नर्मदा जल विवाद को लेकर दशकों से चल रहा खींचतान आखिरकार खत्म हो गया है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में एक ऐतिहासिक समझौता हुआ है, जिसने महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश के बीच लंबित भुगतान के विवाद को पूरी तरह से सुलझा दिया है।
7 जुलाई को नई दिल्ली में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में इन चारों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिससे सरदार सरोवर परियोजना से जुड़े बरसों पुराने विवादों का अंत हो गया है।
क्या है ऐतिहासिक समझौता?
इस बैठक में केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल भी विशेष रूप से उपस्थित थे। इस समझौते के तहत सरदार सरोवर परियोजना के निर्माण की लागत साझा करने से जुड़े विवादों को 'वन-टाइम सेटलमेंट' (एकमुश्त निपटान) के जरिए हल कर लिया गया है। लंबे समय से चल रहे लंबित भुगतानों के मसले को सुलझाने की दिशा में इसे एक बहुत बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है। यह समझौता न केवल राज्यों के बीच वित्तीय विवादों को समाप्त करेगा, बल्कि भविष्य के लिए सहकारी संघवाद का एक नया उदाहरण भी पेश करेगा।
पीएम मोदी के नेतृत्व में सुलझ रहे जटिल मसले
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस सफलता का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को दिया। उन्होंने कहा कि राज्यों में 'डबल इंजन' सरकार होने का बड़ा फायदा यह हुआ है कि राजनीतिक मतभेद कम हुए हैं और राज्यों के बीच एक-दूसरे को समझने की क्षमता बढ़ी है। शाह ने बताया कि पिछले कुछ समय में हरियाणा-राजस्थान जल विवाद हो या किशाऊ बांध परियोजना, ऐसे कई उलझे हुए मामले तेजी से सुलझाए गए हैं। उन्होंने कहा कि पानी अंततः देश के किसानों के ही काम आता है, इसलिए ऐसे विवादों से होने वाले राष्ट्रीय नुकसान को रोकना बेहद जरूरी है।
'पड़ोसी राज्य की समृद्धि में ही हमारी भलाई'
मंत्री शाह ने इस बात पर जोर दिया कि जल वितरण जैसे मामलों में राज्यों को रचनात्मक सहयोग दिखाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि कोई पड़ोसी राज्य समृद्ध होता है, तो उसका सकारात्मक असर अपने राज्य पर भी पड़ता है। उन्होंने विशेष रूप से राजस्थान के संदर्भ में कहा कि भले ही नर्मदा का पानी वहां कम मात्रा में पहुंचा हो, लेकिन जिस जमीन को यह पानी मिला है, वहां के किसानों की किस्मत और भूमि का मूल्य पूरी तरह बदल गया है। इस समझौते के साथ ही चारों राज्यों ने साबित कर दिया है कि बातचीत से किसी भी बड़े मुद्दे का सौहार्दपूर्ण हल निकाला जा सकता है।

