साल 2014 में नरेंद्र मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी रणनीति को पूरी तरह बदल दिया है। भारत अब न केवल आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ कर रहा है, बल्कि सीमा पार स्थित कैंपों पर सैन्य कार्रवाई करके पाकिस्तान और वहां बैठे आतंकियों को कड़ा सबक भी सिखा रहा है।
लेकिन अब सरकार ने एक ऐसे मोर्चे पर ध्यान केंद्रित किया है जो अब तक पर्दे के पीछे था।
काउंटर-इंटेलिजेंस: अमित शाह का नया मिशन
जब से अमित शाह ने गृह मंत्री का कार्यभार संभाला है, सरकार का पूरा जोर काउंटर-इंटेलिजेंस (CI) पर है। पिछली सरकारों ने अक्सर इस गंभीर मुद्दे को नजरअंदाज किया, लेकिन मौजूदा राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र ने विदेशी खुफिया एजेंसियों, उनके नेटवर्क और भारत में सक्रिय एजेंटों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पहले पश्चिमी देशों की खुफिया एजेंसियां भारत के राजनीतिक और सैन्य हलकों में बिना किसी रोक-टोक के प्रभाव डालती थीं। इसके अलावा, पाकिस्तान की ISI और चीन की MSS जैसी एजेंसियां भारतीय समाज और सोशल मीडिया में घुसपैठ कर रही थीं, जिन पर अब नकेल कसी जा रही है।
भीतर और बाहर, हर खतरे पर नजर
पिछले एक दशक में भारत की सुरक्षा को कई मोर्चों से चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। विदेशी तत्वों ने फर्जी पहचान के जरिए सैन्य क्षेत्रों में घुसपैठ करने, दस्तावेजों में हेराफेरी के नेटवर्क चलाने और संवेदनशील जगहों पर जासूसी उपकरण लगाने की कोशिशें की हैं। पाकिस्तानी ISI, चीनी खुफिया विभाग, बांग्लादेशी आतंकी संगठन और पश्चिमी देशों के जासूस भारत विरोधी एजेंडे को हवा देने में लगे रहे हैं। हालांकि, भारतीय एजेंसियों ने इन ऑपरेशनों को न केवल नाकाम किया है, बल्कि इसमें शामिल लोगों को गिरफ्तार कर उनके नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है।
अभेद्य सुरक्षा चक्र: एजेंसियों का तालमेल
भारत की इस जवाबी कार्रवाई के पीछे एक मजबूत संस्थागत ढांचा है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत मामलों की जांच करती है, जहां इसकी सजा दिलाने की दर (Conviction Rate) लगभग 95% है। खुफिया ब्यूरो (IB) देश के भीतर की जानकारी जुटाता है और 'मल्टी-एजेंसी सेंटर' (MAC) के जरिए सभी एजेंसियों के साथ रीयल-टाइम डेटा साझा करता है। वहीं, रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (R&AW) विदेशी धरती पर बैठे एजेंटों पर नजर रखती है।
सीमाओं की बात करें तो SSB नेपाल बॉर्डर पर चीनी घुसपैठ को रोकने में जुटी है, जबकि आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, यूपी और पंजाब की पुलिस जासूसी के मामलों को पकड़ने में सबसे आगे रही है। BSF और सेना भी खुफिया इनपुट के आधार पर जमीनी स्तर पर इन खतरनाक नेटवर्क को जड़ से उखाड़ फेंकने में सहयोग दे रही हैं।

