भारत में शादी के रिश्ते को हमेशा से इंसान की जिंदगी का सबसे अहम और जरूरी हिस्सा माना जाता रहा है। लेकिन बदलते वक्त के साथ देश के युवाओं, और खास तौर पर Gen-Z की सोच में एक बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।
एक नए ट्रेंड और सामाजिक बदलाव के इशारों की मानें तो आने वाले 15 से 20 सालों में भारतीय महिलाएं शादी करने से पूरी तरह दूरी बना सकती हैं।
शादी के पुराने और पारंपरिक बंधन में बंधने के बजाय, आज की युवा महिलाएं अकेले रहने यानी सिंगल लाइफ और ‘सिंगल पैरेंटिंग’ को बहुत ज्यादा तवज्जो दे रही हैं।
Gen-Z आखिर क्यों बना रही है शादी से दूरी?
आज की आधुनिक महिलाएं अपने करियर और पढ़ाई को अपनी सबसे पहली प्राथमिकता मानती हैं। अपने पैरों पर पूरी तरह खड़े होने के बाद वे जिंदगी के हर फैसले के लिए किसी पर भी निर्भर नहीं रहना चाहती हैं। Gen-Z महिलाएं अपनी लाइफस्टाइल, पर्सनल फैसलों और अपनी आज़ादी के साथ किसी भी तरह का समझौता करने को तैयार नहीं हैं। वे शादी के बाद आने वाली तमाम पारिवारिक बंदिशों और जिम्मेदारियों में खुद को उलझाना बिल्कुल नहीं चाहती हैं। इसके अलावा, समाज में लगातार बढ़ते तलाक के मामलों और टूटते रिश्तों को देखकर आज के युवाओं का शादी के पूरे सिस्टम से धीरे-धीरे भरोसा कम होता जा रहा है।
सिंगल पैरेंटिंग और गोद लेने का तेजी से बढ़ता क्रेज
बिना शादी के अकेले रहने को अब समाज में किसी भी तरह के अकेलेपन का प्रतीक नहीं माना जा रहा है। आज की महिलाएं मां बनने का खूबसूरत सुख तो जरूर पाना चाहती हैं, लेकिन इसके लिए वे शादी करना अब जरूरी नहीं समझतीं।
भारतीय कानूनों के नियमों के तहत अब सिंगल महिलाएं भी आसानी से बच्चा गोद ले सकती हैं। कई युवा महिलाएं 30 से 35 साल की उम्र पार करने के बाद बिना शादी के ही बच्चा गोद लेने का पक्का मन बना रही हैं। इसके साथ ही आधुनिक मेडिकल तकनीक जैसे IVF और सरोगेसी ने भी इसमें बड़ी भूमिका निभाई है। साइंस और मेडिकल सुविधाओं के पहले से काफी बेहतर हो जाने की वजह से अब सिंगल महिलाओं के लिए मां बनना बेहद आसान हो गया है। IVF और एग फ्रीजिंग जैसे शानदार विकल्प महिलाओं को यह पूरी आज़ादी देते हैं कि वे जब चाहें, बिना किसी मेल पार्टनर के भी मां बन सकती हैं।
क्या हमारा समाज इस बड़े बदलाव को अपनाने के लिए तैयार है?
भारतीय समाज में आज भी बिना शादी के रहना या अकेले दम पर बच्चे को संभालना इतना आसान नहीं माना जाता है। लेकिन देश के बड़े महानगरों से शुरू हुआ यह बदलाव अब धीरे-धीरे छोटे शहरों तक भी अपनी पहुंच बना रहा है। देश के युवाओं का साफ तौर पर यह मानना है कि किसी गलत रिश्ते या घुटन भरी शादी में रहने से हजार गुना बेहतर यह है कि इंसान अकेला रहे और अपनी खुद की शर्तों पर अपनी जिंदगी जिए। आने वाले अगले 15 से 20 सालों में यह बड़ा बदलाव भारत के पुराने पारिवारिक ढांचे को पूरी तरह से बदलकर रख सकता है। अब यह देखना वाकई दिलचस्प होगा कि हमारा समाज इस आधुनिक और नई सोच को कितनी जल्दी और कैसे स्वीकार करता है।

