नेपाल और चीन के सीमावर्ती इलाकों में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 600 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 2,400 से भी ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं।
हिमालयी क्षेत्रों में बचाव दल मलबे के नीचे दबे लोगों की तलाश में दिन-रात जुटे हुए हैं, लेकिन लगातार बदलता मौसम और पहाड़ों का मिजाज उनके रास्ते में बड़ी रुकावट बन रहा है।
सबसे ज्यादा खौफनाक स्थिति पहाड़ों के बीच बनी अस्थिर झीलों को लेकर है। मलबे के कारण बनी इन अस्थिर झीलों में पानी का स्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे किसी भी पल दोबारा सैलाब आने का खतरा बना हुआ है। नेपाल में हालात बेहद नाजुक हैं, जहां देश के 8 अलग-अलग जिलों में अब तक 579 लोगों की जान जाने की पुष्टि हो चुकी है। दूसरी तरफ, चीन के तिब्बत इलाके में 7 लोगों की मौत की खबर है। आंकड़ों के मुताबिक, नेपाल में लापता लोगों की संख्या 1,924 तक पहुंच गई है, वहीं तिब्बत के जिरोंग काउंटी से भी 554 लोग गायब हैं। हालांकि, आशंका जताई जा रही है कि चीन की तरफ से मौतों और नुकसान का पूरा आंकड़ा साझा नहीं किया जा रहा है।
विदेशियों और भारतीयों पर संकट
लापता लोगों में केवल स्थानीय निवासी ही नहीं, बल्कि भारी संख्या में विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। रिपोर्टों के अनुसार, लगभग 540 विदेशी नागरिक इस वक्त आपदा प्रभावित क्षेत्रों में फंसे या लापता हैं, जिनमें कई कैलाश मानसरोवर की धार्मिक यात्रा पर निकले हिंदू तीर्थयात्री भी हैं।
भारत सरकार और विदेश मंत्रालय लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, अब तक 84 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। सुरक्षित निकाले गए लोगों में तमिलनाडु के 21 नागरिक और त्रिशूली-1 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में कार्यरत 63 कर्मचारी शामिल हैं। इसके अलावा, 149 भारतीय नागरिक चीन के रास्ते सुरक्षित नेपाल पहुंच चुके हैं, जबकि लगभग 400 भारतीय अभी चीन के सुरक्षित इलाकों में मौजूद हैं और भारतीय दूतावास उनकी वतन वापसी की व्यवस्था कर रहा है। इन सबके बावजूद, करीब 320 ऐसे भारतीय हैं जिनसे कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है। नेटवर्क और टेलीकम्युनिकेशन लाइनें ठप होने की वजह से उनसे बातचीत करने में दिक्कतें आ रही हैं।
आखिर कैसे आई यह भयानक तबाही?
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के आंकड़ों के अनुसार, इस भीषण आपदा की मुख्य वजह ऊपरी हिस्से में ग्लेशियर का टूटना था। ग्लेशियर टूटने से भारी मात्रा में बर्फ, बड़ी चट्टानें, मिट्टी और मलबा एक साथ तेजी से नीचे की ओर खिसका। यह मलबा हिमालय से निकलने वाली नदियों में जा गिरा, जिससे नदियों का जलस्तर अचानक कई गुना बढ़ गया।
पानी और मलबे के इस तेज बहाव ने अपने रास्ते में आने वाली तमाम सड़कों, पुलों और इमारतों को पल भर में ध्वस्त कर दिया। देखते ही देखते कई रिहाइशी इलाके मोटी मिट्टी और मलबे की परतों के नीचे दफन हो गए।
ऊपरी पहाड़ों में फिर जमा हो रहा पानी
बाढ़ के दौरान बहाकर लाया गया मलबा कई जगह नदियों के स्वाभाविक प्रवाह के सामने रुकावट बन गया, जिससे अस्थायी ‘बैरियर लेक’ यानी मलबे से घिरी झीलें बन गईं। इन झीलों में पहाड़ों से आने वाला पानी लगातार इकट्ठा हो रहा है। हाल ही में ऐसी ही एक झील के ओवरफ्लो होने के कारण राहत और बचाव कार्य को बीच में ही रोकना पड़ा था।
नेपाल पुलिस को तिब्बत की तरफ एक बांध के टूटने का इनपुट मिला था, जिसके बाद निचले इलाकों में काम कर रहे बचावकर्मियों को फौरन सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए गए। चीन के जिरोंग इलाके में भी रेस्क्यू ऑपरेशन को कुछ समय के लिए स्थगित करना पड़ा। स्थिति थोड़ी सामान्य होने के बाद काम दोबारा शुरू किया गया। फिलहाल नेपाली प्रशासन ऊपरी इलाकों में बनी दो प्रमुख बैरियर झीलों पर लगातार निगरानी रख रहा है। वैज्ञानिक इसलिए भी चिंतित हैं क्योंकि उपग्रह से मिली तस्वीरों में एक झील का दायरा बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है और उससे पानी की निकासी का कोई सुरक्षित रास्ता नजर नहीं आ रहा है।
ग्लेशियल झीलों पर मंडराता बड़ा खतरा
चीन के पर्यावरण और भूगर्भीय विशेषज्ञों ने चेतावनी जारी की है कि इस पूरे हिमालयी क्षेत्र में 100 से ज्यादा ऐसी ग्लेशियल झीलें हैं जो कभी भी बड़े खतरे का कारण बन सकती हैं। अगर इनमें से किसी भी झील की प्राकृतिक दीवार दबाव नहीं झेल पाई और टूटी, तो करोड़ों लीटर पानी एक साथ नीचे के इलाकों में तबाही मचा देगा। इसी वजह से रेस्क्यू टीमों को दोहरी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है-एक तरफ उन्हें मलबे में दबे लोगों को खोजना है, तो दूसरी तरफ सिर पर मंडरा रहे इस नए खतरे पर भी नजर रखनी है।
चीन में तबाही का सच और सेंसरशिप
इस भीषण आपदा से जुड़ा एक और पहलू दुनिया के सामने आया है। जिरोंग पोर्ट पर आई बाढ़ के भयावह दृश्य सीसीटीवी कैमरों में कैद हुए थे, जो सोशल मीडिया के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामने आए। इन वीडियो में मलबे का वो रूप दिखा जिससे बचने के लिए लोग भागते नजर आ रहे थे। हालांकि, चीन के अंदर से इस आपदा के विजुअल्स और जानकारियां बहुत सीमित मात्रा में बाहर आ पा रही हैं।
चीन में इंटरनेट पर सख्त सरकारी नियंत्रण और सेंसरशिप के कारण इस तबाही से जुड़े ज्यादातर वीडियो और पोस्ट ब्लॉक किए जा रहे हैं। चीनी सरकारी मीडिया पर भी नुकसान के विस्तृत फुटेज दिखाने के बजाय काफी गिने-चुने विजुअल ही जारी किए जा रहे हैं। हालांकि, वहां बड़े पैमाने पर राहत कार्य जारी है और आपातकालीन टीमें तैनात हैं। चीनी नेतृत्व ने भी ग्लेशियल झीलों और लैंडस्लाइड के खतरों पर कड़ा पहरा रखने के आदेश दिए हैं।

