नई दिल्ली: देश की दिग्गज सरकारी तेल कंपनी भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने मार्च तिमाही के अपने नतीजे घोषित कर दिए हैं। लेकिन इस बार कंपनी के मुनाफे को लेकर जो आंकड़े सामने आए हैं, उसने बाजार और निवेशकों को हैरान कर दिया है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी तेल संकट और कंपनी को लगे कुछ एक्स्ट्रा चार्ज (असाधारण मदों) के चलते BPCL के मुनाफे में तिमाही आधार पर भारी गिरावट दर्ज की गई है। आइए जानते हैं कि आखिर कंपनी की बैलेंस शीट में ऐसा क्या हुआ कि मुनाफे का ग्राफ अचानक नीचे आ गिरा।
सालाना मुनाफा तो ठीक, लेकिन तिमाही आधार पर आई भारी गिरावट
BPCL द्वारा जारी नतीजों के मुताबिक, मार्च तिमाही में कंपनी का शुद्ध लाभ (Net Profit) साल-दर-साल आधार पर मामूली रूप से 1 फीसदी घटकर 3,191 करोड़ रुपये रह गया, जो पिछले साल इसी तिमाही में 3,214 करोड़ रुपये था। हालांकि, सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पिछली तिमाही (दिसंबर तिमाही) के मुकाबले कंपनी के मुनाफे में 57.7 फीसदी की भारी-भरकम गिरावट आई है।
बाजार के जानकारों के मुताबिक, इस बड़ी गिरावट की मुख्य वजह कंपनी को असाधारण मदों (exceptional items) में हुआ भारी नुकसान है। यह नुकसान BPCL की पूर्ण स्वामित्व वाली अपस्ट्रीम सहायक कंपनी, भारत पेट्रो रिसोर्सेज लिमिटेड (BPRL) से जुड़े 'इम्पेयरमेंट लॉस' (मूल्यह्रास हानि) के कारण हुआ है, जिसने मुनाफे की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया।
कमाई में हुआ सुधार, पर मार्जिन ने बढ़ाई चिंता
अगर बात कंपनी की कमाई यानी रेवेन्यू की करें, तो मार्च तिमाही के दौरान ऑपरेशन्स से होने वाला रेवेन्यू एक साल पहले के 1,26,864 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,34,896 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। लेकिन यहां भी तिमाही-दर-तिमाही आधार पर देखें तो रेवेन्यू में 1.2 फीसदी की नरमी देखी गई। वहीं दूसरी ओर, कंपनी का कामकाजी मुनाफा यानी EBITDA तिमाही आधार पर 13.8 फीसदी घटकर 10,061 करोड़ रुपये रह गया, जिससे कंपनी का मार्जिन भी 100 बेसिस पॉइंट घटकर 8.5 फीसदी पर आ गया।
घरेलू LPG सिलेंडरों की बिक्री से उठाना पड़ रहा नुकसान
नतीजों में एक और बड़ी बात सामने आई है कि कंपनी को घरेलू एलपीजी (LPG) सिलेंडरों की बिक्री पर लगातार घाटा उठाना पड़ रहा है। BPCL ने बताया कि मार्केट में गैस सिलेंडर की जो सेल्स वैल्यू है, वह उसकी असली लागत (Real Cost) से कम बनी हुई है, जिसके कारण कंपनी को यह नुकसान झेलना पड़ रहा है। मार्च तिमाही में कंपनी का रिफाइनरी थ्रूपुट भी पिछले साल के 10.58 MMT से कम होकर 10.40 MMT रहा। हालांकि, घरेलू बिक्री में साल-दर-साल आधार पर 3.28 फीसदी की मामूली बढ़त देखी गई और यह 13.86 MMT रही।
दिलचस्प बात यह है कि जहां BPCL के मुनाफे में सुस्ती दिखी, वहीं बाजार की दूसरी बड़ी तेल कंपनियों जैसे HPCL और IOCL ने मजबूत रिफाइनिंग मार्जिन और ईंधन की स्थिर मांग के चलते अपने तिमाही मुनाफे में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की है।
अमेरिका-ईरान युद्ध और कच्चे तेल की कीमतों का खेल
बाजार के विश्लेषकों को उम्मीद थी कि इस चौथी तिमाही में तेल विपणन कंपनियों (OMCs) का रिफाइनिंग मार्जिन काफी शानदार रहेगा, क्योंकि इस दौरान 'प्रोडक्ट क्रैक्स' (कच्चे तेल और तैयार पेट्रोल-डीजल की कीमतों का अंतर) बढ़ा था और कंपनियों को 'इन्वेंट्री गेन्स' (स्टॉक के दाम बढ़ने से होने वाला लाभ) की भी उम्मीद थी। हालांकि, देश की तीसरी सबसे बड़ी तेल रिफाइनर कंपनी BPCL ने इस चौथी तिमाही या पूरे वित्त वर्ष 2026 के लिए अपने औसत 'ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन' (GRM) का खुलासा नहीं किया है।
आपको बता दें कि जनवरी-मार्च की अवधि के दौरान वैश्विक स्तर पर ब्रेंट क्रूड ऑयल (कच्चे तेल) की कीमतों में लगभग 94 फीसदी का भारी उछाल देखने को मिला था। इस उछाल की बड़ी वजह कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर दुनिया भर में पैदा हुई चिंताएं थीं, जो फरवरी के अंत में शुरू हुए अमेरिका-ईरान सैन्य संघर्ष के कारण पैदा हुईं।
होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से बिगड़ा था समीकरण
तेल संकट की यह पूरी कहानी 28 फरवरी को शुरू हुई थी, जब अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान पर हमला कर दिया था। इसके जवाब में तेहरान (ईरान) की तरफ से भी कड़ी सैन्य कार्रवाई की गई, जिसके चलते दुनिया का सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ता 'होर्मुज स्ट्रेट' (Strait of Hormuz) बंद हो गया। इसी रास्ते से होकर भारत समेत दुनिया के बड़े हिस्सों में कच्चे तेल और गैस की सप्लाई की जाती है।
पूरे साल के प्रदर्शन में मारी बाजी
भले ही मार्च तिमाही के नतीजों में BPCL को झटका लगा हो, लेकिन पूरे फाइनेंशियल ईयर 2025-26 (FY26) के आंकड़े काफी दमदार रहे हैं। पूरे साल के लिए BPCL का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू पिछले साल (FY25) के 5 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 5.22 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। वहीं, अगर पूरे साल के नेट प्रॉफिट की बात करें तो यह पिछले वित्त वर्ष के 13,275 करोड़ रुपये से रॉकेट की तरह बढ़कर सीधे 23,303 करोड़ रुपये के पार निकल गया है।

