तिरुवनंतपुरम: केरल की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। भगवान के अपने देश (God's Own Country) में लाल सलाम का किला दरकता नजर आ रहा है और कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ (UDF) ने जबरदस्त बढ़त बना ली है।
चुनाव आयोग के ताजा आंकड़ों ने राजनीतिक पंडितों को हैरान कर दिया है-जहां कांग्रेस अकेले 50 सीटों पर आगे चल रही है, वहीं सत्ताधारी सीपीआई (एम) सिर्फ 31 सीटों पर सिमटती दिख रही है।
अगर यही रुझान नतीजों में बदले, तो केरल में दशकों पुराना रिवाज कायम रहेगा और सत्ता परिवर्तन तय है। लेकिन जीत की खुशी के साथ ही कांग्रेस के भीतर एक बड़ा सिरदर्द भी शुरू हो गया है-आखिर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर कौन बैठेगा?
सीएम की रेस में कौन-कौन? इन चेहरों पर टिकी हैं निगाहें
केरल कांग्रेस में कद्दावर नेताओं की लंबी फौज है, और सत्ता मिलते ही 'कुर्सी' के लिए घमासान मचना तय माना जा रहा है। रेस में ये 5 बड़े नाम सबसे आगे हैं:
- वी.डी. सतीशन: वर्तमान में नेता प्रतिपक्ष हैं और पारवूर सीट से मैदान में हैं। 2021 की हार के बाद उन्होंने पार्टी में नई जान फूंकी है और वामपंथी सरकार के खिलाफ सबसे आक्रामक चेहरा बनकर उभरे हैं।
- के.सी. वेणुगोपाल: हालांकि वे दिल्ली की राजनीति संभाल रहे हैं, लेकिन गांधी परिवार के संकटमोचक माने जाते हैं। चर्चा है कि वेणुगोपाल की इच्छा केरल की कमान संभालने की है।
- रमेश चेन्निथला: पार्टी के सबसे कद्दावर नेताओं में से एक। हरिपाद सीट से चुनाव लड़ रहे चेन्निथला के पक्ष में वरिष्ठ नेता के. सुधाकरन ने भी खुलेआम बैटिंग की है।
- के. सुधाकरन: प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष होने के नाते इनका दावा सबसे स्वाभाविक है। कार्यकर्ताओं के बीच इनकी पकड़ बेहद मजबूत है।
- शशि थरूर: तिरुवनंतपुरम के सांसद थरूर युवाओं और मध्यम वर्ग के बीच 'सुपरस्टार' हैं। हालांकि वे सांसद हैं, लेकिन उन्हें एक 'वाइल्ड कार्ड' उम्मीदवार के तौर पर देखा जा रहा है।
जीत के बाद क्या मचेगा कांग्रेस में कोहराम?
कांग्रेस के लिए यह जीत जितनी बड़ी है, उतनी ही बड़ी चुनौती इन गुटों को साधने की होगी। केरल कांग्रेस में गुटबाजी पुरानी बीमारी रही है। अगर आलाकमान ने किसी एक नाम पर मुहर लगाने में देरी की, तो असंतोष की आग दिल्ली से तिरुवनंतपुरम तक फैल सकती है। असली ड्रामा तो बहुमत का आंकड़ा पार करने के बाद शुरू होगा।
ताजा आंकड़ों की तस्वीर: यूडीएफ की लहर, एलडीएफ को झटका
रुझानों में कांग्रेस गठबंधन (UDF) जादुई आंकड़े को छूता दिख रहा है:
| पार्टी / गठबंधन | रुझान (सीटें) | स्थिति |
| कांग्रेस (INC) | 50 | सबसे बड़ी पार्टी |
| आईयूएमएल (IUML) | 20 | कांग्रेस की मजबूत सहयोगी |
| सीपीआई (एम) | 31 | सत्ता से बाहर होने का खतरा |
| सीपीआई | 14 | भारी नुकसान |
| बीजेपी | 03 | धीरे-धीरे बढ़ता कद |
सत्ता विरोधी लहर का फायदा उठाते हुए कांग्रेस और उसकी सहयोगी आईयूएमएल ने मिलकर 70 सीटों पर कब्जा जमाया हुआ है। दूसरी ओर, केरल कांग्रेस (M) और आरएसपी जैसी छोटी पार्टियां भी अपनी-अपनी सीटों पर बढ़त बनाए हुए हैं। क्या केरल में वामपंथ का सूरज अस्त होने वाला है? सबकी नजरें अब अंतिम नतीजों पर हैं।

