नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध की आहट ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है। इस वैश्विक संकट का सबसे सीधा और कड़वा असर आम आदमी की रसोई पर पड़ा है।
कच्चे तेल और गैस की सप्लाई चेन टूटने की वजह से भारत में भी एलपीजी (LPG) के दाम आसमान छू रहे हैं।
इसी महंगाई के बीच आम जनता के लिए एक बड़ी मांग उठी है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक चिट्ठी लिखी है, जिसमें रसोई गैस और पाइप वाली गैस (PNG) को पूरी तरह से 'टैक्स-फ्री' करने की अपील की गई है। सीटीआई का कहना है कि अगर सरकार टैक्स हटा दे, तो महंगाई की मार झेल रही जनता को चैन की सांस मिल सकेगी।
रसोई गैस पर टैक्स का मौजूदा खेल
क्या आप जानते हैं कि आपके रसोई गैस सिलेंडर पर सरकार कितना टैक्स वसूलती है? वर्तमान में घरेलू इस्तेमाल वाले LPG सिलेंडर पर 5% जीएसटी (GST) लगाया जाता है। वहीं, अगर बात करें कमर्शियल सिलेंडर की-जो होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों में इस्तेमाल होते हैं-उन पर सरकार पूरे 18% का भारी-भरकम जीएसटी लेती है।
पाइप वाली गैस (PNG) की कहानी थोड़ी अलग है। यह फिलहाल जीएसटी के दायरे से बाहर है, जिसका मतलब है कि हर राज्य सरकार इस पर अपनी मर्जी से वैट (VAT) लगाती है। दिल्ली में जहां पीएनजी पर 5% वैट है, वहीं कुछ राज्यों में यह वसूली 14.5% तक पहुंच जाती है।
टैक्स हटा तो आपकी जेब में बचेंगे इतने पैसे
अब सवाल यह है कि अगर सीटीआई की मांग मान ली गई, तो आपके कितने पैसे बचेंगे? मान लीजिए दिल्ली में एक घरेलू सिलेंडर की कीमत अभी 913 रुपये है। अगर सरकार इस पर से 5% जीएसटी हटा देती है, तो यह सीधा 43 रुपये सस्ता होकर 869.52 रुपये का हो जाएगा।
असली धमाका तो कमर्शियल सिलेंडर पर होगा। 18% जीएसटी के साथ जो सिलेंडर अभी 2,078.50 रुपये का मिल रहा है, टैक्स हटने के बाद उसकी कीमत 317 रुपये कम होकर 1,761.44 रुपये रह जाएगी। इससे न सिर्फ व्यापारियों को फायदा होगा, बल्कि बाहर खाना-पीना भी सस्ता हो सकता है।
गैस संकट के बीच मची पीएनजी लेने की होड़
पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष ने लोगों के मन में डर पैदा कर दिया है। सप्लाई कम होने की आशंका में लोग अब तेजी से पाइप वाली गैस (PNG) की ओर मुड़ रहे हैं। सीटीआई के चेयरमैन बृजेश गोयल ने बताया कि दिल्ली में जहां फरवरी 2026 में हर दिन औसतन 686 नए पीएनजी कनेक्शन लग रहे थे, वहीं मार्च में यह आंकड़ा तीन गुना बढ़कर 2,000 प्रतिदिन तक पहुंच गया है।
सीटीआई के पदाधिकारियों का कहना है कि जब लोग इतनी बड़ी संख्या में गैस के लिए हाहाकार कर रहे हैं, तो सरकार को टैक्स हटाकर अपना हाथ आगे बढ़ाना चाहिए। अब देखना यह है कि क्या बजट के इस बोझ को कम करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी इस चिट्ठी पर कोई बड़ा एक्शन लेते हैं।

