सोना, जिसे हमेशा से निवेशकों का 'सुरक्षित किला' माना जाता है, फिलहाल भारी दबाव में है। अपनी ऐतिहासिक ऊंचाई (रिकॉर्ड हाई) से पीली धातु की कीमतें 30 फीसदी से ज्यादा टूट चुकी हैं।
जो सोना कभी 5,600 डॉलर के स्तर पर राज कर रहा था, वह अब 4,000 डॉलर के आसपास झूल रहा है। इस गिरावट ने इस साल सोने के निवेशकों को तगड़ा झटका दिया है। मंगलवार को भी बाजार में सुस्ती रही और हाजिर सोना 0.8% गिरकर 4,129.36 डॉलर प्रति औंस पर आ गया, जबकि अमेरिकी सोना वायदा भी फिसला है। सवाल यह है कि आखिर सुरक्षित निवेश का बादशाह अचानक इतना कमजोर क्यों पड़ गया?
सोने की कीमतों में गिरावट के पीछे के असली कारण
सोने में आई इस बड़ी गिरावट के पीछे कई बड़े कारण हैं। जानकारों के अनुसार, खाड़ी देशों के तनाव के बावजूद निवेशकों का ध्यान अब सोने से हटकर बॉन्ड यील्ड और ब्याज दरों जैसी वित्तीय स्थितियों पर केंद्रित हो गया है। ईरान युद्ध के कारण ऊर्जा संकट और महंगाई की आशंकाओं ने ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। इसके अलावा, जून के अंत में टेक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) शेयरों में मुनाफावसूली के दौरान निवेशकों ने नकदी की जरूरत पूरी करने के लिए अपना सोना धड़ाधड़ बेचा, जिससे कीमतों पर दबाव बढ़ गया।
क्या यह गिरावट है खतरे का संकेत?
बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि सोने में आई यह कमजोरी ढांचागत नहीं, बल्कि एक चक्रीय बदलाव है। तकनीकी चार्ट्स पर नजर डालें तो 3,950 से 4,000 डॉलर का स्तर सोने के लिए एक मजबूत 'सपोर्ट जोन' की तरह काम कर रहा है। पहले भी कीमतें इसी स्तर से संभली हैं, इसलिए लंबी अवधि के निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है। कच्चे तेल की कीमतों में पिछली तिमाही में 40% की गिरावट राहत की बात है, जिससे महंगाई का दबाव कम होने के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं।
भविष्य में कैसी होगी सोने की चाल?
सोने के भविष्य पर नजर डालें तो तस्वीर काफी चमकती हुई दिखाई देती है। अनुमान है कि आने वाले कुछ हफ्तों में सोना वापस 4,400 डॉलर के स्तर तक जा सकता है। वहीं, अगर परिस्थितियां अनुकूल रहीं, तो 2026 के अंत तक यह 4,900 से 5,000 डॉलर के लक्ष्य को छू सकता है। 2027 तक तो नया रिकॉर्ड हाई बनने की भी संभावना है। साथ ही, दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अपना गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहे हैं, जो इस बात का सबूत है कि बड़े खिलाड़ी अभी भी सोने पर भरोसा जता रहे हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, ज्यादातर केंद्रीय बैंक आने वाले पांच सालों में सोने की अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की तैयारी में हैं, जो भविष्य में सोने की कीमतों को नई ताकत देगा।

