जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक-2026 पर आखिरकार गुरुवार को संसद की पूरी तरह से मुहर लग गई है। विपक्ष के भारी हंगामे और वॉकआउट के बीच यह महत्वपूर्ण विधेयक राज्यसभा से भी ध्वनिमत से सफलतापूर्वक पारित हो गया।
आपको बता दें कि परीक्षाओं में होने वाली गड़बड़ियों की त्वरित जांच, मुकदमों और सजा के प्रावधानों को बेहद सख्त बनाने वाले इस विधेयक को लोकसभा ने बुधवार को ही अपनी मंजूरी दे दी थी। अब इस कानून के देश में लागू होने के लिए सिर्फ राष्ट्रपति की औपचारिक स्वीकृति ही बाकी रह गई है। सरकार ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि देश के युवाओं और छात्रों का भविष्य ही सब कुछ है, इसलिए उनके हितों की रक्षा के लिए सरकार हरसंभव और कड़ा कदम उठाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।
विपक्ष का हंगामा और सदन से वॉकआउट
जब केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस विधेयक को सदन में पेश किया और इसके प्रावधानों का पूरा ब्योरा देना शुरू किया, तो विपक्षी सांसदों ने अपनी सीटों पर बैठे-ही-बैठे जोरदार नारेबाजी और टिप्पणियां शुरू कर दीं। इस पर मंत्री जितेंद्र सिंह ने चुटकी लेते हुए कहा कि शायद तीर एकदम सही निशाने पर लगा है। विपक्षी दलों ने इन कानूनी प्रावधानों को भविष्य के सुधारों के लिए नाकाफी करार देते हुए सीधे तौर पर सरकार की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने डिबेट की शुरुआत करते हुए आरोप लगाया कि इस नए विधेयक में सिर्फ पुराने आंकड़े बदले गए हैं, जिससे जमीनी स्तर पर कोई बड़ा सुधार नहीं होने वाला है। उन्होंने कहा कि असली फर्क तो तब पड़ता है जब सरकार बिना किसी पेपर लीक के पूरी पारदर्शिता के साथ परीक्षाएं आयोजित करके दिखाए। खरगे ने आगे यह भी आरोप लगाया कि 2024 में जब यह कानून बना था, तभी कांग्रेस ने इसमें बड़े बदलावों की मांग की थी, लेकिन सरकार ने तब उन मांगों को इसलिए नजरअंदाज कर दिया क्योंकि राहुल गांधी देश भर के छात्रों की आवाज को बुलंद कर रहे थे और सरकार को डर था कि इसका पूरा राजनीतिक श्रेय उन्हें मिल जाएगा।
विपक्ष के तीखे सवाल और गृह मंत्री की मौजूदगी पर विवाद
चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार से सीधे तौर पर कई कड़े सवाल पूछे। उन्होंने सरकार को घेरते हुए पूछा कि छात्रों पर लाठीचार्ज किसने करवाया, शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर आंसू गैस के गोले किसने छोड़े और पैलेट गन के इस्तेमाल का आदेश आखिरकार किसने दिया था? उन्होंने यह भी सवाल किया कि सादे कपड़ों में छात्रों की बेरहमी से पिटाई करने वाले लोग असल में कौन थे और दिल्ली पुलिस इस समय किसके अधीन काम कर रही है? इसके अलावा उन्होंने यह भी जानना चाहा कि सीआरपीएफ और आरएएफ किसके सीधे आदेशों पर काम करती हैं और इस पूरे प्रशासनिक घटनाक्रम का असली सर्वोच्च सूत्रधार कौन था? खरगे ने दो टूक कहा कि पूरा देश आज इन सभी सवालों का सीधा जवाब मांग रहा है। उन्होंने यहां तक कह दिया कि अगर देश के गृह मंत्री इन सवालों के जवाब सदन में नहीं दे सकते, तो उन्हें अपने पद से तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए या फिर प्रधानमंत्री को उन्हें उनके पद से बर्खास्त कर देना चाहिए। इस तीखी बहस के दौरान कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियां भी सामने आईं, जिस पर आपत्ति जताते हुए नेता सदन जेपी नड्डा ने खरगे को नसीहत दी कि वे सदन में ठोस तर्क रखें और इस तरह भावावेश में आकर बयानबाजी न करें। जैसे ही संशोधन