नेपाल पॉलिटिकल क्राइसिस: नेपाल की नई सरकार ने सत्ता संभालते ही एक ऐसा फैसला लिया है जिससे पूरे देश के प्रशासनिक गलियारे में हड़कंप मच गया है। सरकार ने एक साथ 1500 से ज्यादा सरकारी अधिकारियों को पद से हटा दिया है।
बालेन सरकार और राष्ट्रपति के इस कदम को 'राजनीतिक नियुक्तियों' पर सर्जिकल स्ट्राइक माना जा रहा है। वहीं पड़ोसी देश पाकिस्तान का कराची शहर भीषण गर्मी और पानी की बूंद-बूंद के लिए तरस रहा है।
नेपाल में नियुक्तियां रद्द: खाली हो गए बड़े संस्थानों के शीर्ष पद
नेपाल की नई सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए 1500 से ज्यादा सरकारी नियुक्तियों को रद्द कर दिया है। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने शनिवार को एक विशेष अध्यादेश जारी किया, जिसके तहत 26 मार्च से पहले की गई सभी नियुक्तियों को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का आदेश दिया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस फैसले की गाज 1594 पदों पर बैठे अधिकारियों पर गिरी है। सरकार का तर्क है कि ये सभी 'राजनीतिक नियुक्तियां' थीं जिन्हें पारदर्शिता लाने के लिए हटाना जरूरी था।
इस बड़े फेरबदल के कारण नेपाल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी, त्रिभुवन यूनिवर्सिटी, बीपी कोइराला इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ साइंसेज और नेपाल एयरलाइंस जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों में शीर्ष पद खाली हो गए हैं। जानकारों का कहना है कि अचानक लिए गए इस फैसले से देश की शिक्षा, स्वास्थ्य और सार्वजनिक सेवाओं पर बुरा असर पड़ सकता है, क्योंकि निर्णय लेने वाले मुख्य अधिकारी अब दफ्तरों में नहीं हैं। विपक्ष इसे प्रशासनिक जोखिम बता रहा है, जबकि सरकार इसे जवाबदेही तय करने का हिस्सा मान रही है।
कराची में 'आसमानी आफत': 46 डिग्री की गर्मी और टैंकर माफिया का राज
पड़ोसी देश पाकिस्तान का कराची शहर इस वक्त नरक जैसी स्थिति का सामना कर रहा है। यहाँ भीषण गर्मी ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। रविवार को पारा भले ही 40.9°C था, लेकिन हवा में नमी के कारण लोगों को 46°C जैसी झुलसाने वाली गर्मी महसूस हुई। इस जानलेवा मौसम के बीच शहर में पानी और बिजली का भयंकर संकट खड़ा हो गया है। कराची वाटर एंड सीवरेज कॉर्पोरेशन के आंकड़ों के मुताबिक, शहर को रोजाना 650 मिलियन गैलन पानी चाहिए, लेकिन सप्लाई सिर्फ 610 मिलियन गैलन की हो रही है।
पानी की इस कमी का फायदा टैंकर माफिया उठा रहे हैं, जो लोगों को ऊंचे दामों पर पानी बेच रहे हैं। लांधी और ओरंगी टाउन जैसे इलाकों में हालात सबसे ज्यादा खराब हैं। इसके ऊपर से बिजली की घंटों लंबी लोडशेडिंग ने आग में घी डालने का काम किया है। लोग सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और एमक्यूएम-पाकिस्तान जैसे राजनीतिक दल इसे सरकार की नाकामी बता रहे हैं। विशेषज्ञों की मानें तो खराब इंफ्रास्ट्रक्चर कराची को तबाही की ओर ले जा रहा है।

