Dailyhunt Logo
  • Light mode
    Follow system
    Dark mode
    • Play Story
    • App Story
LPG पर भारत का सबसे बड़ा फैसला! मिडिल ईस्ट को छोड़ अब अमेरिका से होगी गैस की धांसू डील

LPG पर भारत का सबसे बड़ा फैसला! मिडिल ईस्ट को छोड़ अब अमेरिका से होगी गैस की धांसू डील

UPUK Live 1 week ago

भारत सरकार ने देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और भविष्य में किसी भी संकट से निपटने के लिए एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत साल 2027 तक अपनी जरूरत का 25% लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस यानी एलपीजी (LPG) सीधे अमेरिका से आयात करने की पुख्ता तैयारी कर रहा है।

सरकार के इस बड़े फैसले से आने वाले दिनों में खाड़ी देशों के ऊपर से एलपीजी की सप्लाई की निर्भरता काफी हद तक कम हो जाएगी और साथ ही अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Trade Deal) को आगे बढ़ाने में भी काफी मदद मिलेगी।

ईरान-अमेरिका संघर्ष से ली बड़ी सीख

सरकार की तरफ से यह शानदार और दूरदर्शी कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है, जब कुछ समय पहले ईरान और अमेरिका के बीच छिड़े भीषण तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने से देश की एनर्जी सप्लाई पर तगड़ा असर पड़ा था। उस दौरान भारत को एलपीजी की भारी किल्लत का सामना करना पड़ा था। हालात इतने गंभीर हो गए थे कि सरकार को पेट्रोकेमिकल फीडस्टॉक को इंडस्ट्री से हटाकर सीधे उन घरों तक एलपीजी पहुंचाने के लिए कड़े आपातकालीन उपाय लागू करने पड़े थे, जो खाना पकाने के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं। यही वजह है कि सरकार अब वक्त रहते ही ऐसा पुख्ता प्लान ‘B’ तैयार करना चाहती है, जिससे भविष्य में अगर कभी ऐसी स्थिति फिर से पैदा हो, तो देश में गैस की सप्लाई पर कोई आंच न आए।

वर्तमान में किन-किन देशों से एलपीजी मंगाता है भारत?

अगर आंकड़ों पर नजर डालें, तो साल 2025 में भारत के कुल 21.85 मिलियन टन एलपीजी आयात में से लगभग 90% हिस्सा अकेले मिडिल ईस्ट यानी खाड़ी देशों से आता था, जिसने भारत को दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा एलपीजी आयातक और उपभोक्ता बना दिया है। बाकी का बचा हुआ 10% हिस्सा अमेरिका, नॉर्वे, अल्जीरिया, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों से मंगाया जाता था। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश के भीतर इस्तेमाल होने वाली कुल एलपीजी का लगभग 66% हिस्सा आयात के जरिए ही पूरा होता है। इनमें सबसे बड़ा सप्लायर यूएई (UAE) है, जिससे भारत अपनी कुल एलपीजी का करीब 40% हिस्सा आयात करता है।

अब पूरी तरह बदलने वाली है तस्वीर

मिडिल ईस्ट में लगातार बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट के रास्तों में आने वाली बाधाओं को ध्यान में रखते हुए भारत अब अपने पुराने 90:10 के इस अनुपात को तेजी से बदलने पर काम कर रहा है। ऊर्जा आयात की इस रणनीति में बदलाव के तहत, साल 2027 तक भारत अपनी कुल एलपीजी सप्लाई का 25% हिस्सा सिर्फ अमेरिका से लेगा। इस दिशा में यह भी खबर आ रही है कि अगले एक-दो महीनों के भीतर देश की प्रमुख सरकारी रिफाइनर कंपनियां – इंडियन ऑयल कॉर्प (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉर्प (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्प (HPCL) – साल 2027 के लिए अमेरिकी एलपीजी सप्लाई हेतु बड़े टेंडर जारी करने जा रही हैं। इसका मुख्य उद्देश्य साल 2027 में देश की रसोई गैस की निर्बाध सप्लाई को सुनिश्चित करने के लिए पहले से ही बुकिंग पक्की करना है। कतर और यूएई जैसे खाड़ी देशों के रूट (लाल सागर और होर्मुज स्ट्रेट) में चल रहे तनाव के कारण भारत अब अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए अमेरिका को एक बेहद सुरक्षित और भरोसेमंद विकल्प मानकर चल रहा है।

तेल कंपनियों का अगला बड़ा प्लान क्या है?