विधेयक पर सात घंटे की लंबी चर्चा पूरी हुई, सभापति सीपी राधाकृष्णन ने कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय में राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह को इसका जवाब देने के लिए आमंत्रित किया। लेकिन राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता प्रमोद तिवारी ने सदन के भीतर गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी की तत्काल मांग कर दी। जब सभापति ने इस मांग को सिरे से खारिज कर दिया, तो कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व में तमाम विपक्षी दलों ने सदन से वॉकआउट करने का फैसला किया। इस पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए सदन के नेता जेपी नड्डा ने विपक्ष पर कड़ा प्रहार किया और उन्हें पूरी तरह से गैरजिम्मेदार करार देते हुए कहा कि इन्हें संसदीय कार्यवाही, संसदीय लोकतंत्र या फिर सदन की गरिमा और मर्यादा के प्रति दूर-दूर तक कोई सम्मान नहीं है।
सरकार की सफाई और जितेंद्र सिंह का कड़ा पलटवार
विपक्ष के तमाम आरोपों का करारा जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सदन को बताया कि विपक्ष ने इस नए विधेयक के प्रावधानों को बिना पढ़े ही उस पर सवाल खड़े किए हैं, जबकि इन प्रावधानों को बहुत ही सावधानी और गहराई के साथ तैयार किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह नया कानून कई तरह के गंभीर अपराधों से बहुत व्यापक तरीके से निपटेगा। इसमें मुख्य रूप से प्रश्न-पत्र और उत्तर-कुंजी का लीक होना, उत्तर-पुस्तिकाओं तथा कंप्यूटर सिस्टम से किसी भी तरह की छेड़छाड़ करना, परीक्षा की पूरी प्रक्रियाओं में हेराफेरी करना, नकली वेबसाइट्स और फर्जी प्रवेश-पत्र तैयार करना तथा परीक्षाओं में अनुचित साधनों के इस्तेमाल में मदद करने वाली संगठित कोशिशें पूरी तरह शामिल हैं। केंद्रीय मंत्री ने जोर देकर कहा कि पेपर लीक का यह मुद्दा इतना ज्यादा व्यापक और गंभीर है कि इसे अकेले सिर्फ सरकार के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। सरकार पहले से ही अपना काम पूरी मुस्तैदी से कर रही है और आगे भी करती रहेगी, लेकिन इसके साथ ही हम समाज के सभी वर्गों से सक्रिय सहयोग की अपील करते हैं। उन्होंने कहा कि हम हर अच्छे सुझाव के लिए हमेशा तैयार हैं और पूरी तरह से खुले मन के साथ आगे बढ़ रहे हैं। हम न केवल अपनी कही हुई बात पर अमल करने का माद्दा रखते हैं, बल्कि उससे भी एक कदम आगे बढ़कर कड़े फैसले लेने को तैयार हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह नया कानून सिर्फ प्रश्न-पत्र लीक होने तक ही सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में होने वाली हर तरह की अनुचित गतिविधियों पर रोक लगाना है। यह कानून केवल एनटीए (NTA) तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसके दायरे में यूपीएससी (UPSC), एसएससी (SSC) और देश के तमाम बैंक समेत अन्य सभी बड़ी परीक्षाएं भी पूरी तरह से शामिल की गई हैं।
समितियों, आंकड़ों और राजनीतिक बयानों पर घमासान
