देश के जाने-माने वरिष्ठ वकील और निर्दलीय राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर जोरदार हमला बोला है। सिब्बल ने SIR की पूरी प्रक्रिया को वोटर लिस्ट में हेरफेर करने का एक जरिया करार दिया है और आरोप लगाया है कि इसके जरिए खास तौर पर मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है।
कपिल सिब्बल ने बुधवार (2 सितंबर) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (ट्विटर) पर एक पोस्ट के जरिए झारखंड में चल रहे SIR को लोगों को मतदाता सूची से बाहर रखने की गंदी राजनीति करार दिया। उन्होंने लिखा कि मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक झारखंड SIR की पूरी कवायद लोगों के नाम काटने का खेल है, क्योंकि बीजेपी के कार्यकर्ता और एजेंट सीधे तौर पर मुसलमानों को निशाना बना रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट तुरंत दखल दे और इसे रोके- सिब्बल
वरिष्ठ वकील ने आरोप लगाया कि बीजेपी के एजेंट भारी संख्या में लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं। इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए कपिल सिब्बल ने मांग की है कि देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट को तुरंत इसमें हस्तक्षेप करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को आगे आकर इस प्रक्रिया पर रोक लगानी चाहिए। सिब्बल ने आगे दावा किया कि SIR एक ऐसी योजनाबद्ध कवायद है, जिसका एकमात्र मकसद आगामी चुनावों में जीत हासिल करने के लिए वोटर लिस्ट में अपनी सुविधानुसार हेर-फेर करना है।
इसके अलावा न्यूज एजेंसी पीटीआई (PTI) से खास बातचीत करते हुए कपिल सिब्बल ने आरोप लगाया कि मौजूदा नियमों का फायदा उठाकर किसी भी राजनीतिक दल का कोई भी सदस्य या कार्यकर्ता आसानी से किसी भी नागरिक के बारे में यह झूठा दावा कर सकता है कि वह संबंधित पते पर नहीं रहता और उसका नाम मतदाता सूची से हटा दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) के पास बहुत बड़ी संख्या में फॉर्म 7 जमा कराए गए, जिसके आधार पर लोगों के नाम काट दिए गए।
मुसलमानों को बनाया गया निशाना- सिब्बल का गंभीर आरोप
कपिल सिब्बल ने पूरे मामले का खुलासा करते हुए कहा कि खुद BLO ने भी इस पूरी प्रक्रिया का विरोध किया था, क्योंकि नाम हटाने के पीछे कोई ठोस और प्रामाणिक तथ्य मौजूद नहीं थे। जब इस मामले की गहराई से जांच हुई और सच सामने आया, तो पता चला कि जिन-जिन इलाकों में SIR के तहत बड़े पैमाने पर फॉर्म 7 भरे जा रहे थे, वहां सिर्फ और सिर्फ मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा था। बाद में जांच में यह भी साफ हुआ कि जिन लोगों के नाम हटाने की कोशिश की गई, वे वहां किसी एक-दो साल से नहीं बल्कि सदियों से निवास कर रहे थे।
उन्होंने आगे कहा कि चूंकि झारखंड में विपक्ष की सरकार है, इसलिए वे वहां प्रशासनिक स्तर पर ज्यादा दबाव नहीं बना पा रहे हैं। लेकिन जहां-जहां बीजेपी की अपनी सरकारें हैं, वहां अगर उन्होंने इसी तरह की मनमानी की, तो फिर ऐसे SIR का क्या मतलब रह जाता है? सिब्बल ने चेतावनी देते हुए कहा कि सभी को यह समझने की सख्त जरूरत है कि अगर देश में इसी तरह का खेल चलता रहा, तो यह बेहद विवादित और खतरनाक स्थिति बन जाएगी। सिब्बल ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि जो लोग बीजेपी के पारंपरिक वोटर नहीं हैं, चुन-चुनकर उनके नाम मतदाता सूची से गायब किए जा रहे हैं।

