहुत ज्यादा निर्भर नहीं रहना पड़ता।
आखिर इतना ज्यादा क्यों बढ़ गया कंपनियों का मुनाफा?
सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2026 की दूसरी छमाही के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की औसत कीमत 96.68 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रही। यह कीमत 2026 की पहली तिमाही के 78.38 डॉलर प्रति बैरल और 2025 की दूसरी तिमाही के 66.71 डॉलर प्रति बैरल से काफी ज्यादा है। जिन तेल कंपनियों का निर्यात होर्मुज रूट पर नहीं फंसा, उन्हें तेल की ऊंची कीमतों और ग्लोबल बाजार में बढ़ती मांग का सीधा और बड़ा फायदा मिला। इसके अलावा, जिन कंपनियों के पास अमेरिका और यूरोप में अपने बड़े रिफाइनिंग प्लांट्स मौजूद हैं, उनकी तो चांदी हो गई क्योंकि रिफाइंड उत्पादों के दाम तेजी से बढ़ गए और सप्लाई में कमी आने से उनका मुनाफा कई गुना बढ़ गया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की इस पर क्या रही प्रतिक्रिया?
दुनिया की इन विशालकाय तेल कंपनियों को, जिन्हें सामूहिक रूप से 'बिग ऑयल' कहा जाता है, अमेरिकी राजनीति में बेहद प्रभावशाली माना जाता है। जब इन बिग ऑयल कंपनियों ने अरबों डॉलर का यह ऐतिहासिक और रिकॉर्डतोड़ मुनाफा कमाया, तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को व्हाइट House में इस पर अपनी गहरी नाराजगी खुलकर जाहिर की।
ट्रंप ने कड़े शब्दों में कहा कि एक्सॉनमोबिल और शेवरॉन जैसी बड़ी कंपनियां बाजार में तेल की किल्लत और संकट का गलत फायदा उठाकर जरूरत से ज्यादा मुनाफा कूट रही हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि वह इस बात से बिल्कुल भी खुश नहीं हैं। ट्रंप का साफ कहना था कि इन कंपनियों को इस भारी-भरकम मुनाफे का कुछ हिस्सा सीधे जनता को वापस लौटाना चाहिए और पेट्रोल-डीजल की कीमतें कम करनी चाहिए ताकि आम आदमी को राहत मिल सके।

