मुरादाबाद। मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा इलाके में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता इंजीनियर इक़बाल का घर इन दिनों राजनीति से इतर आम जनता की उम्मीदों का बड़ा केंद्र बनता जा रहा है। इलाके के लोगों की मानें तो उनका घर अब एक 'जनता दरबार' की शक्ल अख्तियार कर चुका है, जहां हर हफ्ते दूर-दराज के गांवों से लोग अपनी फरियाद लेकर पहुंच रहे हैं।
इसी कड़ी में रविवार को इंजीनियर इक़बाल के आवास पर जन पंचायत का आयोजन किया गया, जिसमें इलाके के सैकड़ों ग्रामीणों की मौजूदगी रही। इस दौरान आपसी विवादों को सुलझाने के साथ-साथ कई सामाजिक मुद्दों पर खुलकर चर्चा हुई।
दरअसल, ठाकुरद्वारा और आसपास के ग्रामीण इलाकों में छोटे-मोटे घरेलू और जमीनी विवादों को लेकर कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटना आम बात है। लेकिन इंजीनियर इक़बाल की इस पहल ने लोगों को एक नया रास्ता दिखाया है। उनके आवास पर नियमित रूप से होने वाली इस जनसुनवाई में न सिर्फ पारिवारिक मतभेद और लेन-देन के मामलों को सुना जाता है, बल्कि दोनों पक्षों को आमने-सामने बिठाकर बीच का रास्ता निकालने की कोशिश की जाती है।
जन पंचायत में उमड़ी भीड़, मौके पर ही सुलझे कई मामले
रविवार की सुबह से ही इंजीनियर इक़बाल के आवास पर लोगों का आना शुरू हो गया था। देखते ही देखते परिसर में भारी भीड़ जमा हो गई। इस जन पंचायत की खास बात यह रही कि यहां किसी भी पक्ष पर कोई फैसला थोपा नहीं गया, बल्कि आपसी बातचीत के जरिए सौहार्दपूर्ण माहौल में विवादों को निपटाया गया। जमीन-जायदाद से जुड़े कुछ पुराने मामलों में दोनों पक्षों ने हाथ मिलाकर आपसी रंजिश खत्म करने का फैसला किया।
मौके पर मौजूद स्थानीय लोगों का कहना था कि अदालतों में सालों-साल खिंचने वाले मुकदमों से बेहतर है कि ऐसे मंचों पर बैठकर बात कर ली जाए। इससे समय और पैसा दोनों बचता है, और सबसे बड़ी बात कि रिश्तों में कड़वाहट नहीं घुलती।
'कानूनी पचड़ों और आर्थिक बोझ से बच रहे हैं लोग'
जन पंचायत के दौरान आए ग्रामीणों से बात करते हुए सपा नेता इंजीनियर इक़बाल ने कहा कि जनता की सेवा करना और उनकी परेशानियों को कम करना उनका बुनियादी दायित्व है। उन्होंने जोर देकर कहा, "अगर छोटे-मोटे मतभेद आपस में बैठकर सुलझा लिए जाएं, तो गरीब जनता थानों और अदालतों के चक्कर काटने से बच जाएगी। कानूनी प्रक्रियाएं न सिर्फ लंबी होती हैं, बल्कि आम आदमी पर भारी आर्थिक बोझ भी डालती हैं। हमारी कोशिश समाज में भाईचारा और आपसी सौहार्द बनाए रखने की है।"
ठाकुरद्वारा में चर्चा का विषय बना यह अनोखा 'जनता दरबार'
यह कोई पहला मौका नहीं है जब उनके घर पर इस तरह की पंचायत जुटी हो। पिछले कुछ महीनों में यह सिलसिला काफी तेज हुआ है। क्षेत्र के बुजुर्गों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि इस तरह के प्रयासों से ग्रामीण इलाकों में बड़े विवाद होने की आशंका काफी कम हो जाती है। बैठक में न सिर्फ फरियादी बल्कि इलाके के कई संभ्रांत नागरिक और समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता भी मौजूद रहे, जिन्होंने मामलों को सुलझाने में मध्यस्थ की भूमिका निभाई। देर शाम तक चली इस पंचायत में एक-एक कर सभी की समस्याएं सुनी गईं और कई परिवारों को टूटने से बचाया गया।