भारत की ये सरकारी तेल कंपनियां टेंडर निकालकर अमेरिकी एक्सपोटर्स के साथ लंबी अवधि के बड़े सौदे करेंगी। अमेरिका में शेल गैस (Shale Gas) का बाजार बहुत बड़ा और स्थिर माना जाता है। जब कंपनियों के साथ कॉन्ट्रैक्ट लंबे समय के होंगे, तो भारत में गैस सिलेंडरों के दाम भी काफी हद तक स्थिर बने रहेंगे, क्योंकि अमेरिका में खाड़ी देशों की तरह गैस की कीमतें अचानक ज्यादा ऊपर-नीचे नहीं भागती हैं। यदि भारत को अमेरिका से तय रेट पर लंबे समय तक गैस मिलती रही, तो मिडिल ईस्ट में युद्ध या तनाव बढ़ने जैसी किसी भी अप्रिय स्थिति में न तो अचानक कीमतें बढ़ने का डर रहेगा और न ही आम जनता की जेब पर इसका कोई बुरा असर पड़ेगा। इस नीति का एक और बड़ा फायदा यह होगा कि आने वाले समय में अमेरिका और खाड़ी देशों के बीच भारत को गैस और तेल बेचने को लेकर स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बनी रहेगी, जिससे दोनों देश हमें बेहतर दामों पर ऊर्जा उपलब्ध कराने की कोशिश करेंगे।

क्या ट्रेड डील पर आगे बढ़ेगी बात?

भारत, अमेरिका के साथ रुकी हुई ट्रेड डील को एक नई रफ्तार देने के लिए ऊर्जा की खरीद को 10 अरब डॉलर से बढ़ाकर सीधे 25 अरब डॉलर तक ले जाने की बड़ी योजना पर काम कर रहा है। इससे दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को साल 2030 तक 500 अरब डॉलर के ऊंचे लक्ष्य तक पहुंचाने में बहुत मदद मिलेगी।

सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, मिडिल ईस्ट से सप्लाई में आई कमी की भरपाई के लिए भारत ने पहले ही अमेरिका और अन्य दूसरे वेंडरों से स्पॉट खरीद में काफी बढ़ोतरी कर दी है। केवल जून के महीने में ही अमेरिका से एलपीजी का आयात पहली बार 10 लाख टन (1 मिलियन टन) के आंकड़े को पार कर गया है और यह अनुमान लगाया जा रहा है कि यह साल 2026 के लिए भारत के शुरुआती 22 लाख टन (2.2 मिलियन टन) के सालाना कॉन्ट्रैक्ट टारगेट को भी पीछे छोड़ देगा।

दूसरी तरफ, मिडिल ईस्ट से सप्लाई कम होने के कारण जनवरी से जून 2026 के बीच भारत में एलपीजी की कुल खपत घटकर लगभग 1.47 करोड़ टन (14.7 मिलियन टन) पर आ गई है, जो पिछले साल के मुकाबले लगभग 8% कम है। शुरुआती सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस दौरान कुल आयात भी लगभग 28% घटकर करीब 75 लाख टन (7.5 मिलियन टन) रह गया है। जानकारों के एक अनुमान के मुताबिक, सप्लाई में आई इस कमी की वजह से इस साल भारत में एलपीजी की कुल खपत घटकर लगभग 30 मिलियन टन के आसपास सिमट सकती है। हालांकि, साल 2027 में मांग के फिर से बढ़कर करीब 31 मिलियन टन तक पहुंचने की उम्मीद है, जिसके चलते एलपीजी का आयात बढ़कर लगभग 20 मिलियन टन तक पहुंच सकता है।

Dailyhunt
Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: UPUKLive