आज 31 जुलाई 2026 है और वित्तीय वर्ष के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने की यह अंतिम तारीख भी है। अगर आपने अभी तक अपना टैक्स रिटर्न फाइल नहीं किया है, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी और काम की है।
आयकर विभाग (Income Tax Department) ने करदाताओं को आगाह करते हुए एक बहुत ही दिलचस्प लेकिन बेहद गंभीर चेतावनी दी है। विभाग ने क्रिकेट के मशहूर शब्द ‘हिट विकेट’ का उदाहरण देते हुए समझाया है कि आईटीआर की डेडलाइन को चूकना बिल्कुल वैसा ही है जैसे मैदान पर कोई बल्लेबाज खुद अपना ही विकेट गिरा देता है। यह एक ऐसी गलती है जिसे आसानी से टाला जा सकता है, इसके बावजूद देश के बहुत से करदाता हमेशा की तरह अंतिम समय तक इंतजार करते रहते हैं।
जानिए क्या कहा आयकर विभाग ने अपने संदेश में
आयकर विभाग ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर जारी संदेश में बिल्कुल साफ शब्दों में कहा है कि आज ITR-1 और ITR-2 फॉर्म दाखिल करने का आपके पास आखिरी मौका है। आखिरी वक्त की भीड़भाड़ और तकनीकी दिक्कतों से बचकर आप न सिर्फ भारी-भरकम जुर्माना और ब्याज भरने से खुद को बचा सकते हैं, बल्कि अपनी इस पूरी प्रक्रिया को क्रिकेट के ‘फ्री हिट’ की तरह सुरक्षित बना सकते हैं यानी बिना किसी अतिरिक्त वित्तीय नुकसान के समय रहते अपना कर दायित्व पूरा कर सकते हैं। विभाग का यह चेतावनी भरा संदेश इसलिए भी सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है क्योंकि आज की यह डेडलाइन निकलने के बाद रिटर्न दाखिल करने पर लेट फीस और ब्याज का बोझ तो पड़ता ही है, साथ ही टैक्स अनुपालन से जुड़ी अन्य कई तरह की परेशानियां भी खड़ी हो जाती हैं।
क्या आज ही ई-वेरिफिकेशन करना है जरूरी?
अब सबसे बड़ा सवाल जो देश के लाखों टैक्सपेयर्स के मन में बार-बार आ रहा है, वह यह है कि क्या आज 31 जुलाई को ही रिटर्न पोर्टल पर अपलोड करने के साथ-साथ उसका ई-वेरिफिकेशन करना भी अनिवार्य है? तो इसका सीधा और स्पष्ट जवाब है- नहीं। नियमों के मुताबिक, अगर कोई भी करदाता 31 जुलाई को या उससे ठीक पहले अपना आईटीआर सफलतापूर्वक फाइल कर देता है, तो विभाग की तरफ से उसे रिटर्न के सत्यापन (Verification) के लिए पूरे 30 दिनों की अतिरिक्त समयसीमा दी जाती है।
इसका बहुत ही सीधा सा मतलब यह है कि आज अपना रिटर्न भरने वाले करदाता आने वाले अगस्त महीने के दौरान कभी भी अपना ई-वेरिफिकेशन पूरा कर सकते हैं और इसके बावजूद उनकी रिटर्न दाखिल करने की मूल तारीख 31 जुलाई ही मानी जाएगी, बशर्ते यह सत्यापन तयशुदा 30 दिनों के भीतर सफलतापूर्वक पूरा कर लिया जाए।
तय समय पर वेरिफिकेशन न करने पर भुगतना पड़ेगा यह नुकसान
हालांकि, अगर कोई टैक्सपेयर इस 30 दिन की कानूनी समयसीमा को पार कर जाता है, तो फिर जिस दिन सत्यापन किया जाएगा, उसी तारीख को ही रिटर्न दाखिल करने की वास्तविक तारीख मान लिया जाता है। ऐसी स्थिति में आपका रिटर्न ‘बड़े पचड़े’ यानी लेट कैटेगरी में आ जाता है, जिससे जुर्माना और अतिरिक्त ब्याज का पूरा झंझट खड़ा हो जाता है।
इससे भी बड़ी और ध्यान देने योग्य बात यह है कि यदि आने वाली 31 दिसंबर 2026 तक भी रिटर्न का ई-वेरिफिकेशन नहीं किया जाता है, तो आपके द्वारा दाखिल किया गया वह रिटर्न पूरी तरह से अमान्य (Invalid) करार दिया जा सकता है। ऐसे में, हालांकि कानून करदाताओं को थोड़ी बहुत राहत जरूर देता है, लेकिन समझदारी इसी में है कि टैक्सपेयर्स को वेरिफिकेशन के काम में किसी भी तरह की अनावश्यक देरी बिल्कुल नहीं करनी चाहिए।