चर्चा के दौरान जब विपक्ष की ओर से राधाकृष्णन समिति की रिपोर्ट को पूरी तरह लागू न करने का गंभीर आरोप लगाया गया, तो उसका जवाब देते हुए जितेंद्र सिंह ने आंकड़े सामने रखे और कहा कि असल में उस समिति की 76 प्रतिशत सिफारिशें पहले ही सरकार द्वारा लागू की जा चुकी हैं। इसके अलावा उन्होंने नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा दिए गए उस दावे पर भी कड़ा सवाल उठाया जिसमें उन्होंने देश में 152 बार पेपर लीक होने की बात कही थी। मंत्री ने पलटवार करते हुए कहा कि खरगे साहब ने अपने भाषण में पंजाब और कर्नाटक जैसे राज्यों में हुए पेपर लीक का कोई जिक्र क्यों नहीं किया, जहां पर आज एनडीए (राजग) की सरकारें बिल्कुल भी नहीं हैं। देश से एनटीए को पूरी तरह से खत्म करने के सुझाव पर जवाब देते हुए जितेंद्र सिंह ने आंकड़े गिनाए और बताया कि हाल के दिनों में पेपर लीक की ज्यादातर घटनाएं राज्य स्तरीय एजेंसियों, विभिन्न राज्यों के लोक सेवा आयोगों और राज्य सेवा बोर्डों के माध्यम से ही सामने आई हैं। उन्होंने अपने संबोधन के दौरान बड़ा दावा करते हुए कहा कि आज से 15 साल पहले देश का युवा मजबूरी में देश छोड़कर विदेशों में जाने के बारे में सोचता था, लेकिन आज का युवा इतना सशक्त है कि उनमें से तमाम लोग वापस अपने देश लौटकर यहीं अपनी किस्मत आजमाना चाहते हैं। आपको बता दें कि सुबह जब ठीक 11 बजे सदन की कार्यवाही शुरू हुई थी, तभी कांग्रेस के सदस्यों ने ‘गृह मंत्री सदन में आओ’ के तीखे नारों के साथ जोरदार हंगामा शुरू कर दिया था। इसके बावजूद जब सभापति ने सदन की कार्यवाही लगातार जारी रखी, तो पूरा का पूरा विपक्ष सदन से वॉकआउट कर गया और वे प्रश्नकाल के दौरान भी सदन के भीतर वापस नहीं लौटे। इसके बाद जब दोपहर दो बजे सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, तब जाकर मंत्री जितेंद्र सिंह ने इस महत्वपूर्ण संशोधन विधेयक को आधिकारिक तौर पर सदन में प्रस्तुत किया। उन्होंने दोहराया कि पेपर लीक जैसी नासूर बन चुकी घटनाओं से आज देश का कोई भी राज्य या कोई भी राजनीतिक दल अछूता नहीं बचा है और इसकी पूरी सूची बहुत लंबी है। उन्होंने कहा कि देश में पूरी तरह से पारदर्शी परीक्षाएं कराने को लेकर सरकार की ‘जीरो टालरेंस’ की नीति है, और इसी कड़े संकल्प के तहत इस कानून को देश का सबसे सख्त कानून बनाया जा रहा है।
नकल माफियाओं पर नकेल कसने वाले नए कानून की मुख्य बातें
इस नए और ऐतिहासिक विधेयक में नकलचियों और पेपर लीक कराने वाले गैंग्स के लिए जो कड़े प्रावधान किए गए हैं, वे इस प्रकार हैं:
- यदि कोई व्यक्ति परीक्षा में किसी भी तरह के अनुचित साधनों के इस्तेमाल में लिप्त पाया जाता है, तो उसके लिए 5 से 10 वर्ष तक की लंबी सजा और 50 लाख रुपये तक के भारी जुर्माने का कड़ा प्रावधान किया गया है।
- यदि कोई संगठित अपराध (ऑर्गनाइज्ड क्राइम) के तहत इस तरह की साजिश रचता है, तो उसके लिए सजा को बढ़ाकर सीधे 7 से 10 वर्ष कर दिया जाएगा और साथ ही 10 करोड़ रुपये तक का भारी-भरकम जुर्माना भी भरना पड़ेगा।
- परीक्षा आयोजित करने वाले सेवा प्रदाताओं (सर्विस प्रोवाइडर्स) पर नियमों की अनदेखी करने पर पांच करोड़ रुपये तक का भारी जुर्माना लगाया जाएगा और साथ ही परीक्षा के आयोजन से पूरे 8 वर्ष तक की अवधि के लिए रोक लगा दी जाएगी।
- इसके अलावा सेवा प्रदाताओं के बड़े निदेशकों और उनके पूरे प्रबंधन को 5 से 10 वर्ष तक की जेल की सजा और पांच करोड़ रुपये तक का जुर्माना भुगतना होगा।
- इन मामलों की सुनवाई के लिए देश में विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाएगा, जिसके तहत महज 2 महीने के भीतर पुलिस जांच पूरी करनी होगी और आरोपपत्र दाखिल होने की तिथि से मात्र 3 महीने के भीतर कोर्ट में पूरा ट्रायल खत्म करना अनिवार्य होगा।
- मामलों की निष्पक्ष पैरवी के लिए विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति की जाएगी और जरूरत पड़ने पर मामलों की जांच स्पेशल टास्क फोर्स (STF) या किसी भी केंद्रीय एजेंसी को सौंपी जा सकेगी।
सपा और जेडीयू के सांसदों ने सदन में क्या रखा अपना पक्ष?
चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी की तरफ से जब सरकार की नीयत पर लगातार सवाल उठाए गए, तो उसका करारा जवाब देने के लिए भाजपा सांसद बृजलाल मैदान में उतरे। उन्होंने साल 1992 में उत्तर प्रदेश की तत्कालीन कल्याण सिंह सरकार द्वारा लाए गए ऐतिहासिक नकल विरोधी अध्यादेश की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि उस दौर से ठीक पहले उत्तर प्रदेश में एक ऐसी सरकार थी जिसमें नकल का खुला बोलबाला था और सपा के एक बड़े नेता ने तब यह तक बयान दिया था कि अगर हमारी सरकार सत्ता में आई तो राज्य में कोई भी छात्र कभी फेल नहीं होगा। भाजपा सांसद ने यह भी दावा किया कि उस समय छात्र एक विशेष राजनीतिक पार्टी के जिंदाबाद के नारे लगाते हुए सरेआम धुआंधार नकल किया करते थे और यहीं से देश में संगठित नकल माफियाओं की खतरनाक शुरुआत हुई थी। उन्होंने बताया कि उस दौर में देश भर के छात्र सिर्फ नकल करने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश में परीक्षा देने आया करते थे, जिसके चलते उत्तर प्रदेश को देश में ‘नकल की राजधानी’ कहा जाने लगा था। हालांकि, समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रो. रामगोपाल यादव ने पलटवार करते हुए दावा किया कि भाजपा सांसद बृजलाल द्वारा सदन में कही गई 90 प्रतिशत बातें पूरी तरह से गलत थीं, इसलिए उनकी बातों को गंभीरता से लेने की कोई जरूरत नहीं है। प्रो. यादव ने अपनी पार्टी की पुरानी मांग को दोहराते हुए कहा कि केंद्र सरकार को नीट (NEET) जैसी राष्ट्रीय परीक्षाओं को पूरी तरह से खत्म कर देना चाहिए और इसके अधिकार सीधे राज्यों को सौंप देने चाहिए, जबकि केंद्र सरकार अपने पास केवल 15 प्रतिशत सीटों का कोटा सुरक्षित रख सकती है। उन्होंने अपना तर्क देते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाली नीट परीक्षा में इतनी अधिक और जटिल प्रशासनिक व्यवस्थाएं हैं कि शीर्ष स्तर पर बैठे किसी भी व्यक्ति के लिए इसके पेपर लीक को रोक पाना नामुमकिन सा हो गया है। इसके साथ ही उन्होंने बृजलाल पर तंज कसते हुए यह भी टिप्पणी की कि कांग्रेस के जमाने से ही मुलायम सिंह यादव और समाजवादी पार्टी का खुलकर विरोध करके उत्तर प्रदेश के तमाम नेता दिल्ली की राजनीति में अपनी चमक बिखेरते आए हैं।
छात्र आंदोलन और विदेशी फंडिंग पर गरमाई सियासत
सदन में चर्चा के दौरान जनता दल (United) के सांसद संजय कुमार झा ने बहुत बड़ा बयान देते हुए कहा कि इस बेहद संवेदनशील विषय को कभी भी राजनीतिक नफे-नुकसान के तराजू में बिल्कुल नहीं तौला जाना चाहिए, क्योंकि पेपर लीक की यह गंभीर समस्या आज की नहीं है बल्कि यह देश के सामने एक बहुत बड़ी राष्ट्रीय चुनौती बन चुकी है। इस दौरान उन्होंने पिछले दिनों लोकसभा में प्रियंका गांधी वाड्रा द्वारा मद्रास आईआईटी के प्रतिष्ठित प्रोफेसर वी. कामकोटि पर दी गई तीखी टिप्पणी पर बिना किसी का नाम लिए जोरदार कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि जिस राजनीतिक खानदान की तीन-चार पीढ़ियों का उच्च शिक्षा और अकादमिक जगत से दूर-दूर तक कोई खास नाता नहीं रहा है, वे लोग भी आज देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी मद्रास पर सवाल उठा रहे हैं। इसके साथ ही संजय कुमार झा ने एक सनसनीखेज दावा करते हुए कहा कि उन्होंने एक मलयाली न्यूज़ चैनल पर खुद देखा था कि किस तरह देश-विदेश के 23 बड़े उद्योगपतियों ने बकायदा टिकट और पैसे देकर कुछ खास तत्वों को प्रायोजित छात्र आंदोलन में शामिल होने के लिए भेजा था। उन्होंने मांग की कि देश के गृह मंत्री को इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच करानी चाहिए। उन्होंने सीधा आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक ताकतों द्वारा देश के सीधे-साधे छात्रों के इस पवित्र आंदोलन को जबरन हाईजैक करने का कुत्सित प्रयास किया गया था। उनकी इस तीखी टिप्पणी के बाद सदन में विपक्षी सदस्यों ने एक बार फिर जोरदार हंगामा शुरू कर दिया, जिससे सदन का माहौल काफी गरमा गया।

