बिहार के उन युवाओं के लिए एक बेहद शानदार खबर है जो अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी की तलाश में जुटे हैं। बिहार सरकार ने बेरोजगार युवाओं को बड़ी राहत देते हुए राज्य की लोकप्रिय 'मुख्यमंत्री निश्चय स्वयं सहायता भत्ता योजना' को आगे भी जारी रखने का बड़ा फैसला लिया है।
राज्य मंत्रिमंडल ने इस योजना के संचालन को वित्तीय वर्ष 2026-27 से लेकर 2030-31 तक के लिए मंजूरी दे दी है। इस नेक काम के लिए सरकार ने 300 करोड़ रुपये का बजट भी तय कर दिया है, जिससे आने वाले पांच सालों तक हजारों युवाओं को आर्थिक संबल मिलता रहेगा।
रोजगार की तलाश में भटकने की जरूरत नहीं
यह योजना मुख्य रूप से उन प्रतिभाशाली युवाओं के लिए शुरू की गई थी जो पढ़ाई पूरी करने के बाद अपने पैरों पर खड़े होने की कोशिश कर रहे हैं। अक्सर देखा गया है कि डिग्री पूरी करने के बाद नौकरी खोजने के दौरान युवाओं को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ता है। सरकार की यह पहल उन युवाओं को न केवल आर्थिक सुरक्षा देती है, बल्कि नौकरी खोजने के दौरान उनका मनोबल भी बनाए रखती है। इसका मुख्य उद्देश्य युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना है ताकि वे बिना किसी आर्थिक दबाव के अपने भविष्य को सुरक्षित कर सकें।
किसे मिलेगा योजना का पूरा लाभ?
इस योजना का लाभ लेने के लिए कुछ शर्तें तय की गई हैं। राज्य के 20 से 25 वर्ष की आयु वर्ग के बेरोजगार युवा इसके पात्र हैं, जिन्होंने कम से कम इंटरमीडिएट (12वीं) या उससे अधिक यानी स्नातक (ग्रेजुएशन) की पढ़ाई पूरी कर ली है। यदि आप भी इन पात्रता शर्तों को पूरा करते हैं, तो आपको इस योजना के तहत हर महीने 1,000 रुपये की वित्तीय सहायता मिलेगी। सबसे खास बात यह है कि यह राशि सीधे आपके बैंक खाते में भेजी जाएगी और आप अधिकतम दो वर्षों तक इस सहायता का लाभ उठा सकते हैं।
300 करोड़ का बजट और युवाओं का भविष्य
कैबिनेट द्वारा स्वीकृत 300 करोड़ रुपये की राशि से इस योजना को अगले पांच वर्षों तक सुचारु रूप से चलाया जाएगा। सरकार का मानना है कि आर्थिक तंगी के कारण किसी भी युवा का करियर प्रभावित नहीं होना चाहिए। लगातार शिक्षा और कौशल विकास पर जोर देने वाली बिहार सरकार की यह योजना उन हजारों परिवारों के लिए उम्मीद की एक किरण है जो अपने बच्चों को बेहतर करियर की ओर बढ़ते देखना चाहते हैं। यह पहल युवाओं के भविष्य को संवारने और उन्हें बेहतर रोजगार के अवसरों से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी।

